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Saturday, 20 December 2025

ज़ेलेंस्की की NATO का स्वप्ना छोड़ने की पेशकश: यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़ या मजबूरी की स्वीकारोक्ति?

ज़ेलेंस्की की NATO का स्वप्ना छोड़ने की पेशकश: यूक्रेन युद्ध में बड़ा मोड़ या मजबूरी की स्वीकारोक्ति?
कीव: चार वर्ष से अधिक समय से चल रहे रूस-यूक्रेन युद्ध में एक महत्वपूर्ण बदलाव आया है, जब यूक्रेनी राष्ट्रपति व्लोदिमिर ज़ेलेंस्की ने NATO सदस्यता की महत्वाकांक्षा को अस्थायी रूप से छोड़ने की पेशकश की है। यह पेशकश अमेरिकी सुरक्षा गारंटी के बदले में की गई है, जो ट्रंप प्रशासन की शांति योजना के दबाव में सामने आई लगती है। हालांकि ज़ेलेंस्की ने स्पष्ट किया कि वे किसी भी हाल में क्षेत्रीय समर्पण नहीं करेंगे। 

दिसंबर 2025 में बर्लिन में अमेरिकी दूतों से पांच घंटे की वार्ता के बाद ज़ेलेंस्की ने कहा कि यदि अमेरिका और पश्चिमी सहयोगी मजबूत सुरक्षा गारंटी प्रदान करें, जो रूस की भविष्य की आक्रमणता को रोकें, तो यूक्रेन NATO सदस्यता की उम्मीद फिलहाल छोड़ सकता है। यह बयान उस समय आया जब ट्रंप प्रशासन यूक्रेन पर शांति समझौते के लिए दबाव डाल रहा है, जिसमें पूर्वी क्षेत्रों में रूस के नियंत्रण को मान्यता देने और NATO में शामिल न होने की शर्तें शामिल हैं।

 फाइनेंशियल टाइम्स की रिपोर्ट के अनुसार, ट्रंप के विशेष दूतों ने ज़ेलेंस्की को अमेरिकी प्रस्ताव पर "कुछ दिनों" में जवाब देने का दबाव डाला, ताकि क्रिसमस तक समझौता हो सके। ट्रंप इसे अपने दूसरे कार्यकाल की बड़ी विदेश नीति सफलता बनाना चाहते हैं। हालांकि ज़ेलेंस्की ने क्षेत्र छोड़ने से इनकार किया है, कहते हुए कि न तो कानूनी और न नैतिक रूप से वे ऐसा कर सकते हैं। उन्होंने अपनी काउंटर-प्रस्ताव तैयार किया, जिसमें वर्तमान में नियंत्रित क्षेत्रों का कोई समर्पण नहीं है। 

यह पेशकश यूक्रेन की लंबे समय की रणनीति में बदलाव दर्शाती है। NATO सदस्यता कीव की सुरक्षा की मुख्य मांग रही है, लेकिन वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं में यह दूर की कौड़ी लग रही है। अमेरिका ने शुरू में रूस के अधिकांश दावों को समर्थन देने वाला प्लान पेश किया, जिसमें क्रीमिया और डोनबास को रूस के नियंत्रण में मान्यता दी जाए। ज़ेलेंस्की की NATO छोड़ने की तैयारियां इस दबाव का संकेत हैं, लेकिन वे मजबूत गारंटी जैसे आर्टिकल 5 जैसी सुरक्षा चाहते हैं। 

यूरोपीय सहयोगी इस प्रक्रिया में शामिल होने की मांग कर रहे हैं, क्योंकि अकेला अमेरिकी समझौता यूक्रेन को कमजोर छोड़ सकता है। जर्मनी और अन्य देश रूसी संपत्तियों के उपयोग से सहायता बढ़ाने पर जोर दे रहे हैं, लेकिन ट्रंप की "अमेरिका फर्स्ट" नीति से पश्चिमी एकता पर सवाल उठ रहे हैं। 

ज़ेलेंस्की खुद को दुविधा में पाते हैं: अमेरिकी सहायता के बिना युद्ध जारी रखना असंभव, लेकिन क्षेत्रीय समर्पण राजनीतिक आत्महत्या। वे ऊर्जा क्षेत्र में युद्धविराम और पुनर्निर्माण फंड की मांग कर रहे हैं। रूस ने सख्त रुख अपनाया है, किसी भी NATO जैसी गारंटी को अस्वीकार करते हुए।

 यह मोड़ "पूर्ण विजय" के सपने से "व्यावहारिक शांति" की ओर इशारा करता है। सवाल यह है कि यूक्रेन सुरक्षा और पुनर्निर्माण के बदले कितना त्याग करने को तैयार है। आने वाले सप्ताह इस युद्ध के भविष्य का फैसला करेंगे। 

सज्जाद अली नायाणी✍🏼