सज्जाद अली नयानी ✍🏼फ्राइडे वर्ल्ड 27/12/2025
अमेरिका में उच्च शिक्षा प्राप्त करके वहां करियर बनाने का सपना देखने वाले हजारों भारतीय युवाओं के लिए अब नई मुश्किलें खड़ी हो गई हैं। डोनाल्ड ट्रम्प के दूसरे कार्यकाल में H-1B वर्क वीजा प्रोग्राम में बड़े सुधार किए गए हैं, जिसमें **रैंडम लॉटरी** को पूरी तरह खत्म कर
वेज-आधारित वेटेड सिलेक्शन सिस्टम लागू किया गया है।
मुख्य बदलाव क्या हैं? दिसंबर 2025 में DHS (Department of Homeland Security) द्वारा जारी फाइनल रूल के अनुसार, H-1B कैप के लिए सिलेक्शन अब **डिपार्टमेंट ऑफ लेबर** के वेज लेवल पर आधारित होगी। चार वेज लेवल में से: -
लेवल-IV (सबसे ऊंचा वेतन और स्किल) → सबसे ज्यादा मौका (4 गुना एंट्री) -
लेवल-III** → 3 गुना -
लेवल-II → 2 गुना -
लेवल-I (एंट्री-लेवल, कम वेतन) → न्यूनतम मौका (केवल 1 एंट्री) इसका मतलब है कि
उच्च वेतन और अनुभवी वर्कर्स को प्राथमिकता मिलेगी, जबकि फ्रेश ग्रेजुएट्स और कम वेतन वाली जॉब्स के लिए सिलेक्शन की संभावना काफी कम हो जाएगी।
अतिरिक्त $100,000 फीस – दूसरा बड़ा झटका** सितंबर 2025 में ट्रम्प प्रशासन द्वारा जारी प्रोक्लेमेशन के तहत नए H-1B पिटीशन्स (खासकर विदेश से आने वाले वर्कर्स के लिए) पर **$100,000** (लगभग ₹85 लाख) की अतिरिक्त फीस लगाई गई है। इस फीस को कोर्ट में भी मान्यता मिल चुकी है। इससे कंपनियां एंट्री-लेवल वेतन वाले विदेशी वर्कर्स को हायर करने से हिचकिचाएंगी, क्योंकि यह खर्च बहुत ज्यादा है।
भारतीयों पर असर अमेरिका में पढ़ाई करने वाले और STEM कोर्स में ग्रेजुएट होने वाले लाखों भारतीय छात्रों के लिए ये बदलाव खास तौर पर चुनौतीपूर्ण हैं। अब तक OPT के बाद H-1B के जरिए जॉब मिलना आसान था, लेकिन अब:
- एंट्री-लेवल जॉब्स के लिए मौके घटेंगे
- कंपनियां उच्च वेतन और अनुभवी वर्कर्स को प्राथमिकता देंगी
- भारतीय प्रोफेशनल्स को कनाडा, ऑस्ट्रेलिया, जर्मनी या यूरोप जैसे अन्य देशों में विकल्प तलाशने पड़ेंगे
सरकार का तर्क** USCIS और ट्रम्प प्रशासन का कहना है कि पुरानी रैंडम सिस्टम का दुरुपयोग हो रहा था, जिसमें कम वेतन वाले विदेशी वर्कर्स लाकर अमेरिकी वर्कर्स को नुकसान पहुंचाया जा रहा था। USCIS प्रवक्ता **मैथ्यू ट्रेजेसर** ने कहा कि यह बदलाव **हाई-स्किल्ड** और **हाई-पेड** वर्कर्स को प्राथमिकता देगा, जो अमेरिका की आर्थिक प्रतिस्पर्धा को बढ़ाएगा। **
नए नियम कब से लागू?** ये बदलाव **27 फरवरी 2026** से लागू होंगे और **FY 2027** H-1B कैप रजिस्ट्रेशन (मार्च 2026 के आसपास) पर लागू होंगे।
ये सुधार **अमेरिका-फर्स्ट** नीति का हिस्सा हैं, लेकिन इनकी असर वैश्विक टैलेंट – खासकर भारतीय युवाओं पर – बहुत गंभीर रहेगी। अब भारतीय छात्रों और प्रोफेशनल्स को अपने करियर प्लान को नए सिरे से सोचने की जरूरत है!
सज्जाद अली नयानी ✍🏼
फ्राइडे वर्ल्ड 27/12/2025