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Monday, 12 January 2026

ईरान की मजबूत तकनीकी जीत: अमेरिका-इज़राइल की साजिश को चकनाचूर कर दिया, स्टारलिंक और जीपीएस सिग्नल जाम करके विरोध प्रदर्शनों का कोऑर्डिनेशन पूरी तरह विफल!

ईरान की मजबूत तकनीकी जीत: अमेरिका-इज़राइल की साजिश को चकनाचूर कर दिया, स्टारलिंक और जीपीएस सिग्नल जाम करके विरोध प्रदर्शनों का कोऑर्डिनेशन पूरी तरह विफल!
-Friday World January 12,2026 
ईरान ने विदेशी ताकतों की डिजिटल घुसपैठ को कर दिया नेस्तनाबूद – एक ऐतिहासिक कामयाबी

तेहरान, 12 जनवरी 2026 – इस्लामी गणराज्य ईरान ने एक बार फिर अपनी तकनीकी श्रेष्ठता और राष्ट्रीय सुरक्षा की अटूट प्रतिबद्धता का परिचय देते हुए अमेरिका और इज़राइल द्वारा समर्थित विरोध प्रदर्शनों की कमर तोड़ दी है। हाल के दिनों में देश भर में फैले कुछ असंतोषपूर्ण तत्वों को भड़काने के लिए विदेशी शक्तियों ने स्टारलिंक (एलन मस्क की सैटेलाइट इंटरनेट सेवा) और जीपीएस सिग्नल का इस्तेमाल करके गुप्त कोऑर्डिनेशन और सूचना का आदान-प्रदान करने की कोशिश की। लेकिन ईरानी सेना और इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर विशेषज्ञों ने इसे पूरी तरह नाकाम कर दिया!

 ईरान ने सैन्य-ग्रेड जामिंग तकनीक का इस्तेमाल करके स्टारलिंक के सैटेलाइट सिग्नल और जीपीएस फ्रीक्वेंसी को सफलतापूर्वक ब्लॉक कर दिया। रिपोर्ट्स के मुताबिक, जामिंग के कारण स्टारलिंक डिवाइस में 30% से लेकर 80% तक पैकेट लॉस हुआ, जिससे यह सेवा व्यावहारिक रूप से बेकार हो गई। यह जामिंग इतनी प्रभावी थी कि विदेशी खुफिया एजेंसियों के लिए ईरान के अंदर विरोध प्रदर्शनों को संगठित करना, वीडियो शेयर करना या रीयल-टाइम निर्देश देना असंभव हो गया।

 यह कार्रवाई पिछले साल जून में इज़राइल के साथ 12-दिवसीय संघर्ष के बाद से जारी ईरान की जीपीएस डिसरप्शन स्ट्रैटेजी का हिस्सा है, जिसका मकसद ड्रोन और सैटेलाइट-आधारित हमलों को नाकाम करना था। अब इसी तकनीक को आंतरिक सुरक्षा के लिए इस्तेमाल करके ईरान ने साबित कर दिया कि वह किसी भी विदेशी हस्तक्षेप को बर्दाश्त नहीं करेगा। 

अमेरिका-इज़राइल की चालाक साजिश का पर्दाफाश जानकारी के मुताबिक, अमेरिका और इज़राइल ने स्टारलिंक को ईरान में अवैध रूप से फैलाया था, ताकि विरोध प्रदर्शनों को हवा दी जा सके। हजारों स्मगल्ड स्टारलिंक रिसीवर ईरान में पहुंचाए गए थे, जिन्हें विदेशी एजेंसियां "प्रोटेस्ट टूल" के रूप में इस्तेमाल कर रही थीं। इनके जरिए फेक न्यूज, उकसावे वाली सामग्री और कोऑर्डिनेशन के निर्देश भेजे जा रहे थे। लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इसे "इज़राइल या अमेरिका के लिए जासूसी" मानते हुए सख्त कार्रवाई की। स्टारलिंक का इस्तेमाल अब देश में गंभीर अपराध माना जा रहा है, और इसे पकड़े जाने पर कड़ी सजा का प्रावधान है। 

यह साफ है कि विदेशी ताकतें ईरान की स्थिरता को कमजोर करने के लिए हर हथकंडा अपना रही हैं – आर्थिक प्रतिबंधों से लेकर डिजिटल घुसपैठ तक।

 लेकिन ईरान की मजबूत इलेक्ट्रॉनिक वारफेयर क्षमता ने इन सभी को धूल चटा दी। विशेषज्ञों का मानना है कि रूस और चीन जैसी मित्र राष्ट्रों की तकनीकी मदद से ईरान ने ऐसी उन्नत जामिंग सिस्टम विकसित की है, जो लो-अर्थ ऑर्बिट सैटेलाइट्स को भी प्रभावित कर सकती है। 

ईरान की जनता की सुरक्षा और संप्रभुता सर्वोपरि
 ईरानी सरकार ने स्पष्ट किया कि यह जामिंग केवल राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए है। विरोध प्रदर्शन भड़काने वाली विदेशी साजिशों को रोककर ईरान ने अपनी संप्रभुता की रक्षा की है। देश में शांति बहाल करने के प्रयास जारी हैं, और अधिकांश इलाकों में स्थिति नियंत्रण में है। ईरान के सुप्रीम लीडर और सशस्त्र बलों ने इस सफलता पर गर्व व्यक्त किया है, इसे "अरबों डॉलर की अमेरिकी तकनीक पर ईरानी बुद्धिमत्ता की जीत" बताया है।

 यह घटना दुनिया को संदेश देती है कि ईरान अब कोई कमजोर देश नहीं रहा। वह अपनी सीमाओं, अपनी जनता और अपनी स्वतंत्रता की रक्षा के लिए हर क्षेत्र में तैयार है – चाहे वह पारंपरिक युद्ध हो या डिजिटल युद्ध। अमेरिका-इज़राइल की साजिशें बार-बार नाकाम हो रही हैं, और ईरान की यह कामयाबी आने वाले दिनों में और मजबूत होगी।

 ईरान मजबूत है, ईरान अजेय है! 🇮🇷

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 12,2026