ओडिशा के संबलपुर में एक हैरान करने वाला नजारा सामने आया है। मात्र 187 होमगार्ड पदों -की भर्ती के लिए 9,000 से अधिक उम्मीदवार परीक्षा देने पहुंचे। जमादारपाली एयरस्ट्रिप को परीक्षा केंद्र बनाया गया, जहां सुबह से ही लंबी-लंबी कतारें लगीं। ये पद सिर्फ 5वीं पास योग्यता मांगते हैं और दैनिक वेतन मात्र 612 रुपये (मासिक करीब 18,000 रुपये) है, फिर भी ग्रेजुएट, पोस्ट-ग्रेजुएट, इंजीनियर और एमबीए धारक युवा अपनी किस्मत आजमाने पहुंचे।
यह दृश्य भारत में फैली भयंकर बेरोजगारी का जीता-जागता सबूत है। देश खुद को दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बताकर गर्व करता है, लेकिन युवाओं के लिए नौकरियां कहां हैं? सरकारी आंकड़ों के चमकदार दावों के पीछे छिपी हकीकत यही है – शिक्षित युवा कम योग्यता वाली नौकरियों के लिए मजबूर। संबलपुर पुलिस की इस भर्ती में 24 थानों के लिए पद थे, मुख्य रूप से वाहन चलाने और कंप्यूटर कार्य के लिए। फिर भी, इतनी भीड़ कि ड्रोन से निगरानी करानी पड़ी!
यह सिर्फ ओडिशा की नहीं, पूरे देश की समस्या है। युवा बेरोजगारी दर रिकॉर्ड स्तर पर है, और सरकारी नौकरियां ही एकमात्र उम्मीद बची हैं। नीतियां रोजगार सृजन पर फोकस करें, न कि सिर्फ जीडीपी के आंकड़ों पर। इन युवाओं की निराशा को अनदेखा करना खतरनाक हो सकता है। सरकार को जगना होगा, वरना यह जनसैलाब कभी भी उफान पर आ सकता है।
सज्जाद अली नायाणी ✍🏼