सज्जाद अली नायाणी✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 28/12/2025
25 दिसंबर 2025 को, जब पूरी दुनिया क्रिसमस की खुशियों में डूबी हुई थी, तभी अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने नाइजीरिया के उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में इस्लामिक स्टेट (ISIS) के आतंकवादियों पर घातक एयरस्ट्राइक की घोषणा की। ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया पोस्ट में कहा, "आज मेरी निर्देश पर अमेरिकी सेना ने नाइजीरिया में ISIS के 'टेररिस्ट स्कम' पर पावरफुल और डेडली स्ट्राइक की है, क्योंकि वे निर्दोष ईसाइयों को निशाना बना रहे हैं और उनकी क्रूर हत्याएं कर रहे हैं – ऐसे स्तर पर जो कई वर्षों, बल्कि सदियों से नहीं देखे गए!"
यह हमला नाइजीरिया सरकार के सहयोग और अनुरोध पर किया गया था। यू.एस. अफ्रीका कमांड (AFRICOM) ने पुष्टि की कि सोकोटो राज्य में ISIS से जुड़े समूहों (जैसे IS Sahel Province या Lakurawa) के कैंपों पर टोमाहॉक मिसाइलों से हमला किया गया, जिसमें कई आतंकवादी मारे गए। ट्रंप ने नवंबर में ही नाइजीरिया में ईसाइयों पर हमलों को रोकने के लिए सेना को तैयार रहने का आदेश दिया था और चेतावनी दी थी कि हिंसा जारी रही तो और कार्रवाई होगी।
नाइजीरिया अफ्रीका का सबसे अधिक जनसंख्या वाला देश है, जहां मुस्लिम (लगभग 56%) और ईसाई (लगभग 43%) के बीच जनसंख्या विभाजन है। पिछले दशकों में दोनों समुदायों की आबादी बढ़ी है, लेकिन उत्तर और मध्य भागों में धार्मिक हिंसा, बैंडिटरी, किसान-चरवाहा विवाद और बोको हराम, ISWAP तथा Lakurawa जैसे जिहादी समूहों ने हजारों लोगों की जान ली है। 2009 से अब तक 50,000 से अधिक नागरिक (मुस्लिम और ईसाई दोनों) मारे जा चुके हैं, जिनमें से कई हमले धार्मिक कारणों से माने जाते हैं। 2025 में ही ईसाइयों पर 7,000 से अधिक हत्याओं की रिपोर्ट्स आई हैं, जिन्हें कुछ अंतरराष्ट्रीय संगठन गंभीर धार्मिक उत्पीड़न मानते हैं।
ट्रंप के इस कदम को कुछ ईसाई समुदायों की रक्षा के रूप में देखा जा रहा है, जबकि आलोचक पूछ रहे हैं कि क्या यह नए क्रूसेड की शुरुआत है? वास्तव में, हिंसा सिर्फ धर्म तक सीमित नहीं है – इसमें जमीन, पानी, गरीबी और शासन की विफलता जैसे कारण भी हैं। अधिकांश हमले मुस्लिम बहुल क्षेत्रों में होते हैं, और मुस्लिम भी आतंकवाद के शिकार बनते हैं।
यह घटना नाइजीरिया की सुरक्षा व्यवस्था की विफलता और अंतरराष्ट्रीय हस्तक्षेप की जटिलता को दर्शाती है। अगर हिंसा जारी रही तो और एयरस्ट्राइक और तनाव बढ़ सकता है। शांति के लिए स्थानीय सरकार, समुदायों और अंतरराष्ट्रीय सहयोग जरूरी है – वरना धर्म के नाम पर खून की नदियां बहेंगी।
सज्जाद अली नायाणी✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 28/12/2025