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Thursday, 8 January 2026

ट्रम्प ने नेतन्याहू को दी हरी झंडी: लेबनान पर नए सैन्य अभियान की तैयारी, हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने का अल्टीमेटम

ट्रम्प ने नेतन्याहू को दी हरी झंडी: लेबनान पर नए सैन्य अभियान की तैयारी, हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने का अल्टीमेटम
Friday World January 9,2026 
मध्य पूर्व में तनाव एक बार फिर चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी राष्ट्रपति **डोनाल्ड ट्रम्प** ने इजरायल के प्रधानमंत्री **बेंजामिन नेतन्याहू** को लेबनान में हिज़्बुल्लाह के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई के लिए खुली छूट (ग्रीन लाइट) दे दी है। इजरायली सरकारी प्रसारक **कैन न्यूज** के अनुसार, नेतन्याहू ने अपनी कैबिनेट बैठक में मंत्रियों को बताया कि ट्रम्प प्रशासन हिज़्बुल्लाह की सैन्य क्षमताओं को पूरी तरह समाप्त करने के इजरायल के रुख से पूरी तरह सहमत है। यदि लेबनानी सरकार और सेना द्वारा हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने की प्रक्रिया विफल रहती है, तो इजरायल द्वारा उठाया जाने वाला कोई भी कदम वाशिंगटन के पूर्ण समर्थन के साथ होगा। 

यह घटनाक्रम दिसंबर 2025 के अंत में फ्लोरिडा के मार-ए-लागो में ट्रम्प और नेतन्याहू की मुलाकात के ठीक बाद सामने आया है। दोनों नेताओं के बीच चर्चा में गाजा, ईरान, सीरिया के साथ-साथ लेबनान में हिज़्बुल्लाह की स्थिति प्रमुख थी। इजरायली सूत्रों का दावा है कि ट्रम्प ने स्पष्ट रूप से कहा कि हिज़्बुल्लाह "बुरा व्यवहार" कर रहा है और यदि आवश्यक हुआ तो इजरायल को कार्रवाई की छूट होगी। 

लेबनान में निरस्त्रीकरण की प्रक्रिया: प्रगति या दिखावा? लेबनानी सेना ने 8 जनवरी 2026 को घोषणा की कि लितानी नदी के दक्षिण में गैर-राज्य सशस्त्र समूहों (मुख्य रूप से हिज़्बुल्लाह) के हथियारों को राज्य नियंत्रण में लाने की योजना का पहला चरण पूरा हो गया है। लेबनानी राष्ट्रपति जोसेफ औन और सरकार ने इस कदम को महत्वपूर्ण बताया और इजरायल से हमलों को रोकने, कब्जे वाले क्षेत्रों से वापसी तथा लेबनानी कैदियों की रिहाई की मांग की। 

हालांकि, इजरायल ने इस दावे को खारिज करते हुए इसे "प्रोत्साहनजनक शुरुआत" लेकिन "काफी दूर" बताया। नेतन्याहू के कार्यालय ने बयान जारी कर कहा कि हिज़्बुल्लाह ईरान के समर्थन से तेजी से पुनर्सशक्तिकरण कर रहा है और उसके हथियार, बुनियादी ढांचा तथा कमांड संरचना अभी भी बरकरार है। इजरायल का कहना है कि 2024 के युद्ध के बाद हुए अमेरिका-प्रायोजित युद्धविराम समझौते (जिसमें यूएन सुरक्षा परिषद प्रस्ताव 1701 का हवाला है) के तहत हिज़्बुल्लाह का **पूर्ण निरस्त्रीकरण** अनिवार्य है। 

इजरायली सेना अलर्ट पर, हिज़्बुल्लाह सतर्क इजरायली सुरक्षा सूत्रों ने खुलासा किया है कि आईडीएफ (इजरायली रक्षा बल) व्यापक अभियान के लिए तैयार है। हाल के दिनों में इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में हिज़्बुल्लाह के हथियार भंडार, सुरंगों और ठिकानों पर दर्जनों हवाई हमले किए हैं। दूसरी ओर, हिज़्बुल्लाह ने एहतियाती कदम उठाते हुए दक्षिणी लेबनान से कुछ हथियारों का स्थानांतरण और अपनी मौजूदगी कम करने की रिपोर्ट्स आई हैं। हिज़्बुल्लाह के नेता नैम कासेम ने बार-बार कहा है कि संगठन निरस्त्रीकरण पर चर्चा तब तक नहीं करेगा, जब तक इजरायल अपनी सेना लेबनान से पूरी तरह वापस नहीं लेता। 

 क्षेत्रीय प्रभाव और खतरे यदि इजरायल नया बड़ा अभियान शुरू करता है, तो यह 2024 के युद्ध से भी अधिक विनाशकारी हो सकता है। लेबनान पहले से ही आर्थिक संकट और पुनर्निर्माण की चुनौतियों से जूझ रहा है। हिज़्बुल्लाह के समर्थक और ईरान इस कार्रवाई को क्षेत्रीय युद्ध का ट्रिगर मान रहे हैं, जबकि इजरायल इसे अपनी सुरक्षा के लिए अंतिम उपाय बता रहा है। ट्रम्प प्रशासन की ओर से मिला समर्थन इजरायल को अधिक आक्रामक रुख अपनाने की छूट देता है, लेकिन इससे ईरान, सीरिया और अन्य प्रॉक्सी ताकतों के बीच टकराव बढ़ सकता है।

 यह स्थिति मध्य पूर्व में 2026 की शुरुआत को और अधिक अस्थिर बना रही है। क्या लेबनानी सरकार हिज़्बुल्लाह को निरस्त्र करने में सफल होगी, या फिर क्षेत्र फिर से बड़े युद्ध की आग में झुलस जाएगा? समय ही बताएगा, लेकिन ट्रम्प की हरी झंडी ने स्पष्ट कर दिया है कि वाशिंगटन अब इजरायल के साथ कंधे से कंधा मिलाकर खड़ा है। 
Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 9,2026