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Sunday, 11 January 2026

इस्लामी क्रांति अटल है: दंगाइयों और विदेशी साजिशों के आगे ईरान कभी नहीं झुकेगा

इस्लामी क्रांति अटल है: दंगाइयों और विदेशी साजिशों के आगे ईरान कभी नहीं झुकेगा
Friday World January 11,2026
ईरान की इस्लामी क्रांति के महान नेता, आयतुल्लाह अली खामेनेई ने एक बार फिर साफ संदेश दिया है कि इस्लामी गणतंत्र ईरान विध्वंसक तत्वों, दंगाइयों और विदेशी ताकतों की साजिशों के सामने कभी कमर नहीं झुकाएगा। 

हाल के दिनों में देश के विभिन्न शहरों में हुई कुछ घटनाओं, जहां उपद्रवियों ने सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान पहुंचाया और अराजकता फैलाने की कोशिश की, को लेकर सर्वोच्च नेता ने कड़ा रुख अपनाया। उन्होंने इन गतिविधियों को स्पष्ट रूप से विदेशी एजेंडा से प्रेरित और अमेरिकी समर्थन प्राप्त बताया। 

अपने हालिया संबोधन में आयतुल्लाह खामेनेई ने कहा, अमेरिकियों ने अतीत में अपनी गलत योजनाओं और गलतफहमियों की वजह से बार-बार शिकस्त खाई है। आज भी वे वही पुरानी गलती दोहरा रहे हैं और मुंह की खाएंगे।"

यह बयान उस ऐतिहासिक संदर्भ में बेहद महत्वपूर्ण है जब 1979 की इस्लामी क्रांति ने भ्रष्ट पहलवी राजशाही को जड़ से उखाड़ फेंका था। मोहम्मद रजा शाह पहलवी का शासन अमेरिकी साम्राज्यवाद का सबसे बड़ा पिट्ठू था। वह शासन भ्रष्टाचार, ज्यादती, पश्चिमी संस्कृति के थोपने और जनता का शोषण करने के लिए कुख्यात था। अमेरिका ने उस तानाशाह को हर तरह का समर्थन दिया—हथियार, खुफिया जानकारी और आर्थिक मदद—यह सोचकर कि ईरान हमेशा उसके कब्जे में रहेगा। 

लेकिन इमाम खुमैनी (र.) के नेतृत्व में जनता ने वह भ्रम तोड़ दिया। पहलवी शासन के पतन ने पूरी दुनिया को दिखा दिया कि अमेरिकी योजनाएं कितनी खोखली और भ्रामक हो सकती हैं। सर्वोच्च नेता ने आगे कहा कि आज भी वही पुरानी सोच काम कर रही है। कुछ तत्व, जो देश के बाहर बैठे हैं और जिन्हें विदेशी ताकतों का खुला समर्थन प्राप्त है, ईरान की स्थिरता को भंग करने की कोशिश कर रहे हैं। ये लोग दंगे भड़काकर, संपत्ति को आग लगाकर और अराजकता फैलाकर अमेरिका और उसके सहयोगियों को खुश करने की कोशिश कर रहे हैं। लेकिन ईरानी जनता और इस्लामी व्यवस्था इन साजिशों से अच्छी तरह वाकिफ है। 

इस्लामी क्रांति की मजबूती के प्रमुख आधार

- जनता का साथ: ईरान की जनता ने बार-बार साबित किया है कि वह क्रांति के आदर्शों—आजादी, स्वतंत्रता और इस्लामी मूल्यों—के साथ खड़ी है। चाहे 8 साल का ईरान-इराक युद्ध हो या आर्थिक प्रतिबंधों की मार, जनता ने कभी हार नहीं मानी। 

- सशस्त्र बलों की ताकत: ईरानी रिवोल्यूशनरी गार्ड्स (IRGC) और अन्य सुरक्षा बल पूरी तरह से सतर्क हैं। वे किसी भी विध्वंसक गतिविधि को कुचलने में सक्षम हैं।

 - आध्यात्मिक और वैचारिक दृढ़ता: इस्लामी क्रांति केवल राजनीतिक नहीं, बल्कि एक वैचारिक और आध्यात्मिक आंदोलन है। यह अमेरिकी साम्राज्यवाद और उसके पिट्ठुओं के खिलाफ वैश्विक स्तर पर प्रेरणा का स्रोत बना हुआ है। 

आज जब दुनिया में अमेरिकी प्रभाव कमजोर पड़ रहा है और ट्रंप जैसे नेता अपनी घरेलू समस्याओं से जूझ रहे हैं, तब ईरान की मजबूती और भी ज्यादा उजागर हो रही है। सर्वोच्च नेता ने स्पष्ट किया कि ईरानी जनता इन दंगाइयों और विदेशी साजिशकर्ताओं को कभी कामयाब नहीं होने देगी। जो लोग पहलवी जैसे भ्रष्ट शासन की वापसी के सपने देख रहे हैं, उन्हें इतिहास की सबक याद रखना चाहिए—पहलवी का अंत निश्चित था और आज भी वही नियति उनका इंतजार कर रही है। 

ईरान की इस्लामी क्रांति न केवल अपने लोगों के लिए, बल्कि पूरे मुस्लिम और उत्पीड़ित दुनिया के लिए उम्मीद की किरण है। यह क्रांति अमेरिकी साम्राज्यवाद के खिलाफ संघर्ष का प्रतीक है और रहेगी। चाहे कितनी भी साजिशें रची जाएं, कितने भी दंगे भड़काए जाएं, ईरान के लोग और उसकी नेतृत्वकारी व्यवस्था अडिग रहेगी। 

इस्लामी इंक़ेलाब जिंदाबाद!
अमेरिकी साम्राज्यवाद मुर्दाबाद!

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 11,2026