वॉशिंगटन। ट्रंप प्रशासन की कैरिबियन नीति में आग लगाने वाले कदमों – जैसे ड्रोन हमले और नौसेना तैनाती – को अमेरिकी जनता ने साफ तौर पर ठुकरा दिया है। नवीनतम CBS न्यूज/यूगॉव सर्वे (नवंबर 2025) के मुताबिक, 70% से ज्यादा अमेरिकी वेनेज़ुएला में सैन्य हस्तक्षेप के खिलाफ हैं। सिर्फ 21% का समर्थन है। आखिर क्यों? आइए, खोलते हैं इस विरोध की परतें।
अतीत के घाव अभी भी ताजा: इराक-अफगानिस्तान का सबक अमेरिका के पिछले 'एंडलेस वॉर्स' ने जनता को जख्मी कर दिया है। इराक और अफगानिस्तान में 20 सालों की जंग में 7,000 से ज्यादा अमेरिकी सैनिक मारे गए, ट्रिलियन्स डॉलर डूबे, और क्या मिला? अस्थिरता और आतंकवाद का उछाल। 2025 के युगॉव पोल में 51% अमेरिकी मानते हैं कि विदेशी हस्तक्षेप 'स्थिति को और बिगाड़ते हैं'। वेनेज़ुएला में नया युद्ध? बिल्कुल नहीं! लोग नहीं चाहते कि उनके बच्चे फिर 'फॉरगॉटन वॉर' में फंसें।
आर्थिक तंगी का डर: 'हमारी जेब पहले!' सैन्य अभियान का खर्च? अरबों डॉलर! अफगानिस्तान ने अमेरिकी अर्थव्यवस्था को चूसा, और आज महंगाई, बेरोजगारी और घरेलू संकटों के बीच जनता चिल्ला रही है – "क्यों हमारा पैसा विदेशी तानाशाहों पर?" Ipsos पोल (नवंबर 2025) कहता है कि अमेरिकी सैनिकों की मौत या लंबे युद्ध की आशंका से समर्थन 29% से गिरकर 15% रह जाता है। ट्रंप के वादे – 'अमेरिका फर्स्ट' – अब ही उलटे पड़ रहे हैं।
नैतिक दुविधा: 'बॉम्बिंग से लोकतंत्र नहीं आता!' कई अमेरिकी मानते हैं कि मादुरो की तानाशाही को डिप्लोमेसी, सैंक्शन्स और मानवीय सहायता से सुलझाना चाहिए, न कि बमों से। ट्रंप के 20+ ड्रोन स्ट्राइक्स (सितंबर 2025 से) में 80+ 'नार्को-टेररिस्ट्स' मारे गए – बिना कांग्रेस की मंजूरी! लेकिन इससे नागरिक मौतें, शरणार्थी संकट और लैटिन अमेरिका में अमेरिका-विरोध बढ़ा। 51% अमेरिकी एक्स्ट्रा-ज्यूडिशियल किलिंग्स के खिलाफ हैं। पूर्व NSA जॉन बोल्टन ने भी आलोचना की: "ड्रग बोट्स उड़ाना मादुरो को हिलाने का तरीका नहीं।"
राजनीतिक ध्रुवीकरण: रिपब्लिकन्स vs डेमोक्रेट्स का बैटल सर्वे दिखाते हैं गहरी खाई। रिपब्लिकन बेस में 58% ड्रोन हमलों के हामी, लेकिन सिर्फ 8% डेमोक्रेट्स। इंडिपेंडेंट्स (38%) युद्ध को 'बेकार' मानते हैं। वेनेज़ुएला डायस्पोरा में भी मतभेद – कुछ हस्तक्षेप चाहते हैं, ज्यादातर डरते हैं कि इससे इमिग्रेशन पॉलिसी और सख्त हो जाएगी। लैटिन अमेरिका में तो ब्राजील-कोलंबिया जैसे पड़ोसी ही विरोध कर रहे हैं।
क्षेत्रीय जोखिम: 'एक युद्ध, कई आग!' हस्तक्षेप से कैरिबियन में अस्थिरता फैलेगी – रूस-चीन का दखल बढ़ेगा, शरणार्थी लहर अमेरिका की सीमाओं पर दस्तक देगी। कॉमन ड्रीम्स रिपोर्ट कहती है: "ट्रंप का मिलिटरिज्म मिथक टूट चुका – जनता युद्ध नहीं, शांति चाहती है।" मादुरो ने भी 'पीस मैसेज' भेजा, लेकिन ट्रंप की 'डेडली न्यू फेज' की धमकी ने सबको सतर्क कर दिया।
निष्कर्ष: अमेरिकी जनता थक चुकी है – महंगे, खूनी और अनिश्चित युद्धों से। वेनेज़ुएला संकट को हल करने का रास्ता कूटनीति है, न कि बंदूक। अगर ट्रंप ने सुना नहीं, तो 2026 मिडटर्म्स में वोटर जवाब देंगे। क्या अमेरिका फिर 'गनबोट डिप्लोमेसी' की गलती दोहराएगा?
सज्जाद अली नायाणी ✍️