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नई दिल्ली, 5 जनवरी 2026 – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प की अगुवाई में वेनेजुएला पर हुए सैन्य हमले और राष्ट्रपति निकोलस मादुरो के अपहरण ने वैश्विक राजनीति में तूफान मचा दिया है। जर्मन अखबार बर्लिनर साइटुंग (Berliner Zeitung) ने इस घटना को यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोडिमीर ज़ेलेंस्की के लिए एक गंभीर संकट करार दिया है। अखबार के अनुसार, ट्रम्प ने मादुरो को हिरासत में लेकर ज़ेलेंस्की को एक ऐसे राजनीतिक माइनफील्ड (political minefield) में डाल दिया है, जहां कोई भी कदम उनके लिए घातक साबित हो सकता है।
वेनेजुएला संकट: ट्रम्प का बड़ा दांव
3 जनवरी 2026 की रात अमेरिकी विशेष बलों ने काराकास में बड़े पैमाने पर हमला किया। इस ऑपरेशन में वेनेजुएला के राष्ट्रपति निकोलस मादुरो और उनकी पत्नी सिलिया फ्लोरेस को हिरासत में लिया गया। ट्रम्प ने इसे "अमेरिकी इतिहास की सबसे शानदार और प्रभावी सैन्य कार्रवाई" बताया। मादुरो को न्यूयॉर्क ले जाया गया, जहां उन पर नारको-टेररिज्म और ड्रग तस्करी के आरोप लगाए गए हैं। ट्रम्प ने घोषणा की कि अमेरिका अब वेनेजुएला को "चलाएगा" और उसके तेल उद्योग को नियंत्रित करेगा, जब तक एक "उचित संक्रमण" नहीं हो जाता।
यह कार्रवाई महीनों से बढ़ते तनाव का नतीजा है। ट्रम्प प्रशासन ने मादुरो पर अमेरिका में कोकीन तस्करी का आरोप लगाया था और कैरिबियन में ड्रग-तस्करी वाली नावों पर हमले किए थे। वेनेजुएला में हजारों नागरिकों की मौत की खबरें आईं, जबकि अंतरराष्ट्रीय कानून के विशेषज्ञों ने इसे संप्रभुता का उल्लंघन बताया।
ज़ेलेंस्की के लिए खतरा: हर प्रतिक्रिया एक जाल बर्लिनर साइटुंग की रिपोर्ट के मुताबिक, यह घटना कीव के लिए "विषाक्त" (toxic) साबित हुई है। ज़ेलेंस्की की स्थिति बेहद नाजुक हो गई है, क्योंकि वेनेजुएला पर उनकी कोई भी टिप्पणी एक माइनफील्ड की तरह काम करेगी। अखबार के विश्लेषण में तीन मुख्य खतरे बताए गए हैं:
1. अमेरिकी कार्रवाई का समर्थन करना – अगर ज़ेलेंस्की ट्रम्प के हमले का बचाव करते हैं, तो यह उनकी अपनी लड़ाई को कमजोर कर देगा। ज़ेलेंस्की सालों से रूस के यूक्रेन पर आक्रमण को अवैध बताते आए हैं। वेनेजुएला में अमेरिकी हस्तक्षेप का समर्थन करने से उनका "अंतरराष्ट्रीय कानून" का तर्क ढह जाएगा।
2. ट्रम्प की निंदा करना– अगर वे अमेरिका की आलोचना करते हैं, तो ट्रम्प की नाराजगी झेलनी पड़ सकती है। ट्रम्प प्रशासन यूक्रेन के लिए सैन्य सहायता और शांति वार्ता का प्रमुख स्तंभ है। ऐसी स्थिति में सहायता कम होना या व्यक्तिगत परिणाम (political or personal repercussions) सामने आ सकते हैं।
3. चुप रहना – चुप्पी भी जोखिम भरी है, क्योंकि इससे यूक्रेन की अंतरराष्ट्रीय छवि प्रभावित हो सकती है।
अखबार ने यूरोपीय संघ (EU) की दुविधा पर भी प्रकाश डाला। यूरोपीय देश मादुरो की तानाशाही से राहत महसूस कर रहे हैं, लेकिन अमेरिकी कार्रवाई को खुलकर समर्थन देने से वाशिंगटन से नाराजगी का डर है। ब्रुसेल्स की यह "लकवाग्रस्त" स्थिति कीव की स्थिति को और कमजोर बनाती है।
वैश्विक प्रभाव: नियमों का अंत?
यह घटना अंतरराष्ट्रीय कानून के लिए बड़ा झटका है। रूस ने इसे "राज्य आतंकवाद" बताया और कहा कि यह यूक्रेन पर उसके आक्रमण को वैध ठहराने का बहाना दे सकता है। चीन और क्यूबा ने भी अमेरिका की निंदा की। वहीं, कुछ यूरोपीय नेता जैसे फ्रांस के इमैनुएल मैक्रों ने वेनेजुएला की जनता की "राहत" पर जोर दिया, लेकिन कानूनी सवालों से बचते दिखे।
ट्रम्प ने वेनेजुएला को "चलाने" की बात कही, जिससे कई विश्लेषक इसे साम्राज्यवाद का नया दौर मान रहे हैं। ज़ेलेंस्की ने संकेत दिया कि "तानाशाहों से निपटना संभव है, तो अमेरिका जानता है आगे क्या करना है" – जो रूस पर इशारा माना जा रहा है। लेकिन बर्लिनर साइटुंग का कहना है कि यह "दोहरा मापदंड" यूक्रेन के लिए लंबे समय तक समस्या बनेगा।
एक नया युग? वेनेजुएला संकट ने दिखाया कि शक्ति संतुलन कितना नाजुक है। ट्रम्प की कार्रवाई ने न सिर्फ लैटिन अमेरिका को हिलाया, बल्कि यूरोप और यूक्रेन को भी सोचने पर मजबूर कर दिया। ज़ेलेंस्की के लिए यह माइनफील्ड है – जहां हर कदम पर विस्फोट का खतरा। क्या यूक्रेन इस संकट से उबर पाएगा, या वैश्विक राजनीति में नए नियम बनेंगे? समय बताएगा। Sajjadali Nayani ✍
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