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Monday, 22 December 2025

सीरिया: असद के पतन के एक साल बाद – बदलता मध्य पूर्व

सीरिया: असद के पतन के एक साल बाद – बदलता मध्य पूर्व
दिसंबर 2024 में बशार अल-असद की सत्ता का अचानक अंत हो गया। हयात तहरीर अल-शाम (HTS) के नेतृत्व में विद्रोहियों ने दमिश्क पर कब्जा कर लिया। HTS के पूर्व नेता अहमद अल-शर्रा (जिन्हें अबू मोहम्मद अल-जूलानी के नाम से जाना जाता था) अंतरिम राष्ट्रपति बने। एक साल बाद, दिसंबर 2025 में, सीरिया नई वास्तविकताओं का सामना कर रहा है – स्थिरता की उम्मीदें, लेकिन चुनौतियां भी बरकरार। 

 जूलानी सरकार का उदय और अमेरिका से करीबी जूलानी कभी अल-कायदा से जुड़े थे और अमेरिका ने उन पर 10 मिलियन डॉलर का इनाम रखा था। लेकिन असद के पतन के बाद सब बदल गया। HTS ने खुद को भंग कर दिया और स्थानीय शासन पर फोकस किया। अमेरिका ने जुलाई 2025 में HTS को आतंकी सूची से हटाया और इनाम वापस लिया। राष्ट्रपति ट्रंप ने शर्रा से मुलाकात की, उन्हें "स्थिरता लाने वाला नेता" कहा। मार्च 2025 में वाशिंगटन विजिट और संयुक्त राष्ट्र में भाषण – ये सब रीयलपॉलिटिक्स के उदाहरण हैं। अमेरिका का मकसद: ISIS से लड़ाई और क्षेत्रीय स्थिरता। यूरोपीय देशों ने भी दूतावास खोले, प्रतिबंध हटाए। जूलानी ने अल्पसंख्यकों की रक्षा और समावेशी सरकार का वादा किया, जो पश्चिम को आकर्षित कर रहा है। 

हिज्बुल्लाह की सप्लाई लाइन का टूटना असद के दौर में सीरिया ईरान से हिज्बुल्लाह तक हथियारों का मुख्य रास्ता था। इराक से सीरिया होते हुए लेबनान तक ट्रक जाते थे। असद के गिरने के बाद यह लैंड रूट कट गया। हिज्बुल्लाह प्रमुख नईम कासिम ने खुद माना कि "सप्लाई रूट खो गया"। ईरान की धुरी (Axis of Resistance) कमजोर हुई। हिज्बुल्लाह ने नई सरकार से रिश्ते सुधारने की कोशिश की, लेकिन सीरियाई सेनाओं ने सीमा पर स्मगलिंग रोकने के अभियान चलाए। कुछ वैकल्पिक रूट (समुद्री या इराक से) बचे हैं, लेकिन इजरायली हमलों और नई सीरियाई नीतियों से मुश्किलें बढ़ीं। लेबनान में हिज्बुल्लाह की ताकत घटी, जो क्षेत्रीय संतुलन बदल रहा है। 

 अमेरिकी बलों पर हमले क्यों बढ़े? 2025 में सीरिया में अमेरिकी ठिकानों पर हमले बढ़े, खासकर ISIS से जुड़े। दिसंबर में पाल्मायरा में एक हमले में दो अमेरिकी सैनिक और एक दुभाषिया मारे गए। अमेरिका ने जवाब में दर्जनों ISIS ठिकानों पर बड़े हमले किए। वजहें: असद के बाद सुरक्षा खालीपन में ISIS ने फिर सिर उठाया। कुछ हमले "इनसाइडर" थे – नई सीरियाई सेनाओं में घुसे ISIS समर्थक। अमेरिका SDF (कुर्द बलों) के साथ मिलकर ISIS से लड़ रहा है, लेकिन नई सरकार के साथ सहयोग भी बढ़ा। हमले क्षेत्रीय अस्थिरता और ISIS की बची हुई ताकत का नतीजा हैं। 

सीरिया, लेबनान और ईरान की जियोपॉलिटिक्स का असली मतलब असद का पतन ईरान के लिए बड़ा झटका था। उसकी "रेजिस्टेंस एक्सिस" (हिज्बुल्लाह, हमास, सीरिया) टूट गई। ईरान ने अरबों डॉलर खर्च किए, लेकिन अब सीरिया में प्रभाव कम। तुर्की बड़ा लाभार्थी – HTS से करीबी, उत्तरी सीरिया में नियंत्रण। सऊदी अरब और अन्य अरब देश पुनर्निर्माण में निवेश कर प्रभाव बढ़ा रहे। इजरायल ने दक्षिणी सीरिया में कब्जा जमाया, हथियार नष्ट किए। लेबनान में हिज्बुल्लाह कमजोर, सीरिया से शरणार्थी वापसी की उम्मीद। असली मतलब: ईरान का प्रभाव घटा, तुर्की-अरब-अमेरिकी गठजोड़ मजबूत। लेकिन अल्पसंख्यक हिंसा (अलावाइट्स पर हमले) और ISIS खतरा बाकी। सीरिया अब सुन्नी-इस्लामिस्ट प्रभाव में, लेकिन समावेशी बनने की कोशिश।

 एक साल में सीरिया ने संयुक्त राष्ट्र में वापसी की, अर्थव्यवस्था में थोड़ी उम्मीद (1% ग्रोथ अनुमान)। लेकिन मानवीय संकट गहरा – लाखों विस्थापित, स्वास्थ्य सेवाएं कमजोर। भविष्य: स्थिरता या नई अस्थिरता? अंतरराष्ट्रीय समर्थन जरूरी है।
सज्जाद अली नायाणी✍