Breaking

यमन ने सऊदी अरब के सामने रखी अजीब शर्त, यमनियों की जाल में फंसा रियाज़...

Tuesday, 6 January 2026

ईरान की अजेय इच्छाशक्ति: 12-दिवसीय युद्ध में अमेरिका-इज़राइल को घुटनों पर लाकर दुनिया को चौंकाया

ईरान की अजेय इच्छाशक्ति: 12-दिवसीय युद्ध में अमेरिका-इज़राइल को घुटनों पर लाकर दुनिया को चौंकाया
Friday World January 6,2026
जून 2025 में जब इज़राइल ने ईरान के परमाणु ठिकानों और सैन्य अड्डों पर आश्चर्यजनक हमले शुरू किए, तो पूरी दुनिया ने सांस रोक ली। 13 जून को शुरू हुआ यह संघर्ष मात्र **12 दिनों** में समाप्त हुआ, लेकिन इसके परिणाम इतिहास के पन्नों पर स्वर्ण अक्षरों में अंकित हो गए। ईरान, जिसे दुनिया अकेला और कमज़ोर समझ रही थी, ने न केवल अपना बचाव किया, बल्कि दुश्मनों को ऐसा जवाब दिया कि अमेरिका और इज़राइल को पीछे हटना पड़ा। 

ईरान के सर्वोच्च नेता **आयातुल्लाह अली खामेनेई** ने पहले ही स्पष्ट कर दिया था कि इस लड़ाई में कोई साथी नहीं मिलेगा—न अरब देश, न चीन, न रूस। ईरान को अकेले ही दुश्मन का मुकाबला करना होगा। दुनिया को यकीन था कि दो-चार दिनों में ईरान घुटनों पर आ जाएगा, उसका बंटवारा हो जाएगा—जैसे सीरिया का हुआ। लेकिन हुआ ठीक उल्टा। ईरान ने मिसाइलों की बौछार से इज़राइल पर हमला किया, अमेरिकी बेस पर जवाबी कार्रवाई की, और अंततः युद्धविराम के साथ विजयी मुद्रा में खड़ा रहा। खामेनेई ने इसे "अमेरिका और इज़राइल पर बड़ी तमाचा" करार दिया। ईरान के इस दृढ़ संकल्प ने अरब देशों में अमेरिका-इज़राइल का खौफ कम कर दिया। अब क्षेत्रीय देश सोचने लगे कि शायद ईरान को हराना इतना आसान नहीं।

 इस युद्ध के बाद अमेरिका को एहसास हुआ कि ईरान के खिलाफ सीधी कार्रवाई से उसके एयरबेस और हितों को भारी नुकसान हो सकता है। ईरान ने कतर में अमेरिकी अल उदैद एयरबेस पर मिसाइल दागकर साबित कर दिया कि जवाबी हमला अब सिर्फ़ धमकी नहीं, हकीकत है। इससे अमेरिका और उसके सहयोगियों में हड़कंप मच गया। 

फिर शुरू हुई नई साजिशें। सीआईए, मोसाद और अन्य पश्चिमी खुफिया एजेंसियां ईरान में अस्थिरता पैदा करने के लिए सक्रिय हो गईं। आर्थिक संकट, महंगाई और रियाल की गिरावट का फायदा उठाकर प्रदर्शन भड़काए गए। मकसद था इस्लामिक रिपब्लिक को कमज़ोर करना, इस्लामिक शासन को उखाड़ फेंकना और एक पश्चिमी पिट्ठू सरकार स्थापित करना। इस्लाम को अपनी मर्ज़ी से मोड़ना, इस्लामोफोबिया फैलाना और मुस्लिम दुनिया की दौलत लूटना—यह सब एक बड़े षड्यंत्र का हिस्सा था। 

जब ये कोशिशें कामयाब नहीं हुईं, तो अमेरिका ने वेनेजुएला को निशाना बनाया। ईरान के करीबी सहयोगी निकोलस मदुरो पर दबाव बढ़ाया गया, ड्रोन और हथियारों के व्यापार पर प्रतिबंध लगाए गए, और यहां तक कि सैन्य कार्रवाई की धमकियां दी गईं। यह संदेश स्पष्ट था—ईरान, अगर तुम नहीं झुके तो तुम्हारे दोस्तों को भी कुचल देंगे। 

लेकिन आयातुल्लाह खामेनेई ने हार नहीं मानी। दिसंबर 2025-जनवरी 2026 में जब ईरान में आर्थिक संकट के चलते बड़े पैमाने पर प्रदर्शन शुरू हुए, तो खामेनेई ने एक ऐतिहासिक स्पीच दी। उन्होंने प्रदर्शनकारियों की आर्थिक शिकायतों को जायज़ माना, लेकिन "दंगाइयों" को उनकी जगह बताने की चेतावनी दी। उन्होंने विदेशी ताकतों पर आरोप लगाया कि वे ईरान को अंदर से तोड़ना चाहते हैं। इस स्पीच ने ईरानी जनता को गुमराह होने से बचा लिया। प्रदर्शनकारी और सरकार के बीच फर्क साफ हुआ—लोग आर्थिक बेहतरी चाहते हैं, विदेशी साजिश नहीं। खामेनेई की इस दृढ़ता ने दुश्मनों के मुँह पर जोरदार तमाचा जड़ दिया। ईरान फिर से एकजुट खड़ा हो गया। 

यह कहानी सिर्फ़ युद्ध की नहीं, बल्कि एक राष्ट्र की अटूट इच्छाशक्ति की है। ईरान ने साबित किया कि जब इरादे पक्के हों, तो अकेले भी दुनिया की महाशक्तियों को चुनौती दी जा सकती है। 12 दिनों के युद्ध ने दुनिया को दिखाया कि ईरान न झुकता है, न टूटता है। 

आज ईरान फिर से उठ खड़ा है—सबके सामने, सिर ऊंचा करके। यह विजय सिर्फ़ सैन्य नहीं, बल्कि आध्यात्मिक और वैचारिक भी है। जो देश अपने लोगों पर भरोसा रखता है, वह कभी हार नहीं मानता। 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 6,2026