Friday World 1,1,2026
यमन का संकट एक बार फिर गहरा गया है। दक्षिणी यमन में Southern Transitional Council (STC) की तेज़ी से बढ़ती सैन्य कार्रवाई ने क्षेत्रीय शक्तियों के बीच तनाव को नई ऊंचाई दे दी है। UAE-समर्थित STC ने दिसंबर 2025 में हद्रमौत और अल-महरा प्रांतों पर बड़े पैमाने पर कब्जा कर लिया, जिसमें सैयून शहर और तेल-समृद्ध इलाके शामिल हैं। इस बीच, ईरान ने स्पष्ट संदेश दिया है कि वह यमन की एकता और क्षेत्रीय अखंडता को बनाए रखने के लिए किसी भी ऐसे कदम को स्वीकार नहीं करेगा जो अस्थिरता बढ़ाए और पूरे क्षेत्र में असुरक्षा का कारण बने।
ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माईल बक़ाई ने बुधवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि तेहरान यमन के दक्षिणी और पूर्वी इलाकों में हो रही सुरक्षा संबंधी घटनाओं पर गहरी नजर रखे हुए है। उन्होंने सभी पक्षों से संयम बरतने और संवाद के जरिए मुद्दों का हल निकालने की अपील की। बक़ाई ने जोर देकर कहा कि यमन संकट का एकमात्र स्थायी समाधान व्यापक संवाद, रोडमैप का क्रियान्वयन और यमन की क्षेत्रीय एकता के ढांचे के भीतर एक समावेशी सरकार का गठन है।
ईरान का यह बयान ऐसे समय में आया है जब STC ने सऊदी अरब की वापसी की मांग को ठुकरा दिया है। STC ने हद्रमौत में सैयून और तारिम शहरों पर कब्जा कर लिया, जिसके बाद प्रो-सरकार बलों को मारिब की ओर पीछे हटना पड़ा। अल-महरा प्रांत में भी STC ने स्थानीय नेताओं को अपने साथ मिलाया और ओमान सीमा से लगे इलाकों पर नियंत्रण बढ़ाया। STC का दावा है कि ये कार्रवाई चरमपंथियों को बाहर निकालने और तस्करी रोकने के लिए की गई है, लेकिन इससे यमन की एकता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
यमन में STC की तेज़ प्रगति: एक नजर में
- हद्रमौत प्रांत: यमन का सबसे बड़ा प्रांत, जहां 80% से ज्यादा तेल भंडार हैं। STC ने सैयून, तारिम और पेट्रोमासीला जैसी प्रमुख तेल सुविधाओं पर कब्जा किया।
- अल-महरा प्रांत: ओमान से सटा क्षेत्र, जहां STC ने बिना ज्यादा विरोध के नियंत्रण हासिल किया, जिसमें ग़ैदाह शहर और निश्तून बंदरगाह शामिल।
- परिणाम: STC अब पूर्वी दक्षिण यमन के अधिकांश हिस्से पर काबिज है, जो 1990 से पहले स्वतंत्र दक्षिण यमन के क्षेत्र के करीब है। इससे अलगाववादी मांगें और मजबूत हुई हैं।
सऊदी अरब ने STC से इन प्रांतों से वापस जाने की अपील की और यहां तक कि हवाई हमलों की रिपोर्ट्स भी आईं, लेकिन STC ने साफ इनकार कर दिया। UAE और सऊदी अरब के बीच बढ़ते मतभेद अब खुलकर सामने आ रहे हैं, जहां UAE STC का मजबूत समर्थक बना हुआ है।
ईरान का रुख साफ है—यह घटनाक्रम क्षेत्रीय स्थिरता के लिए खतरा है। तेहरान का मानना है कि यमन में विभाजन की कोशिशें सिर्फ हूती विद्रोहियों के खिलाफ लड़ाई को कमजोर करेंगी, बल्कि पूरे पश्चिम एशिया में अस्थिरता फैलाएंगी। बक़ाई ने जोर दिया कि सभी संबंधित पक्षों को यमन की जनता के हितों और क्षेत्रीय सुरक्षा को प्राथमिकता देते हुए संवाद का रास्ता अपनाना चाहिए।
क्षेत्रीय प्रभाव और भविष्य की चुनौतियां यमन का यह नया मोड़ न सिर्फ सऊदी-UAE प्रतिद्वंद्विता को बढ़ावा दे रहा है, बल्कि लाल सागर और अरब सागर के व्यापार मार्गों पर भी असर डाल सकता है। STC की सफलता से दक्षिण यमन में अलगाव की संभावना मजबूत हुई है, जो 1990 के एकीकरण को उलट सकती है। ईरान, जो हूती समर्थक माना जाता है, अब यमन की एकता की वकालत कर रहा है ताकि क्षेत्र में अमेरिका-इजरायल प्रभाव को सीमित रखा जा सके।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर संवाद नहीं हुआ तो यमन में नया गृहयुद्ध छिड़ सकता है, जिसमें सऊदी, UAE, ईरान और अन्य क्षेत्रीय शक्तियां और गहराई से उलझ सकती हैं। फिलहाल, ईरान का संदेश स्पष्ट है: अस्थिरता फैलाने वाले कदम अस्वीकार्य हैं। यमन की जनता के लिए शांति और एकता ही एकमात्र रास्ता है।
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Sajjadali Nayani ✍