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Thursday, 8 January 2026

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का तीखा संदेश: पश्चिम सम्मानजनक वार्ता के लिए तैयार नहीं, तानाशाही की नीति बनी सबसे बड़ी रुकावट

ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची का तीखा संदेश: पश्चिम सम्मानजनक वार्ता के लिए तैयार नहीं, तानाशाही की नीति बनी सबसे बड़ी रुकावट।
Friday World 🌎 8 जनवरी, 2026
तेहरान से लगातार जारी मजबूत आवाज़ ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पश्चिमी देशों, विशेषकर अमेरिका की एकतरफा और दबाव वाली नीतियों को फिर से बेनकाब कर दिया है। 8 जनवरी 2026 को लेबनान की राजधानी बेरूत में बोलते हुए ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने स्पष्ट किया कि ईरान युद्ध नहीं चाहता, लेकिन हर स्थिति के लिए पूरी तरह तैयार है। उन्होंने कहा, "हम युद्ध नहीं चाहते, लेकिन युद्ध के लिए भी तैयार हैं। हम अमेरिका के साथ वार्ता के लिए तैयार हैं, बशर्ते वह आपसी सम्मान और साझा हितों पर आधारित हो, न कि वाशिंगटन की तरफ से तानाशाही (dictation) थोपी जाए।" 

यह बयान ठीक उसी समय आया है जब ईरान-अमेरिका-इज़राइल के बीच तनाव नए सिरे से चरम पर है। जनवरी 2026 की शुरुआत में ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों के बीच अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने सोशल मीडिया पर धमकी भरे पोस्ट किए थे कि यदि ईरान ने शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों पर गोली चलाई तो अमेरिका उनकी "रक्षा" के लिए आएगा और "हम लॉक एंड लोडेड हैं, तैयार हैं"। ईरानी अधिकारियों ने इसे "लापरवाह और खतरनाक" करार दिया और चेतावनी दी कि अमेरिकी हस्तक्षेप की स्थिति में क्षेत्रीय अमेरिकी ठिकानों को निशाना बनाया जा सकता है। 

अराघची ने पत्रकारों से कहा कि वर्तमान परिस्थितियों में अमेरिका के साथ वार्ता की कोई गुंजाइश नहीं है, क्योंकि उनकी नीतियां "ईमानदार संवाद" की बजाय दबाव और एकतरफा शर्तें थोपने पर केंद्रित हैं। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान ने कभी वार्ता का रास्ता नहीं छोड़ा। 2015 के संयुक्त व्यापक कार्य योजना समझौते (JCPOA) से अमेरिका के एकतरफा बाहर निकलने के बाद भी तेहरान ने अप्रत्यक्ष वार्ताओं में हिस्सा लिया, लेकिन हर बार पश्चिम ने नए प्रतिबंध लगाए या शर्तों को और सख्त किया। 

ईरान की स्थिति साफ है: हमने वार्ता की मेज़ कभी नहीं छोड़ी, लेकिन सम्मानजनक संवाद ही एकमात्र विकल्प है। अराघची ने कहा, "जब तक अमेरिकी यह नहीं स्वीकार करते कि वार्ता तानाशाही नहीं, बल्कि आपसी सम्मान और हितों पर आधारित होनी चाहिए, तब तक सार्थक बातचीत शुरू नहीं हो सकती।" उन्होंने ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत की संभावना को भी खुला रखा, लेकिन शर्त रखी कि वह "परस्पर सम्मान" पर टिकी होनी चाहिए। 

यह बयान ईरान की रणनीतिक दृढ़ता और आत्मविश्वास का प्रतीक है। हाल के वर्षों में तेहरान ने अपनी रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया है – लंबी दूरी की मिसाइलें, क्षेत्रीय प्रभाव और आर्थिक चुनौतियों के बावजूद मजबूत रुख। ईरान में जारी महंगाई, घरेलू अशांति और सैन्य दबाव के बीच भी तेहरान का कहना है कि वह झुकेगा नहीं। विश्लेषकों का मानना है कि 2026 ईरान के लिए निर्णायक वर्ष साबित हो सकता है, जहां आर्थिक प्रतिबंध, विरोध प्रदर्शन और बाहरी धमकियों के बीच संतुलन बनाना एक बड़ी चुनौती है।

 ईरान का यह संदेश न केवल अमेरिका-इज़राइल गठजोड़ के लिए, बल्कि कई विकासशील और स्वतंत्र देशों के लिए भी प्रेरणादायक है – जब तक पश्चिम अपनी साम्राज्यवादी और एकपक्षीय नीतियों से पीछे नहीं हटेगा, तब तक सच्ची शांति और वार्ता संभव नहीं। तेहरान का स्पष्ट संदेश है: "हम तैयार हैं, लेकिन आप तैयार नहीं।" अब गेंद पूरी तरह पश्चिम के पाले में है। क्या वाशिंगटन सम्मानजनक संवाद की राह अपनाएगा, या दबाव और टकराव की नीति को जारी रखेगा? आने वाला समय इसका जवाब देगा।
 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 🌎 8 जनवरी, 2026