फ्राइडे वर्ल्ड 1,2,2026
देश के लगातार सात वर्षों से “सबसे स्वच्छ शहर” का खिताब जीतने वाले मध्य प्रदेश के इंदौर में एक गंभीर सार्वजनिक स्वास्थ्य संकट पैदा हो गया है। भागीरथपुरा क्षेत्र में नगर निगम की पानी की मुख्य लाइन में लीकेज होने से गटर का दूषित पानी पेयजल लाइन में मिल गया, जिससे डायरिया और उल्टी का रोग फैल गया। इस घटना में अब तक 10 लोगों की मौत हो चुकी है और 2000 से अधिक लोग प्रभावित हुए हैं, जिनमें से सैकड़ों अस्पताल में भर्ती हैं। *
घटना क्या थी? नर्मदा नदी से आने वाली मुख्य पाइपलाइन में लीकेज हुआ, जिसके ऊपर एक शौचालय बना हुआ था। इससे गंदा पानी सीधे पीने के पानी में मिल गया। स्थानीय निवासियों ने पहले से ही पानी की बदबू और रंग पर शिकायत की थी, लेकिन उचित कार्रवाई नहीं हुई। यह घटना ऐसे शहर में हुई जहां स्वच्छता और वेस्ट मैनेजमेंट के बड़े-बड़े दावे किए जाते हैं।
सरकार की प्रतिक्रिया मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने तुरंत जांच समिति गठित की, तीन अधिकारियों को सस्पेंड किया और एक को बर्खास्त कर दिया। मृतकों के परिवारों को ₹2 लाख का एक्स-ग्रेशिया दिया जाएगा। प्रभावितों के इलाज का पूरा खर्च सरकार उठा रही है। क्षेत्र में टैंकरों से शुद्ध पानी की व्यवस्था की गई है और 70 से अधिक पानी के सैंपल लिए गए हैं।
मंत्री कैलाश विजयवर्गीय का विवादित बयान मुख्यमंत्री की बैठक के बाद मीडिया से बातचीत में कैबिनेट मंत्री **कैलाश विजयवर्गीय** (जिनका विधानसभा क्षेत्र इंदौर-1 में भागीरथपुरा आता है) से पत्रकारों ने पूछा कि प्राइवेट अस्पतालों में भर्ती मरीजों को रिफंड क्यों नहीं मिल रहा और पानी की व्यवस्था अभी भी अपूर्ण क्यों है?
इस सवाल पर मंत्री भड़क गए और बोले, “अरे छोड़ो यार… फालतू/फोकट सवाल मत पूछो”। उन्होंने कथित तौर पर “घंटा” जैसे अपशब्द भी इस्तेमाल किए। यह वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिससे विवाद और बढ़ गया।
माफी और खेद विवाद बढ़ने पर रात में मंत्री ने X (पूर्व ट्विटर) पर पोस्ट कर माफी मांगी:
“मैं और मेरी टीम पिछले दो दिनों से बिना सोए प्रभावित क्षेत्र में स्थिति सुधारने में लगे हुए हैं। दूषित पानी से मेरे लोग पीड़ित हैं और कुछ हमें छोड़कर चले गए हैं। इस गहरे दुख की स्थिति में मीडिया के एक सवाल पर मेरे शब्द गलत निकल गए। इसके लिए मैं खेद व्यक्त करता हूं। लेकिन जब तक मेरे लोग पूरी तरह सुरक्षित और स्वस्थ नहीं हो जाते, मैं चुप नहीं बैठूंगा।”
राजनीतिक विवाद कांग्रेस ने इसे “सत्ता के अहंकार” का प्रतीक बताते हुए मंत्री के इस्तीफे की मांग की है। विपक्ष का कहना है कि स्वच्छता के दावों के बावजूद ऐसी लापरवाही प्रशासन की विफलता दिखाती है। दूसरी ओर सरकार का दावा है कि स्थिति अब नियंत्रण में है और जांच के बाद दोषियों पर सख्त कार्रवाई होगी।
यह घटना इंदौर की स्वच्छता की प्रतिष्ठा को झटका पहुंचाने के साथ-साथ सार्वजनिक स्वास्थ्य, पानी व्यवस्था और नेताओं की जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रही है।
सज्जाद अली नायाणी✍
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