फ्राइडे वर्ल्ड 1,1,2026 सज्जाद अली नायाणी✍
1 जनवरी 2026 की आधी रात को न्यूयॉर्क शहर ने एक अभूतपूर्व इतिहास रचा। 34 वर्षीय डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट जोहरान क्वामे ममदानी (Zohran Kwame Mamdani) ने न्यूयॉर्क सिटी के मेयर पद की शपथ ली, और यह पहली बार हुआ जब किसी मेयर ने इस्लाम की पवित्र किताब *कुरान* पर हाथ रखकर शपथ ग्रहण की। यह न केवल शहर के लिए बल्कि पूरे अमेरिका में मुस्लिम समुदाय के लिए एक मील का पत्थर साबित हुआ है।
जोहरान ममदानी, जो उगांडा के कैंपाला में जन्मे हैं, भारतीय मूल के हैं। उनके पिता महमूद ममदानी एक प्रसिद्ध पोस्टकोलोनियल विद्वान हैं, जबकि मां मीरा नायर एक मशहूर फिल्मकार। वे न्यूयॉर्क शहर के पहले मुस्लिम, पहले **साउथ एशियन (भारतीय मूल के), और पहले अफ्रीका में जन्मे मेयर बन गए हैं। साथ ही, 1892 के बाद वे सबसे युवा मेयर भी हैं। उनकी जीत 2025 के मेयर चुनाव में हुई, जहां उन्होंने डेमोक्रेटिक प्राइमरी में पूर्व गवर्नर एंड्रयू कुओमो को हराया और जनरल इलेक्शन में रिपब्लिकन कर्टिस स्लिवा तथा इंडिपेंडेंट कुओमो को पछाड़ा।
शपथ ग्रहण समारोह: दो अलग-अलग आयोजन मेयर पद की शपथ दो चरणों में ली गई। पहला समारोह आधी रात को सिटी हॉल के नीचे बंद पड़े ऐतिहासिक सबवे स्टेशन (Old City Hall Station) में हुआ, जो न्यूयॉर्क के शुरुआती सबवे सिस्टम का हिस्सा है। यह जगह ममदानी की "वर्किंग क्लास" और इंफ्रास्ट्रक्चर निवेश के प्रति प्रतिबद्धता का प्रतीक है। यहां न्यूयॉर्क अटॉर्नी जनरल लेटिशिया जेम्स ने शपथ दिलाई।
दूसरा सार्वजनिक समारोह दोपहर में सिटी हॉल के स्टेप्स पर हुआ, जहां अमेरिकी सीनेटर बर्नी सैंडर्स ने शपथ दिलाई। दोनों समारोहों में ममदानी ने कुरान पर हाथ रखा, जो शहर के इतिहास में पहली बार हुआ। अमेरिकी संविधान के अनुसार, शपथ के लिए किसी धार्मिक किताब का इस्तेमाल अनिवार्य नहीं है, लेकिन अधिकांश पूर्व मेयरों ने **बाइबिल का उपयोग किया था।
इस्तेमाल की गई तीन खास कुरान कॉपीज ममदानी ने तीन विशेष कुरान का उपयोग किया, जो व्यक्तिगत, सांस्कृतिक और ऐतिहासिक महत्व रखती हैं:
1. दादाजी की कुरान – परिवार की विरासत, जो उनके दादा-दादी से जुड़ी है।
2. पॉकेट-साइज कुरान – 18वीं सदी के अंत या 19वीं सदी की शुरुआत की, जो न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी के **शोमबर्ग सेंटर फॉर रिसर्च इन ब्लैक कल्चर** से ली गई। यह कुरान ब्लैक इतिहासकार आर्टुरो शोमबर्ग के कलेक्शन का हिस्सा थी। इसका सादा डिजाइन (गहरे लाल कवर पर फूलों का मेडलियन, काली-लाल स्याही) रोजमर्रा इस्तेमाल के लिए बनाई गई थी, न कि राजसी प्रदर्शन के लिए।
लाइब्रेरी की मिडिल ईस्टर्न और इस्लामिक स्टडीज क्यूरेटर हिबा आबिद ने कहा, "यह छोटी कुरान न्यूयॉर्क के मुसलमानों की विविधता और पहुंच का प्रतीक है। यह आस्था और पहचान को एक साथ लाती है।" शोमबर्ग की दिलचस्पी अफ्रीकी मूल के लोगों के योगदान में थी, जो अमेरिका और अफ्रीका में इस्लाम-ब्लैक कल्चर के रिश्ते को दर्शाती है।
शपथ के बाद ये कुरान न्यूयॉर्क पब्लिक लाइब्रेरी में सार्वजनिक प्रदर्शन के लिए रखी जाएंगी।
ममदानी की पृष्ठभूमि और फोकस ममदानी ने अपने अभियान में **किफायती जीवन** (affordability) पर जोर दिया – किराया फ्रीज, फ्री बस सर्विस, यूनिवर्सल चाइल्डकेयर, शहर द्वारा संचालित ग्रॉसरी स्टोर्स, और न्यूनतम वेतन $30 तक बढ़ाना। वे **डेमोक्रेटिक सोशलिस्ट्स ऑफ अमेरिका** के सदस्य हैं और क्वींस में असेंबली मेंबर रह चुके हैं। मुस्लिम समुदाय के साथ उनका गहरा जुड़ाव रहा – वे अक्सर मस्जिदों में दिखते थे और पहली बार वोट देने वाले साउथ एशियन तथा मुस्लिम वोटर्स को जुटाया।
यह ऐतिहासिक क्षण न्यूयॉर्क के सबसे बड़े मुस्लिम समुदाय को मजबूती देता है, जो शहर की विविधता का जीता-जागता प्रमाण है। हालांकि कुछ कंजर्वेटिव्स ने इसकी आलोचना की (जैसे सीनेटर टॉमी ट्यूबरविल ने "द एनिमी इज इनसाइड द गेट्स" ट्वीट किया), लेकिन यह शहर की समावेशिता और बदलते अमेरिका का प्रतीक है।
जोहरान ममदानी की यह शपथ सिर्फ एक व्यक्ति की नहीं, बल्कि लाखों न्यूयॉर्कर्स की पहचान और आकांक्षाओं की जीत है – जहां आस्था, विरासत और प्रगति एक साथ आकर शहर को नई दिशा देती हैं। न्यूयॉर्क अब एक नए युग में कदम रख चुका है!
सज्जाद अली नायाणी✍
फ्राइडे वर्ल्ड 1,1,2026