-Friday World Nov 2,2026
लेकिन इस बार चर्चा बोझिल से आगे निकल कर खतरनाक हो गई है। अमेरिका के सबसे चर्चित कंजर्वेटिव पत्रकार टकर कार्लसन ने X पर 32 मिलियन से ज्यादा बार देखे गए एक पोस्ट में दावा किया है कि ट्रंप प्रशासन कुछ ही दिनों में ईरान पर परमाणु हमला कर सकता है, और इसके पीछे है इजरायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू का दबाव।
सवाल वही है जो आपने पूछा - ईरान पर हमला किसलिए? नेतन्याहू की कुर्सी के लिए किसी भी हद तक होगी जंग?
#टकर कार्लसन का बम - 7 नवंबर तक फैसला, टारगेट है Pickaxe Mountain
टकर कार्लसन ने लिखा, "Under pressure from Israeli prime minister Benjamin Netanyahu, the Trump administration may be within days of launching a nuclear strike on Iran."
उनके मुताबिक टारगेट है ईरान के मध्य में स्थित Pickaxe Mountain (पिकएक्स माउंटेन)। इजरायली खुफिया का दावा है कि ईरान ने यहां नतांज के पास 300 फीट ठोस ग्रेनाइट के नीचे बनी सुरंगों में फिर से यूरेनियम संवर्धन शुरू किया है।
कार्लसन का तर्क है - अमेरिका के पास मौजूद कोई भी पारंपरिक हथियार, यहां तक कि GBU-57 जैसे बंकर बस्टर भी 300 फीट ग्रेनाइट को नहीं तोड़ सकते। तो "The only military option is a nuclear strike."
और फिर वो लाइन जिसने सबसे ज्यादा सनसनी फैलाई - "Bibi calls Trump about it every day" - एक जानकार सूत्र के हवाले से कार्लसन ने लिखा कि नेतन्याहू रोज ट्रंप को फोन करते हैं।
कार्लसन ने चेतावनी दी, "Watch out for November 7. After the first nuclear strike, World War Three is inevitable. That war would be short and final."
#नेतन्याहू की कुर्सी का गणित - क्यों चाहिए जंग?
कार्लसन ने इसे सीधे इजरायल के चुनावी नतीजों से जोड़ा।
27 अक्टूबर 2026 के चुनाव में नेतन्याहू के ब्लॉक को 120 में से सिर्फ 53 सीटें मिली हैं। सरकार बनाने के लिए 61 चाहिए। विपक्षी ब्लॉक के पास 48 और अरब पार्टियों के पास 19 हैं, जो मिलकर 67 हो जाती हैं।
कार्लसन के मुताबिक, "Netanyahu is cornered and desperate. He can’t form a government unless Trump intervenes directly in Israeli politics and brokers a deal... Otherwise he could lose his position and face investigations and possible jail."
यानी नेतन्याहू को सत्ता से हटते ही भ्रष्टाचार के पुराने केसों में जेल का डर है। इसलिए "Netanyahu must stay close to Trump. He needs this war."
इसीलिए आरोप है कि नेतन्याहू ने अपने करीबी सहयोगियों - अमेरिकी रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ और CENTCOM कमांडर एडमिरल ब्रैड कूपर पर दबाव डाला है कि वे बातचीत नहीं, बल्कि युद्ध फिर शुरू करें। कार्लसन का यह भी दावा है कि विदेश मंत्री मार्को रुबियो और CIA चीफ जॉन रैटक्लिफ भी उसी लाइन पर हैं।
27 सितंबर को नेतन्याहू गुपचुप अबू धाबी गए थे ताकि UAE को हमले के लिए मनाया जा सके, लेकिन अमीरात ने मना कर दिया।
#ट्रंप क्या चाहते हैं? सीजफायर के बाद दो रास्ते
दिलचस्प यह है कि ट्रंप खुद दो नावों में हैं।
एक तरफ Axios की रिपोर्ट कहती है कि ट्रंप और नेतन्याहू के बीच शनिवार को हुई फोन कॉल टेंस थी। नेतन्याहू चाहते हैं कि अमेरिकी मिडटर्म चुनाव (3 नवंबर) के तुरंत बाद हमला हो, जबकि ट्रंप बातचीत को एक और मौका देना चाहते हैं।
दूसरी तरफ ट्रंप ने खुद मार-ए-लागो में कहा था कि ईरान की एक-दो परमाणु साइटें अभी भी टारगेट पर हैं और सेना उन्हें मिनटों में हिट कर सकती है। लेकिन 16 अक्टूबर को Newsmax को उन्होंने कहा था, "I wouldn't use nuclear. We don't have to."
वहीं उपराष्ट्रपति J.D. वेंस ने ईरान के राष्ट्रीय सुरक्षा प्रमुख मोहसिन रेजाई को पत्र लिखकर बातचीत फिर शुरू करने को "positive step" बताया है। कतर के मध्यस्थ भी तेहरान पहुंचे हैं।
सीजफायर 1 सितंबर से लागू है। ट्रंप को लगता है कि अगर जंग फिर शुरू हुई तो तेल के दाम बढ़ेंगे, और मिडटर्म में रिपब्लिकन को नुकसान होगा। लेकिन अगर ईरान परमाणु बम की तरफ बढ़ा, तो उसे मजबूरी में हमला करना पड़ेगा।
#अगर परमाणु हमला हुआ तो क्या होगा? दुनिया विनाश की चपेट में
कार्लसन ने जो सबसे डरावना पहलू बताया वह है परिणाम।
- पर्शियन गल्फ का पानी जहरीला: Pickaxe Mountain पर जमीन पर परमाणु धमाका हुआ तो उसका रेडिएशन पर्शियन गल्फ में जाएगा। इससे 10 करोड़ लोगों की पानी की सप्लाई जहरीली हो सकती है।
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- रूस को खुली छूट: कार्लसन के मुताबिक रूस ने दो देशों को बता दिया है कि अगर अमेरिका ईरान पर परमाणु हमला करता है तो उसे भी यूक्रेन में परमाणु हथियार इस्तेमाल करने की आजादी मिल जाएगी।
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- नया प्रिसीडेंट:1945 के बाद किसी देश ने युद्ध में परमाणु हथियार इस्तेमाल नहीं किया। अगर अमेरिका ने किया तो यह नया इतिहास होगा।
इसीलिए ईरान के नए सुप्रीम लीडर अयातुल्ला मोजतबा खामेनेई ने भी शनिवार को IRGC को आदेश दिया है कि किसी भी हमले का जवाब "बिना किसी भौगोलिक सीमा के" तुरंत दिया जाए। उन्होंने कहा - ईरान तय करेगा कि जंग कब खत्म होगी।
#निष्कर्ष: जुनून पैदा करने की कोशिश?
आपने बिल्कुल सही कहा - ऐसा कोई महीना नहीं जब हमले का माहौल न बनाया जाता हो। अब इस बोझिल चर्चा में परमाणु हमले का एंगल जोड़ कर जुनून पैदा किया जा रहा है।
सीजफायर के बाद ट्रंप जंग के लिए तैयार नहीं लगते, लेकिन नेतन्याहू की कुर्सी का संकट और Pickaxe Mountain जैसी अजेय साइट का बहाना - दोनों मिल कर एक खतरनाक कॉकटेल बना रहे हैं।
अगर यह सिर्फ कुर्सी बचाने की जंग है, तो यह जंग किसी एक देश की नहीं, पूरी दुनिया को लंबे समय के लिए विनाश की चपेट में ले जाएगी। फैसला 7 नवंबर से पहले होना है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World Nov 2,2026
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