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Thursday, 15 January 2026

ट्रंप का सख्त रुख अब नरम: ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुकीं, फांसी की कोई योजना नहीं – अमेरिकी राष्ट्रपति का नया दावा!

ट्रंप का सख्त रुख अब नरम: ईरान में प्रदर्शनकारियों की हत्याएं रुकीं, फांसी की कोई योजना नहीं – अमेरिकी राष्ट्रपति का नया दावा!
-Friday World January 15,2026
नई दिल्ली/तेहरान, 15 जनवरी 2026: ईरान में दिसंबर 2025 के अंत से शुरू हुए बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन अब पूरी तरह शांत हो चुके हैं। ईरानी सरकार और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) ने स्पष्ट रूप से घोषणा की है कि देश में स्थिति पूरी तरह नियंत्रण में है और विदेशी ताकतों द्वारा समर्थित इस साजिश को पूरी तरह नाकाम कर दिया गया है। ये प्रदर्शन शुरू में आर्थिक मुद्दों से जुड़े दिखाए गए थे, लेकिन जल्द ही इनमें अमेरिका और इज़राइल के समर्थन से हिंसा और अराजकता फैलाने की कोशिश साफ नजर आई। 

ट्रंप का शुरुआती उकसावा और अब पीछे हटना अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने शुरुआत में प्रदर्शनकारियों को खुलेआम उकसाया था। उन्होंने कहा था, "ईरानी लोगों को विरोध जारी रखना चाहिए, मदद आ रही है (help is on the way)"। ट्रंप ने चेतावनी दी थी कि अगर प्रदर्शनकारियों पर हिंसा हुई तो अमेरिका "लॉक एंड लोडेड" है और कड़ी कार्रवाई करेगा। इस बयान से तेल की कीमतों में उछाल आया और मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका बढ़ गई। लेकिन अब ट्रंप के लहजे में बड़ा बदलाव आया है। व्हाइट हाउस में पत्रकारों से बातचीत में उन्होंने कहा, "मुझे विश्वसनीय स्रोतों से जानकारी मिली है कि ईरान में हत्याएं रुक गई हैं और फांसी की कोई योजना नहीं है।" उन्होंने आगे कहा, "हम देखेंगे कि आगे क्या होता है।" 

यह बदलाव इसलिए आया क्योंकि ईरान सरकार ने बाहरी हस्तक्षेप को पूरी तरह विफल कर दिया। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में कहा, "फांसी बिल्कुल नहीं होगी, कोई योजना नहीं है। ये सब अफवाहें अमेरिका-इज़राइल की गलत सूचना अभियान का हिस्सा हैं।" ईरान ने इन प्रदर्शनों को अमेरिका और इज़राइल द्वारा समर्थित "हाइब्रिड हमला" करार दिया है। 

RGC कमांडर का सख्त बयान: अमेरिका-इज़राइल असली हत्यारे

IRGC के कमांडर मेजर जनरल मोहम्मद पाकपुर ने साफ कहा कि ये विरोध प्रदर्शन अमेरिका और इज़राइल के समर्थन से हो रहे थे। उन्होंने कहा, "अमेरिका और इज़राइल ही प्रदर्शनकारियों और सुरक्षा बलों के असली हत्यारे हैं। ट्रंप और नेतन्याहू ईरानी युवाओं के हत्यारे हैं। हम उचित समय पर निर्णायक जवाब देंगे।" IRGC ने दावा किया कि प्रदर्शनकारियों को हथियार और फंडिंग विदेशी ताकतों से मिल रही थी, और सुरक्षा बलों ने इन "आतंकवादी तत्वों" को पूरी तरह कुचल दिया है।

 ईरान सरकार ने इंटरनेट और टेलीफोन सेवाएं अस्थायी रूप से बंद करके सूचना के प्रवाह को नियंत्रित किया, जिससे बाहरी प्रचार को रोकने में मदद मिली। अब स्थिति पूरी तरह सामान्य हो चुकी है। कई प्रांतों में सुरक्षा बलों ने बड़े पैमाने पर गिरफ्तारियां कीं और विदेशी एजेंटों को पकड़ा। IRGC ने कहा कि देश की सुरक्षा "रेड लाइन" है और कोई भी बाहरी हस्तक्षेप बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। 


प्रदर्शनों का असली चेहरा: विदेशी साजिश मानवाधिकार संगठनों और विपक्षी मीडिया द्वारा मौतों के आंकड़े बढ़ा-चढ़ाकर बताए गए, लेकिन ईरानी अधिकारियों ने इन्हें "मिसइनफॉर्मेशन" करार दिया। 

प्रदर्शन शुरू में आर्थिक संकट से जुड़े थे, लेकिन जल्द ही इनमें "डेथ टू डिक्टेटर" जैसे नारे और विदेशी झंडे लहराने की कोशिश हुई, जो साफ तौर पर अमेरिका-इज़राइल की साजिश दर्शाती है। ईरान ने इन प्रदर्शनों को 2025 के इज़राइल-ईरान 12-दिन युद्ध का विस्तार बताया और कहा कि दुश्मन अब आंतरिक अस्थिरता पैदा करने की कोशिश कर रहा है। 

ट्रंप के नए बयान से सैन्य कार्रवाई की आशंका कम हो गई है। तेल की कीमतों में गिरावट आई है। ईरान सरकार ने प्रो-गवर्नमेंट रैलियां निकालकर जनसमर्थन दिखाया और कहा कि इस्लामिक रिपब्लिक अजेय है। 

यह घटनाक्रम साबित करता है कि ईरान की मजबूत सुरक्षा व्यवस्था और एकजुटता किसी भी विदेशी साजिश को नाकाम कर सकती है। सरकार का पूर्ण नियंत्रण बहाल होने से देश में स्थिरता लौट आई है।

 ईरान ने दुनिया को चेतावनी दी है कि वह किसी भी बाहरी हस्तक्षेप का कड़ा जवाब देगा। विश्व अब देख रहा है कि ईरान की संप्रभुता और सुरक्षा कितनी मजबूत है। 

अमेरिका-इज़राइल की साजिश नाकाम होने से क्षेत्रीय शांति को नई उम्मीद मिली है।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 15,2026