Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Saturday, 17 January 2026

पुतिन का वो रहस्यमयी फोन कॉल: जिसने ट्रंप के ईरान हमले को रोक दिया और दुनिया को विनाश से बचाया

पुतिन का वो रहस्यमयी फोन कॉल: जिसने ट्रंप के ईरान हमले को रोक दिया और दुनिया को विनाश से बचाया
-Friday World January 17,2026 
बुधवार की देर रात, जब मध्य पूर्व का तापमान राजनीतिक और सैन्य दोनों स्तर पर उबाल पर था, इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुति को फोन घुमाया। उद्देश्य साफ था—ईरान पर संभावित बड़े हमले की पूर्व सूचना देना और क्षेत्रीय तनाव को नियंत्रित करने की कोशिश। लेकिन इस एक कॉल ने पूरी कहानी बदल दी।

 केवल 10 मिनट बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपनी सेना को आदेश दिया—मिशन अबोर्ट। जो हमला लगभग तय माना जा रहा था, वो अचानक रुक गया। दुनिया ने सांस ली, क्योंकि एक गलत कदम पूरे पश्चिम एशिया को परमाणु युद्ध की आग में झोंक सकता था। 

 पुतिन ने फोन पर क्या कहा, जो नेतन्याहू और ट्रंप की बोलती बंद कर गई? 

हालिया घटनाक्रमों से पता चलता है कि पुतिन ने इस कॉल में सख्त लेकिन कूटनीतिक लहजे में ईरान-इजरायल-अमेरिका के बीच चल रहे तनाव पर बात की। 
क्रेमलिन के आधिकारिक बयानों के अनुसार, पुतिन ने नेतन्याहू को स्पष्ट संदेश दिया कि रूस क्षेत्र में स्थिरता और सुरक्षा के लिए मध्यस्थता करने को तैयार है। उन्होंने जोर दिया कि सैन्य टकराव से कोई फायदा नहीं, बल्कि यह सभी पक्षों के लिए विनाशकारी साबित होगा। 

पुतिन ने आगे कहा कि रूस ईरान और इजरायल दोनों के साथ संतुलित संबंध बनाए रखना चाहता है। उन्होंने नेतन्याहू को चेतावनी दी कि अगर ईरान पर हमला हुआ तो रूसी-ईरानी सैन्य सहयोग और क्षेत्रीय प्रतिक्रिया इतनी तेज और घातक होगी कि कोई भी देश बच नहीं पाएगा। कुछ रिपोर्ट्स में दावा किया गया कि पुतिन ने ईरान की उन्नत मिसाइल क्षमता का जिक्र किया, जिससे इजरायल और अमेरिका के रक्षा तंत्र बेअसर हो सकते हैं। 

इसके तुरंत बाद पुतिन ने ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान को भी फोन किया और तीनों पक्षों के बीच डी-एस्केलेशन की अपील की। यह डबल कॉल ट्रंप प्रशासन के लिए बड़ा झटका था, क्योंकि रूस ने स्पष्ट कर दिया था कि वह ईरान को अकेला नहीं छोड़ेगा। 

ईरान की 'फतह' मिसाइल: 15 गुना तेज़, 1400 किमी रेंज, और परमाणु खतरा ईरान की सबसे चर्चित मिसाइल फतह-1 (Fattah-1) और उसका अपग्रेडेड संस्करण फतह-2 इस पूरे ड्रामे का केंद्र बिंदु है। ईरानी रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) के अनुसार: 

- स्पीड: मैक 13 से मैक 15 (ध्वनि की गति से 13-15 गुना तेज़, यानी लगभग 18,000 किमी/घंटा) 

- रेंज 1,400 किलोमीटर (इजरायल के किसी भी हिस्से को आसानी से कवर कर सकती है

- खासियत: हाइपरसोनिक गति पर उड़ान भरते हुए मिड-फ्लाइट में दिशा बदलने की क्षमता, जिससे इजरायल का आयरन डोम, एरो और अमेरिका के उन्नत डिफेंस सिस्टम इसे रोक नहीं पाते।

 ईरान का दावा है कि यह मिसाइल किसी भी क्षेत्रीय मिसाइल डिफेंस को चकमा दे सकती है। 

अगर इसमें परमाणु वॉरहेड जुड़ जाए—जैसा कि विशेषज्ञ लंबे समय से चिंता जता रहे हैं—तो परिणाम भयानक होंगे। पूरा मध्य पूर्व, खाड़ी देश और पश्चिम एशिया का बड़ा हिस्सा तबाही के कगार पर पहुंच जाएगा।

 फतह मिसाइल को ईरान ने "विजेता" नाम दिया है, और इसका उद्देश्य साफ है—दुश्मन को पहले ही मनोवैज्ञानिक झटका देना। 

 ट्रंप का पीछे हटना: दुनिया ने कैसे सांस ली? ट्रंप प्रशासन ने ईरान के परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को "खत्म" करने की बात कई बार कही थी। नेतन्याहू के साथ उनकी मुलाकातों में ईरान पर हमले के प्लान पर चर्चा हुई। लेकिन पुतिन के हस्तक्षेप ने सब बदल दिया।

 रूस ने न सिर्फ मध्यस्थता की पेशकश की, बल्कि यह संदेश भी दिया कि ईरान पर हमला रूस के हितों पर सीधा असर डालेगा। ट्रंप, जो पहले "अधिकतम दबाव" की नीति पर अड़े थे, अचानक पीछे हट गए। कुछ विश्लेषकों का मानना है कि पुतिन की चेतावनी ने ट्रंप को एहसास दिलाया कि यह खेल बहुत महंगा पड़ सकता है—न सिर्फ आर्थिक, बल्कि वैश्विक युद्ध के रूप में। 

शांति की एक किरण, या सिर्फ टाला गया विनाश? यह घटना बताती है कि मध्य पूर्व का तनाव कितना नाजुक है। एक फोन कॉल ने दुनिया को परमाणु तबाही से बचा लिया, लेकिन खतरा अभी टला नहीं है। ईरान की हाइपरसोनिक मिसाइलें, इजरायल-अमेरिका का गठजोड़ और रूस-ईरान का सहयोग—यह सब एक बड़े संघर्ष की ओर इशारा करता है।

 ट्रंप शायद अब इस आग से दूर रहें, लेकिन सवाल वही है—अगली बार पुतिन का फोन कितनी देर में आएगा? और क्या दुनिया फिर से इतनी आसानी से बच पाएगी? 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 17,2026