-Friday World January 12,2026
सदाशिव 'सदा मामा' पाटील बने उपाध्यक्ष!
महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से बड़ा ड्रामा देखने को मिला है! ठाणे जिले के अंबरनाथ नगरपालिका में उपाध्यक्ष (डिप्टी मेयर) पद की चुनाव में भाजपा को बड़ा धक्का लगा है। जहां भाजपा ने पहले कांग्रेस के 12 काउंसलरों को अपने साथ मिलाकर मजबूत गठबंधन बनाया था, वहीं आखिरी पल में अजित पवार गुट के 4 काउंसलरों ने पार्टी व्हिप की धज्जियां उड़ा दीं और एकनाथ शिंदे गुट की शिवसेना को समर्थन देकर सत्ता का खेल पलट दिया।
इस नाटकीय घटनाक्रम में शिवसेना के उम्मीदवार सदाशिव उर्फ 'सदा मामा' पाटील ने 32 वोट हासिल कर विजय प्राप्त की, जबकि भाजपा समर्थित प्रदीप पाटील को सिर्फ 28 वोट मिले। यह जीत महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) के अंदरूनी कलह को खुलकर सामने लाती है, जहां राज्य स्तर पर साथी दल स्थानीय स्तर पर एक-दूसरे के खिलाफ खड़े हो जाते हैं।
अंबरनाथ नगरपालिका का पूरा गणित और ट्विस्ट अंबरनाथ नगरपालिका में कुल 59 काउंसलर हैं। चुनाव परिणामों के बाद स्थिति कुछ इस प्रकार थी:
- शिवसेना (शिंदे गुट) 27 सीटें (सबसे बड़ी पार्टी)
- भाजपा" 14 सीटें
- कांग्रेस: 12 सीटें
- एनसीपी (अजित पवार गुट): 4 सीटें - अपक्ष:
1-2 (समर्थन के साथ)
चुनाव के बाद भाजपा ने 'अंबरनाथ विकास आघाड़ी' बनाई, जिसमें कांग्रेस के 12 काउंसलर (जिन्हें कांग्रेस ने सस्पेंड कर दिया था) और एनसीपी के 4 काउंसलर शामिल हुए। इससे भाजपा की ताकत 31+ हो गई और उन्होंने मेयर पद पर तेजश्री करंजुले को जिताया, शिवसेना को साइडलाइन कर दिया।
लेकिन खेल यहां खत्म नहीं हुआ! आखिरी घड़ी में एनसीपी (अजित पवार गुट) के 4 काउंसलरों ने व्हिप तोड़ दिया और शिवसेना के साथ जुड़ गए। अब शिवसेना के पास 27 + 4 एनसीपी + 1 अपक्ष = 32 का मजबूत बहुमत हो गया। इस चुनाव में:
- शिवसेना अंबरनाथ महायुति आघाड़ी** (सदाशिव पाटील): 32 वोट
- अंबरनाथ विकास आघाड़ी (प्रदीप पाटील): 28 वोट
हंगामा और तनाव का माहौल मतदान के दौरान हॉल में भारी हंगामा हुआ। नारेबाजी, चप्पल उठाने जैसी घटनाएं हुईं। जब सांसद श्रीकांत शिंदे पहुंचे तो भाजपा और शिवसेना कार्यकर्ताओं के बीच झड़प हो गई। पुलिस को स्थिति संभालनी पड़ी। भाजपा ने चुनाव को कोर्ट में चुनौती देने की बात कही है, जबकि एनसीपी ने बागी काउंसलरों पर एंटी-डिफेक्शन कानून के तहत कार्रवाई की चेतावनी दी है।
महायुति में बढ़ते दरार की वजह? यह घटना महाराष्ट्र की सत्तारूढ़ महायुति (भाजपा-शिवसेना-एनसीपी) के अंदर गहरी दरार दिखाती है। राज्य स्तर पर साथी होने के बावजूद स्थानीय स्तर पर सीटों और सत्ता के लिए आपसी टकराव आम है। अंबरनाथ शिवसेना का पारंपरिक गढ़ है (शिंदे परिवार का प्रभाव क्षेत्र), लेकिन भाजपा ने यहां कांग्रेस से हाथ मिलाकर शिवसेना को बाहर करने की कोशिश की। एनसीपी के इस 'यू-टर्न' ने सबको चौंका दिया।
यह घटना आने वाली BMC जैसी बड़ी चुनावों से पहले महायुति के लिए चेतावनी है – जहां गठबंधन टूटने-जुड़ने का खेल जारी रहेगा। अंबरनाथ की यह सियासी उथल-पुथल बताती है कि महाराष्ट्र की राजनीति में कुछ भी स्थिर नहीं – आज का साथी कल का दुश्मन बन सकता है!
क्या यह महायुति के लिए बड़ा संकट की शुरुआत है? समय बताएगा... 🔥
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 12,2026