वाशिंगटन से लेकर मेक्सिको सिटी तक हलचल मची हुई है। दुनिया की नजरें पहले ईरान पर टिकी थीं, जहां विरोध प्रदर्शनों और परमाणु कार्यक्रम को लेकर तनाव चरम पर था। लेकिन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने आखिरी घड़ी में अपना फोकस बदल दिया। अब उनकी नजरें सात समंदर पार नहीं, बल्कि अपने ही पड़ोसी देश मेक्सिको पर हैं। ट्रंप प्रशासन मेक्सिको सरकार पर दबाव डाल रहा है कि वह अमेरिकी सेना को अपनी सीमा में प्रवेश की अनुमति दे, ताकि ड्रग कार्टेल्स और फेंटानिल लैब्स पर सीधा हमला किया जा सके।
फेंटानिल संकट: अमेरिका का सबसे बड़ा दुश्मन अमेरिका में फेंटानिल एक खतरनाक महामारी बन चुका है। यह सिंथेटिक ओपियोइड हेरोइन से 50 गुना ज्यादा नशीला है और हर साल 1 लाख से ज्यादा अमेरिकियों की मौत का कारण बन रहा है। अधिकांश फेंटानिल मेक्सिको के कार्टेल्स द्वारा बनाया जाता है, जहां चीन से आए रसायनों का इस्तेमाल होता है। ट्रंप ने इसे "विनाश का हथियार करार दिया है और कई मेक्सिकन कार्टेल्स को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है।
ट्रंप ने चुनाव प्रचार में वादा किया था कि वह ड्रग कार्टेल्स का सफाया करेंगे, ठीक वैसे ही जैसे ISIS के खिलाफ युद्ध लड़ा गया था। अब वह इस संकल्प को अमल में लाने की कगार पर हैं।
संयुक्त ऑपरेशन की मांग न्यूयॉर्क टाइम्स की हालिया रिपोर्ट के मुताबिक, अमेरिकी अधिकारी मेक्सिको पर दबाव बढ़ा रहे हैं कि वह संयुक्त सैन्य ऑपरेशन की मंजूरी दे। इसमें अमेरिकी स्पेशल फोर्सेस या CIA अधिकारी मेक्सिकन सैनिकों के साथ मिलकर फेंटानिल लैब्स पर छापेमारी करेंगे। ट्रंप प्रशासन का कहना है कि मेक्सिको सरकार और पुलिस अकेले कार्टेल्स से निपटने में असमर्थ हैं, इसलिए अमेरिका को सीधे मैदान में उतरना पड़ेगा।
ट्रंप ने फॉक्स न्यूज को दिए इंटरव्यू में साफ कहा, "हमने पानी से आने वाली 97% ड्रग्स को रोक दिया है। अब हम जमीन पर हमला शुरू करने वाले हैं, खासकर कार्टेल्स पर।" उन्होंने मेक्सिको को "कार्टेल्स द्वारा चलाया जा रहा देश" बताया और कहा कि स्थिति बहुत दुखद है।
मेक्सिको की प्रतिक्रिया: संप्रभुता पर खतरा मेक्सिको की राष्ट्रपति क्लॉडिया शीनबाम ने बार-बार अमेरिकी सैन्य हस्तक्षेप को सिरे से खारिज किया है। उन्होंने ट्रंप से फोन पर "अच्छी बातचीत" होने की बात कही, लेकिन स्पष्ट किया कि अमेरिकी सेना का मेक्सिको में प्रवेश अस्वीकार्य है। मेक्सिको सरकार का कहना है कि दोनों देश सहयोग से काम कर रहे हैं और पिछले साल फेंटानिल की तस्करी में 50% कमी आई है, साथ ही ओवरडोज मौतों में भी कमी दर्ज हुई है।
फिर भी ट्रंप दबाव बनाए हुए हैं। उन्होंने टैरिफ (आयात शुल्क) का बड़ा हथियार इस्तेमाल किया है। ट्रंप ने धमकी दी है कि अगर मेक्सिको कार्टेल्स पर सख्ती नहीं करता, तो मेक्सिकन सामान पर 25% से 100% तक टैरिफ लगा दिया जाएगा। मेक्सिको की अर्थव्यवस्था अमेरिका पर बहुत निर्भर है, इसलिए इस धमकी से वहां की सरकार के दिल की धड़कनें तेज हो गई हैं।
ऑपरेशन कैसा होगा? सर्जिकल स्ट्राइक जैसा प्लान ट्रंप टीम सर्जिकल स्ट्राइक जैसा ऑपरेशन चाहती है। अमेरिकी इंटेलिजेंस पहले फेंटानिल लैब्स की लोकेशन ट्रैक करेगी, फिर स्पेशल फोर्सेस वहां पहुंचकर उन्हें तबाह करेंगी। इसे "मेक्सिको की मदद" के रूप में पेश किया जाएगा, ताकि मेक्सिको सरकार की इज्जत भी बचे और अमेरिका का मकसद भी पूरा हो।
ईरान से फोकस क्यों बदला? हाल के दिनों में ईरान में विरोध प्रदर्शन शांत है और ईरान ने "हत्या रोक दी है" और फिलहाल कोई बड़ा हमला नहीं होगा। इसके बजाय, वेनेजुएला में सफल ऑपरेशन (जहां राष्ट्रपति निकोलस मदुरो को पकड़ा गया) के बाद ट्रंप का ध्यान लैटिन अमेरिका पर शिफ्ट हो गया है। अब मेक्सिको अगला बड़ा टारगेट लग रहा है।
क्या होगा आगे? ट्रंप की यह रणनीति जोखिम भरी है। एक तरफ फेंटानिल संकट से अमेरिकी जानें बचाना, दूसरी तरफ पड़ोसी देश की संप्रभुता का सम्मान। अगर अमेरिकी सेना मेक्सिको में उतरी, तो यह अंतरराष्ट्रीय कानून का उल्लंघन हो सकता है और दोनों देशों के रिश्तों में गहरा दरार आ सकता है।
ट्रंप का कहना है, "कार्टेल्स मेक्सिको चला रहे हैं और हमारे हजारों नागरिकों को मार रहे हैं। कुछ तो करना ही पड़ेगा।" दुनिया अब इंतजार कर रही है कि आखिरी घड़ी में ट्रंप का अगला कदम क्या होगा – सहयोग या सैन्य हस्तक्षेप?
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 15,2026