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ईरान के सर्वोच्च नेता आयतुल्लाह अली ख़ामेनेई ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को ऐतिहासिक तानाशाहों और घमंडी शासकों से जोड़ते हुए कड़ी चेतावनी दी है। उन्होंने कहा है कि घमंड की चरम सीमा पर पहुंचने वाले शासकों का अंत निश्चित होता है, और ट्रंप का भी यही हश्र होगा।
घमंडी शासकों का ऐतिहासिक पतन ख़ामेनेई ने अपने आधिकारिक एक्स अकाउंट पर पोस्ट करते हुए लिखा, "वह अमेरिकी राष्ट्रपति जो पूरी दुनिया पर घमंड से फैसले सुनाता है, उसे पता होना चाहिए कि इतिहास के तानाशाह और अहंकारी शासक—जैसे फ़िरौन, नमरू, मोहम्मद रज़ा पहलवी (ईरान के अंतिम शाह) और ऐसे अन्य—अपने घमंड के चरम पर ही ढेर हुए। "वह भी गिरेगा।"
यह बयान ऐसे समय में आया है जब ईरान में आर्थिक संकट और विरोध प्रदर्शनों का दौर जारी है। ख़ामेनेई ने ट्रंप को पिछले साल जून में हुए 12-दिन के युद्ध का जिम्मेदार ठहराया, जिसमें उन्होंने दावा किया कि एक हजार से अधिक ईरानी नागरिक शहीद हुए। उन्होंने कहा, "ट्रंप ने खुद स्वीकार किया कि उन्होंने इस हमले का आदेश दिया था। इस तरह उनके हाथ ईरानियों के खून से रंगे हैं। अब वही व्यक्ति ईरानी राष्ट्र के साथ होने का दावा करता है—यह दोहरा चरित्र है।"
ईरान की मजबूती और आध्यात्मिक शक्ति ख़ामेनेई ने जोर देकर कहा कि 1979 की इस्लामी क्रांति के बाद ईरान पहले से कहीं अधिक मजबूत और सशस्त्र हो चुका है। उन्होंने अमेरिका पर आरोप लगाया कि वह आज भी ईरान को गलत समझता है। "हमारी आध्यात्मिक ताकत और पारंपरिक हथियारों की तुलना पुराने दौर से नहीं की जा सकती। लाखों शहीदों के बलिदान से बनी यह क्रांति तबाही मचाने वालों के सामने कभी नहीं झुकेगी।"
उन्होंने वेनेज़ुएला का उदाहरण देते हुए ट्रंप पर निशाना साधा, "देखिए कैसे उन्होंने लैटिन अमेरिका के एक देश को घेर लिया और वहां कदम उठाए। वे शर्मिंदगी महसूस नहीं करते और खुलेआम कहते हैं कि यह तेल के लिए था।"
ख़ामेनेई का यह संदेश न केवल ट्रंप के लिए व्यक्तिगत चुनौती है, बल्कि यह ईरान-अमेरिका संबंधों में गहरे अविश्वास और ऐतिहासिक दुश्मनी को भी रेखांकित करता है। इतिहास के सबक को याद दिलाते हुए उन्होंने चेताया कि घमंड कभी स्थायी नहीं रहता—चाहे वह कोई भी शासक हो।
Sajjadali Nayani ✍
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