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Saturday, 10 January 2026

अमेरिका ने रूसी तेल टैंकर 'मैरिनेरा' पर कब्जा किया: तीन भारतीय क्रू सदस्य भी हिरासत में, रूसी सांसद ने परमाणु हमले की दी धमकी!

अमेरिका ने रूसी तेल टैंकर 'मैरिनेरा' पर कब्जा किया: तीन भारतीय क्रू सदस्य भी हिरासत में, रूसी सांसद ने परमाणु हमले की दी धमकी!
Friday World January 10,2026 
7 जनवरी 2026 को उत्तरी अटलांटिक महासागर में अमेरिकी तटरक्षक बल (US Coast Guard) और विशेष बलों ने एक रूसी झंडे वाले तेल टैंकर 'मैरिनेरा' (Marinera) को जब्त कर लिया। यह घटना अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून और अमेरिकी प्रतिबंधों के बीच तनाव का नया अध्याय बन गई है। टैंकर पहले 'बेला 1' (Bella 1) के नाम से जाना जाता था और अमेरिकी प्रतिबंधों की सूची में शामिल था। अमेरिका का आरोप है कि यह जहाज 'शैडो फ्लीट' (छिपे हुए जहाजों के नेटवर्क) का हिस्सा है, जो वेनेजुएला से प्रतिबंधित तेल का परिवहन करता था। 

घटना का पूरा क्रम दिसंबर 2025 में अमेरिका ने वेनेजुएला से तेल निर्यात को रोकने के लिए समुद्री 'ब्लॉकेड' (नाकाबंदी) शुरू की थी। इसी दौरान 'बेला 1' नाम का टैंकर कैरेबियन सागर में अमेरिकी कोस्ट गार्ड से बचने में कामयाब रहा। जहाज ने अपना नाम बदलकर 'मैरिनेरा' कर लिया, रूसी जहाज रजिस्ट्री में नाम दर्ज कराया और 24 दिसंबर को अस्थायी रूप से रूसी झंडा फहरा लिया। क्रू ने जहाज पर रूसी झंडा भी पेंट कर दिया। 

अमेरिकी सेना ने इस जहाज की कई हफ्तों तक निगरानी की। आखिरकार 7 जनवरी को हेलीकॉप्टर से उतरे विशेष बलों ने जहाज पर चढ़ाई की और इसे कब्जे में ले लिया। यह ऑपरेशन आइसलैंड और ब्रिटेन के बीच अंतरराष्ट्रीय जल में हुआ। अमेरिका ने इसे अमेरिकी फेडरल कोर्ट के वारंट पर किया, जबकि रूस ने इसे 'समुद्री डकैती' और अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन बताया। 

जहाज पर कौन-कौन सवार थे? रूसी मीडिया 'रशिया टुडे' (RT) के अनुसार, जहाज पर कुल 28 क्रू सदस्य सवार थे। इनमें शामिल थे: 

- 17 यूक्रेनी नागरिक 

- 6 जॉर्जियाई नागरिक

 - 3 भारतीय नागरिक

 - 2 रूसी नागरिक (जिनमें जहाज का कप्तान भी शामिल) 

भारतीय क्रू सदस्यों की पहचान अभी सार्वजनिक नहीं हुई है। भारत सरकार की ओर से अभी तक कोई आधिकारिक बयान नहीं आया है, लेकिन रूस ने अमेरिका से सभी क्रू सदस्यों के साथ मानवीय व्यवहार करने और विदेशी नागरिकों को जल्द रिहा करने की मांग की है। 

रूस की तीखी प्रतिक्रिया और परमाणु धमकी इस घटना के बाद रूस ने कड़ा रुख अपनाया। रूसी विदेश मंत्रालय ने इसे 'अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून का घोर उल्लंघन' करार दिया और अमेरिका से जहाज व क्रू को तुरंत रिहा करने की मांग की। 

सबसे चिंताजनक बयान रूसी संसद के रक्षा समिति के प्रथम उपाध्यक्ष **एलेक्सी झुरावलेव** (Alexey Zhuravlev) का आया। उन्होंने टेलीग्राम पर लिखा कि यह कार्रवाई 'रूसी क्षेत्र पर हमला' के समान है, क्योंकि जहाज रूसी झंडे तले था। उन्होंने रूसी सेना से 'सैन्य जवाब' देने की मांग की, जिसमें अमेरिकी कोस्ट गार्ड के जहाजों को टॉरपीडो से हमला कर डुबोने की सलाह दी। 

झुरावलेव ने आगे कहा, "हमारी सैन्य नीति ऐसी स्थिति में परमाणु हथियारों के उपयोग की अनुमति देती है। अमेरिका को रोकने का यही तरीका है।" यह धमकी वैश्विक स्तर पर तनाव बढ़ा रही है, खासकर जब अमेरिका-रूस संबंध पहले से ही यूक्रेन युद्ध और अन्य मुद्दों पर तनावपूर्ण हैं। 

अंतरराष्ट्रीय प्रभाव और भारत की स्थिति यह घटना अमेरिका के ट्रंप प्रशासन की वेनेजुएला नीति का हिस्सा लगती है, जहां अमेरिका वेनेजुएला के तेल निर्यात को नियंत्रित करने की कोशिश कर रहा है। रूस ने इसे 'नव-औपनिवेशिक' रवैया बताया है। 

भारत के लिए यह चिंता का विषय है क्योंकि तीन भारतीय नागरिक हिरासत में हैं। विदेश मंत्रालय को जल्द इनकी सुरक्षा और रिहाई के लिए कदम उठाने की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय समुद्री कानून (UNCLOS) के तहत खुले समुद्र में किसी देश के झंडे वाले जहाज पर जबरन चढ़ाई विवादास्पद है। 

यह घटना वैश्विक ऊर्जा बाजार, प्रतिबंधों और समुद्री सुरक्षा पर लंबे समय तक असर डाल सकती है। क्या यह अमेरिका-रूस के बीच नए संघर्ष की शुरुआत है? समय बताएगा।
Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 10,2026