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Wednesday, 14 January 2026

उत्तराखंड में नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व में भीषण आग: छठा दिन भी काबू नहीं, लेकिन फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित

उत्तराखंड में नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व में भीषण आग: छठा दिन भी काबू नहीं, लेकिन फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित
-Friday World January 14,2026 
उत्तराखंड के चमोली जिले में स्थित नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व में 9 जनवरी 2026 से लगी आग अब छठे दिन भी पूरी तरह नियंत्रण में नहीं आ पाई है। यह क्षेत्र यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल है और भारत की सबसे महत्वपूर्ण जैव-विविधता वाले संरक्षित क्षेत्रों में से एक माना जाता है। गोविंदघाट रेंज में लक्ष्मण गंगा और अलकनंदा नदियों के बीच फैली यह आग पर्यावरण प्रेमियों और स्थानीय लोगों के लिए गहरी चिंता का विषय बनी हुई है। 

आग की शुरुआत और फैलने की वजह वन विभाग के अनुसार, आग की शुरुआत सूखे घास-फूस और पाइन के पेड़ों के नीचे जमा सूखे पत्तों से हुई। पिछले कुछ दिनों में क्षेत्र में कम वर्षा और तेज हवाओं के कारण आग तेजी से फैल गई। खड़ी ढलानों और दुर्गम भूभाग ने स्थिति को और जटिल बना दिया है। 

प्रशासन की चुनौतियां और प्रयास 

→ खड़ी ढलान और पत्थर गिरने का खतरा – आग बुझाने वाली टीमों के लिए पहुंचना बेहद जोखिम भरा हो गया। 

→ दो टीमें वापस लौटीं – पार्क प्रशासन द्वारा गठित दो टीमें मौके पर पहुंचने की कोशिश में असफल रहीं और सुरक्षा कारणों से वापस बुला ली गईं। 

→ हवाई सर्वे की योजना – जिला प्रशासन ने शासन स्तर पर हेलीकॉप्टर से हवाई सर्वेक्षण और संभावित हवाई सहायता (एरियल फायर फाइटिंग) की तैयारी शुरू कर दी है। 

→ संयुक्त टीमों का प्रयास – वन विभाग, एसडीआरएफ, आपदा प्रबंधन और जिला प्रशासन की टीमें लगातार प्रयासरत हैं।

 डीएफओ सर्वेश दुबे ने बताया, “हमारी प्राथमिकता आग को फैलने से रोकना और मानव जीवन की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। मौजूदा मौसम और भौगोलिक स्थिति को देखते हुए जमीनी स्तर पर काम करना बहुत चुनौतीपूर्ण है।” 

फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित प्रशासन ने स्पष्ट रूप से आश्वासन दिया है कि आग का प्रभाव **फूलों की घाटी राष्ट्रीय उद्यान** और **हेमकुंड साहिब** तक नहीं पहुंचा है और न ही पहुंचने की कोई संभावना है। 

→ लक्ष्मण गंगा और पुष्पावती जैसी चौड़ी नदियां प्राकृतिक अग्नि-रोधक (firebreak) का काम कर रही हैं।

 → दोनों क्षेत्र आग वाली जगह से काफी दूरी पर स्थित हैं।

 → प्रशासन की लगातार निगरानी और निगरानी पोस्टों की मौजूदगी।

 जिलाधिकारी गौराव कुमार ने कहा, “हमारी प्राथमिकता संवेदनशील क्षेत्रों की सुरक्षा है। फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब पूरी तरह सुरक्षित हैं और तीर्थयात्रियों-पर्यटकों को किसी तरह का खतरा नहीं है।”

 नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व का महत्व
 यह क्षेत्र 1988 में यूनेस्को द्वारा विश्व धरोहर घोषित किया गया था। यहां पाए जाने वाले दुर्लभ पौधे, जीव-जंतु और फूलों की 300 से अधिक प्रजातियां विश्व स्तर पर प्रसिद्ध हैं। ब्लू शीप (भाराल), स्नो लेपर्ड, हिमालयन ब्लैक बियर जैसे दुर्लभ जीव यहां पाए जाते हैं। आग से इन प्रजातियों के आवास को खतरा पैदा हो सकता है, इसलिए इसे गंभीर पर्यावरणीय संकट माना जा रहा है। 

आगे की राह 

→ मौसम विभाग के अनुसार अगले 48 घंटों में हल्की वर्षा की संभावना है, जो आग पर काबू पाने में सहायक साबित हो सकती है। 

→ स्थानीय समुदाय और पर्यावरण संगठन प्रशासन के साथ मिलकर निगरानी में सहयोग कर रहे हैं। 

→ विशेषज्ञों का कहना है कि जलवायु परिवर्तन के कारण हिमालयी क्षेत्रों में ऐसे जंगल की आग की घटनाएं बढ़ रही हैं।

 नंदा देवी बायोस्फियर रिजर्व में लगी यह आग एक बार फिर हमें याद दिलाती है कि हिमालय की नाजुक पारिस्थितिकी को बचाने के लिए कितनी सतर्कता और समन्वित प्रयासों की जरूरत है। प्रशासन का आश्वासन है कि सबसे संवेदनशील और प्रसिद्ध क्षेत्र – फूलों की घाटी और हेमकुंड साहिब – पूरी तरह सुरक्षित हैं। 

उम्मीद है कि जल्द ही आग पर पूर्ण नियंत्रण हासिल हो जाएगा और इस अनमोल धरोहर को कोई स्थायी नुकसान नहीं होगा।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 14,2026