-Friday World Nov 2,2026
येरुशलम - इजरायल में चुनावी गतिरोध के बीच सबसे चौंकाने वाला ऑफर अरब पार्टी की तरफ से आया है।
शुक्रवार 30 अक्टूबर 2026 को पुराने अरब सांसद अहमद तिबी ने नेतन्याहू के गठबंधन के खिलाफ विपक्षी नेता गादी आइजेनकोट को जॉइंट लिस्ट का समर्थन देने का प्रस्ताव रखा। लेकिन उन्होंने शर्त रखी - "हम सरकार में शामिल नहीं होंगे।"
चैनल 12 से बात करते हुए तिबी ने कहा, "We won’t be part of the government. I don’t want a ministerial post. I don’t want to be in the cabinet. But without the Arab parties there won’t be change."
यानी, न कुर्सी चाहिए, न मंत्री पद, फिर भी नेतन्याहू को हटाने के लिए हम बाहर से समर्थन देंगे।
#तिबी ने क्यों कहा - "रबिन की तरह बनो आइजेनकोट"?
तिबी ने आइजेनकोट को सलाह दी कि वे दिवंगत प्रधानमंत्री यित्झाक राबिन की तरह बनें। 1993 में राबिन की अल्पमत सरकार के पास सिर्फ 56 सीटें थीं, लेकिन उन्होंने PLO के साथ ओस्लो एग्रीमेंट को पास करने के लिए अरब सांसदों के वोटों पर भरोसा किया था।
तिबी ने कहा, "हम हर उस व्यक्ति की मदद करना चाहते हैं, जो इस खराब सरकार को गिराना चाहता है और इसे बदलकर कोई दूसरी सरकार लाना चाहता है। हम सुधार और उम्मीद का हिस्सा बनना चाहते हैं।"
उन्होंने इसे "सेल्फ डिफेंस" बताया। तिबी के अनुसार अरब वोटरों ने 38% से बढ़कर लगभग 80% मतदान करके यह दिखाया कि यह वोट नेतन्याहू सरकार के खिलाफ आत्मरक्षा है।
#गणित क्या कहता है? 19 सीटें बनीं किंगमेकर
27 अक्टूबर के चुनाव में:
- नेतन्याहू ब्लॉक - 53 सीटें
- विपक्षी ब्लॉक (आइजेनकोट के नेतृत्व में) - 48 सीटें
- अरब पार्टियां - 19 सीटें: जॉइंट लिस्ट को 11 और रा'अम को 8 सीटें
सरकार बनाने के लिए 61 चाहिए। अरब पार्टियों के बिना कोई भी नहीं बना सकता। अगर 48 + 19 मिल जाएं तो 67 सीटें हो जाती हैं, जो बहुमत से 6 ज्यादा है।
इसीलिए तिबी ने कहा कि वे राष्ट्रपति आइजैक हर्जोग को सलाह देंगे कि सरकार बनाने का अधिकार नेतन्याहू विरोधी जायोनिस्ट पार्टियों के उम्मीदवार, खासकर आइजेनकोट को मिले।
#तिबी का बड़ा आश्वासन - क्या-क्या समर्थन करेंगे?
तिबी ने सिर्फ समर्थन ही नहीं, बल्कि लॉन्ग-टर्म गारंटी भी दी:
1. स्पीकर हटाने में समर्थन: लिकुड के अमीर ओहाना को नेसेट स्पीकर पद से हटाने के विपक्ष के प्रस्ताव का समर्थन करेंगे। विपक्ष 10 नवंबर को शपथ के दिन ही यह वोट कराना चाहता है।
2. 7 अक्टूबर की जांच: 7 अक्टूबर 2023 को हमास हमले की जांच के लिए स्टेट कमीशन बनाने का समर्थन।
3. सरकार गिराएंगे नहीं: जॉइंट लिस्ट किसी भी होने वाली नई सरकार के खिलाफ लिकुड के अविश्वास प्रस्ताव का समर्थन नहीं करेगी और न ही नेसेट को भंग करने की कोशिश करेगी। यानी, एक बार सरकार बन गई तो सेफ्टी नेट देंगे।
तिबी ने कतर से फंडिंग के आरोपों को भी खारिज किया।
पेंच कहां फंसा है? #विपक्ष में ही असमंजस
हालांकि, याशर, बी याचद (नफ्ताली बेनेट) और इसराइल बेयतेनु (लिबरमैन) जैसी पार्टियों ने अरब पार्टियों के साथ गठबंधन से इनकार कर दिया है। बेनेट और लिबरमैन ने कहा है कि वे अरब पार्टियों पर निर्भर सरकार, चाहे बाहर से ही क्यों न हो, का हिस्सा नहीं बनेंगे।
वहीं जॉइंट लिस्ट के चेयरमैन यूसेफ जबरीन ने अपनी शर्तें भी रखीं - फिलिस्तीनी राज्य के लिए राजनयिक प्रक्रिया, अरब समुदाय में अपराध रोकने के लिए फंडेड प्लान, और बेडौइन घरों को तोड़ने पर रोक।
राम पार्टी के नेता मंसूर अब्बास ने कहा है कि आइजेनकोट की 4 शर्तें (जियोनिस्ट और राष्ट्रवादी मूल्यों पर आधारित सरकार) उनके लिए रुकावट नहीं हैं।
अब सबकी नजर 4 नवंबर पर है, जब राष्ट्रपति हर्जोग सभी गुटों से सलाह के बाद सरकार बनाने का न्योता देंगे। क्या आइजेनकोट राबिन की तरह "बहादुर" बनकर इतिहास दोहराएंगे? या नेतन्याहू का 53 वाला आंकड़ा ही सबसे बड़ा रह जाएगा? फैसला अरब वोटों की इसी "बिना कुर्सी वाली" ताकत पर टिका है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Nov 2,2026
#AhmedTibi
#GadiEisenkot
#JointList
#IsraelElections2026
#Netanyahu
#Knesset
#YitzhakRabin
#RaamParty
#IsraelPolitics
#MinorityGovernment