बिहार में नीतीश कुमार की नई सरकार बनने के बाद से अतिक्रमण हटाओ अभियान' तेज हो गया है। पटना, नालंदा, बेगूसराय, सीतामढ़ी, मुजफ्फरपुर, दरभंगा, गया और कई अन्य जिलों में प्रशासन बुलडोजर चलाकर अवैध कब्जों को हटा रहा है। प्रशासन का दावा है कि यह कार्रवाई अदालत के आदेश पर हो रही है, लेकिन कड़ाके की सर्दी में दशकों से बसे गरीब परिवारों के घर ढह जाने से हजारों लोग बेघर हो गए हैं।
यह अभियान नवंबर-दिसंबर 2025 से शुरू हुआ और जनवरी 2026 तक जारी है। कई जगहों पर सड़क किनारे की दुकानें, ठेले और अस्थायी मकान ध्वस्त किए गए। विपक्ष इसे "बुलडोजर मॉडल" कहकर गरीबों पर अत्याचार बता रहा है, जबकि सरकार इसे सार्वजनिक संपत्ति की रक्षा और सुशासन का हिस्सा बता रही है।
नालंदा में सुशीला देवी जैसी त्रासदी नालंदा जिले के लाल शाहपुर इलाके में सुशीला देवी का घर बुलडोजर से ढहा दिया गया। अब वे टूटे हुए मकान में बोरियां हवा में तानकर रह रही हैं। ठंडी हवाओं में परिवार के साथ गुजारा कर रही हैं।
गरीबों के मकान और दुकानें ध्वस्त होने के बाद कई परिवार खुले में या तिरपाल के नीचे ठिठुर रहे हैं।
सरकार का पक्ष: अदालत के आदेश पर कार्रवाई बिहार के गृह मंत्री सम्राट चौधरी ने विधानसभा में स्पष्ट किया कि न्यायालय ने जिला प्रशासन को सभी जगह अतिक्रमण हटाने का निर्देश दिया है। उन्होंने कहा, "अगर कोई माफिया है तो कार्रवाई होगी ही
– चाहे वह जमीन, बालू या शराब माफिया हो।" सरकार का कहना है कि यह अभियान माफियाओं और अवैध कब्जों के खिलाफ है, न कि गरीबों के।
ग्रामीण विकास मंत्री श्रवण कुमार ने बताया कि अतिक्रमण हटाने के दौरान टूटने वाले गरीबों के घरों के लिए **3.5 लाख रुपये तक की सहायता दी जाती है। यह "बुलडोजर मॉडल" नहीं, बल्कि नीतीश कुमार का सुशासन मॉडल है।
विपक्ष और पीड़ितों की आवाज** विपक्षी नेता इसे गरीबों पर जुल्म बता रहे हैं। कई जगहों पर विरोध प्रदर्शन हुए, जहां दुकानदारों ने कहा, "हम पूरा परिवार लेकर राज्यपाल के आवास के सामने जहर खाकर मर जाएंगे।"
अभियान के प्रभाव और सवाल
- पटना में 26 प्रमुख सड़कों पर महीने भर चलेगा अभियान।
- नालंदा, बेगूसराय में दलित बस्तियों और PMAY घरों पर भी कार्रवाई।
- सैकड़ों परिवार प्रभावित, सर्दी में त्रासदी बढ़ी।
प्रशासन का दावा है कि पहले नोटिस दिए जाते हैं और नियमित अभियान चलाया जा रहा है। लेकिन पीड़ितों का कहना है कि कई जगह बिना पर्याप्त नोटिस के बुलडोजर चला।
सुशासन या बेघरी का संकट?** बिहार सरकार अतिक्रमण मुक्त राज्य बनाने का दावा कर रही है, ताकि सड़कें जाम-मुक्त हों और सार्वजनिक संसाधन सुरक्षित रहें। लेकिन कड़ाके की सर्दी में बेघर हुए गरीबों के लिए यह अभियान जीवन-मरण का सवाल बन गया है।
सरकार ने सहायता की बात कही है, लेकिन कई परिवारों को अभी तक कोई मदद नहीं मिली। क्या यह अभियान माफियाओं तक पहुंचेगा या सिर्फ गरीबों की झोपड़ियां उजाड़कर रुकेगा? समय बताएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 14,2026