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Sunday, 30 November 2025

तुर्की का दक्षिण एशिया में बढ़ता दखल: भारत की चुप्पी या चालाक जवाबी रणनीति?

तुर्की का दक्षिण एशिया में बढ़ता दखल: भारत की चुप्पी या चालाक जवाबी रणनीति?
नई दिल्ली: पिछले कुछ सालों में तुर्की ने दक्षिण एशिया में जिस तेजी से अपने पैर पसारे हैं, उसने भारत के लिए नया भू-राजनीतिक सिरदर्द पैदा कर दिया है।

 पाकिस्तान को खुला सैन्य और कूटनीतिक समर्थन देने के साथ-साथ बांग्लादेश, मालदीव, श्रीलंका और नेपाल में तुर्की की बढ़ती मौजूदगी भारत की ‘नेबरहुड फर्स्ट’ नीति पर सवाल खड़े कर रही है। 

पाकिस्तान के साथ तुर्की का खुला गठजोड़ तुर्की लंबे समय से पाकिस्तान का दूसरा सबसे बड़ा हथियार सप्लायर रहा है। 

बायरक्तार TB2 ड्रोन, असिसगार्ड और सोनगार ड्रोन मॉडल, F-16 अपग्रेड किट – ये सब पाकिस्तानी सेना की ताकत बढ़ा रहे हैं। 

मई 2025 के भारत-पाकिस्तान सीमा संघर्ष में तुर्की निर्मित ड्रोनों के इस्तेमाल की खबरों ने भारत को सतर्क कर दिया। कश्मीर मुद्दे पर राष्ट्रपति एर्दोआन का बार-बार पाकिस्तान के पक्ष में बोलना भी नई दिल्ली के लिए पुराना जख्म है। 

हिंद महासागर में नया खिलाड़ी तुर्की अब सिर्फ पाकिस्तान तक सीमित नहीं है। - 

मालदीव में तुर्की की ड्रोन बेस की चर्चा - 

श्रीलंका के हंबनटोटा बंदरगाह के पास तुर्की नौसेना की बढ़ती गश्त - 

बांग्लादेश के साथ रक्षा समझौते और सैन्य प्रशिक्षण कार्यक्रम ये सभी कदम भारत के हिंद महासागर क्षेत्र में प्रभुत्व को चुनौती दे रहे हैं। 

 भारत का जवाब: तुर्की के दुश्मनों से दोस्ती भारत चुप नहीं बैठा है। नई दिल्ली ने तुर्की के क्षेत्रीय प्रतिद्वंद्वियों के साथ रणनीतिक साँझेदारी तेज कर दी है: - 

ग्रीस के साथ रक्षा सहयोग बढ़ा, दोनों देशों की नौसेनाएँ संयुक्त अभ्यास कर रही हैं - 

आर्मीनिया को पिनाका रॉकेट लॉन्चर और अकाश मिसाइल सिस्टम की आपूर्ति - 
साइप्रस के साथ ऊर्जा और रक्षा क्षेत्र में नए समझौते - फ्रांस और इज़राइल के साथ मिलकर तुर्की निर्मित ड्रोनों का मुकाबला करने के लिए स्वदेशी एंटी-ड्रोन तकनीक विकसित 

हाल ही में भारत ने तुर्की के राष्ट्रीय दिवस समारोह का बहिष्कार किया। इसके जवाब में तुर्की ने अमेरिकी अपाचे हेलीकॉप्टरों की भारत डिलीवरी के लिए अपने हवाई क्षेत्र से उड़ान की अनुमति रोक दी। यह छोटी-छोटी नोंक-झोंक अब खुली शत्रुता का रूप ले रही है। 

 आगे क्या? तुर्की दक्षिण एशिया में पाकिस्तान के जरिए भारत को घेरने की कोशिश कर रहा है, तो भारत मध्य-पूर्व और पूर्वी भूमध्य सागर में तुर्की को नुकसान पहुँचाने की रणनीति अपना रहा है। यह खेल अब दोस्ती-दुश्मनी से ऊपर उठकर ठंडे युद्ध जैसा हो गया है – जिसमें कोई गोली नहीं चलेगी, लेकिन हर कदम गिना जाएगा। 

एक बात साफ है – दक्षिण एशिया में तुर्की का नया अवतार भारत के लिए लंबी चुनौती है, और जवाब भी उतना ही लंबा और कड़ा होने वाला है।
✒️सज्जाद अली नायाणी