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Friday, 16 October 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड: चार साल बाद भी सवाल, तीन दोषियों को उम्रकैद, लेकिन वीआईपी एंगल की मांग जारी

अंकिता भंडारी हत्याकांड: चार साल बाद भी सवाल, तीन दोषियों को उम्रकैद, लेकिन वीआईपी एंगल की मांग जारी
-Friday World Oct 16,2026 
सितंबर 2022 में उत्तराखंड के ऋषिकेश के पास वनांतरा रिसॉर्ट में रिसेप्शनिस्ट के रूप में काम करने वाली 19 वर्षीय अंकिता भंडारी की हत्या ने पूरे देश को झकझोर दिया था। 18 सितंबर 2022 को वह लापता हुईं और चार दिन बाद उनकी लाश चिल्ला नहर से बरामद हुई। परिवार का आरोप था कि रिसॉर्ट में “स्पेशल सर्विस” यानी जबरन यौन शोषण का दबाव झेलने से इनकार करने के कारण उनकी हत्या हुई।

#जांच और सजा

घटना सामने आने के 24 घंटे के भीतर तीन आरोपियों—रिसॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के पुत्र), सौरभ भास्कर और अंकित गुप्ता—को गिरफ्तार कर लिया गया। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के निर्देश पर एक विशेष जांच टीम (एसआईटी) गठित की गई, जिसका नेतृत्व महिला आईपीएस अधिकारी ने किया। एसआईटी ने 88 दिनों में जांच पूरी की और करीब 500 पन्नों का विस्तृत आरोपपत्र दाखिल किया।

30 मई 2025 को कोटद्वार की अपर जिला एवं सत्र अदालत ने तीनों को हत्या, साजिश और महिला की गरिमा भंग करने के आरोप में दोषी ठहराते हुए आजीवन कठोर कारावास की सजा सुनाई। तीनों दोषी वर्तमान में जेल में सजा काट रहे हैं। उत्तराखंड पुलिस ने अक्टूबर 2026 में प्रेस वार्ता में इन तथ्यों को दोहराया और कहा कि सरकार ने त्वरित सुनवाई और प्रभावी अभियोजन सुनिश्चित किया।

#परिवार की मांग और विवाद

परिवार का कहना है कि मुख्य आरोपियों को सजा मिलने के बावजूद “वीआईपी” एंगल की पूरी जांच नहीं हुई। वे आरोप लगाते हैं कि किसी प्रभावशाली व्यक्ति के दबाव के कारण अंकिता को मजबूर किया गया था। अक्टूबर 2026 में भाजपा नेता दुष्यंत कुमार गौतम को सिक्किम का राज्यपाल नियुक्त किए जाने के बाद यह विवाद फिर से गरमा गया। अंकिता के माता-पिता ने इंडिया गेट पर धरना दिया और नियुक्ति पर रोक लगाने की मांग की। उन्होंने दावा किया कि गौतम ही वह कथित वीआईपी हैं।

गौतम ने इन आरोपों से इनकार किया है और मानहानि के मुकदमे दायर किए हैं। पुलिस और एसआईटी ने पहले कहा था कि जांच में किसी प्रभावशाली व्यक्ति की संलिप्तता का ठोस सबूत नहीं मिला। परिवार सीबीआई जांच की निगरानी में पूरी जांच की मांग कर रहा है। विपक्षी दल भी परिवार के साथ खड़े हुए हैं, जबकि सरकार का पक्ष है कि दोषियों को सजा मिल चुकी है और न्याय प्रक्रिया पूरी हुई।


यह मामला महिलाओं की सुरक्षा, रिसॉर्ट्स और पर्यटन स्थलों पर काम करने वाली युवतियों के शोषण के खतरे तथा राजनीतिक प्रभाव के आरोपों को लेकर गंभीर सवाल उठाता है। अंकिता जैसी कई बेटियां रोजगार के लिए घर से दूर जाती हैं। उनका सुरक्षित रहना समाज और व्यवस्था दोनों की जिम्मेदारी है।

चार साल बीत चुके हैं। तीन लोगों को उम्रकैद की सजा मिली है, परिवार को आर्थिक सहायता और नौकरियां दी गईं। फिर भी परिवार और कई लोग मानते हैं कि पूरी सच्चाई अभी सामने नहीं आई। न्याय की प्रक्रिया में पारदर्शिता और पीड़ित परिवार का विश्वास बनाए रखना उतना ही जरूरी है जितना दोषियों को सजा दिलाना।

अंकिता भंडारी की याद में सबसे बड़ी श्रद्धांजलि यही होगी कि हर बेटी सुरक्षित महसूस करे और कोई भी प्रभावशाली व्यक्ति कानून से ऊपर न रहे। सिस्टम को मजबूत बनाना, तेज जांच और निष्पक्ष न्याय ही असली समाधान है।

Sajjadali Nayani ✍
Friday World Oct 16,2026 

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