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Monday, 5 January 2026

गांधीनगर में पानीजन्य महामारी का भयावह रूप: एक मासूम बच्चे की संदिग्ध मौत, सिविल अस्पताल में बेड न मिलने पर नया वॉर्ड शुरू!

गांधीनगर में पानीजन्य महामारी का भयावह रूप: एक मासूम बच्चे की संदिग्ध मौत, सिविल अस्पताल में बेड न मिलने पर नया वॉर्ड शुरू!
Friday World 5 जनवरी, 2026  
                  प्रतिकात्मक तस्वीर 
गुजरात राज्य की राजधानी गांधीनगर में पानीजन्य रोगों ने अब भयावह रूप धारण कर लिया है। खासकर पुराने सेक्टरों, चांदखेड़ा, पालज, सरगासन और आसपास के इलाकों में टाइफाइड के मामलों में अचानक विस्फोटक वृद्धि देखी जा रही है। स्वास्थ्य विभाग और महानगरपालिका प्रशासन पूरी तरह अलर्ट मोड पर आ गया है। सिविल अस्पताल में मरीजों की इतनी भीड़ है कि बेड खत्म हो चुके हैं और तत्काल नया वॉर्ड शुरू करने की नौबत आ गई है।

**एक नन्हे जीव का अंत: संदिग्ध मौत ने पूरे शहर को हिला दिया**

इस महामारी की सबसे दुखद घटना यह है कि इलाज के दौरान एक छोटे बच्चे की संदिग्ध मौत हो गई। इस घटना ने परिवार को तो गम में डुबो दिया ही है, साथ ही पूरे शहर में स्वास्थ्य व्यवस्था और पानी की आपूर्ति पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। वर्तमान में दो अन्य बच्चों की हालत गंभीर बनी हुई है और उन्हें आईसीयू में रखा गया है। पिछले 24 घंटों में ही 18 और बच्चों को अस्पताल में भर्ती किया गया है, जिनमें से अधिकांश टाइफाइड के लक्षणों के साथ आए हैं।

आंकड़े चिंताजनक स्तर पर पहुंचे

स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, पिछले एक महीने में 150 से अधिक लोग इलाज के अधीन हैं, जिनमें से 50 से ज्यादा मामले टाइफाइड पॉजिटिव पाए गए हैं। इनमें बड़ी संख्या में बच्चे और बुजुर्ग शामिल हैं। सिविल अस्पताल में फिलहाल 100 से अधिक मरीज भर्ती हैं और नए केस लगातार आ रहे हैं। चिकित्सक और पैरामेडिकल स्टाफ युद्ध स्तर पर काम कर रहे हैं, लेकिन संसाधनों की कमी और बेड की कमी ने स्थिति को और जटिल बना दिया है।

प्रशासन की घोर लापरवाही: 30 दिसंबर को ही दी गई थी चेतावनी**

पूरी घटना में सबसे बड़ा आरोप गांधीनगर महानगरपालिका (GMC) पर है। स्वास्थ्य विभाग ने 30 दिसंबर 2025 को ही लिखित रूप में महानगरपालिका को सूचित कर दिया था कि शहर के कुछ इलाकों में पानीजन्य रोगों के मामले बढ़ रहे हैं और तत्काल कदम उठाने की जरूरत है। इसके बावजूद महानगरपालिका प्रशासन गहरी नींद में रहा और कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। नतीजा यह हुआ कि आज गांधीनगर के नागरिक इस भयावह महामारी का सामना कर रहे हैं।

**पानी की लाइन में 19-20 जगह लीकेज: गटर का गंदा पानी पीने की लाइन में मिल रहा**

जांच में सामने आया है कि शहर के विभिन्न इलाकों में लगभग 19 से 20 जगहों पर पीने के पानी की मुख्य लाइन में लीकेज है। इन लीकेज के कारण गटर का गंदा पानी पीने की लाइन में मिल रहा है, जो टाइफाइड के मामलों में विस्फोटक वृद्धि का मुख्य कारण बन गया है। नागरिकों का कहना है कि अगर महानगरपालिका ने समय रहते इन लीकेज को ठीक कर दिया होता तो आज स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती।

अस्पताल में चल रही है युद्ध स्तर की कार्रवाई

सिविल अस्पताल में अभी युद्ध स्तर पर इलाज चल रहा है। अब तक 89 मरीजों को इलाज के बाद छुट्टी दी जा चुकी है, लेकिन नए केसों की संख्या लगातार बढ़ रही है, जिससे डॉक्टरों और पैरामेडिकल स्टाफ पर भारी दबाव है। बच्चों के लिए विशेष सतर्कता बरती जा रही है और नए वॉर्ड में बाल रोग विभाग को अतिरिक्त बेड आवंटित किए गए हैं।

नागरिकों में गुस्सा और चिंता

इस घटना ने गांधीनगर के नागरिकों में भारी गुस्सा और चिंता पैदा कर दी है। लोग पूछ रहे हैं कि राजधानी में इतनी उन्नत सुविधाएं होने के बावजूद पानी की गुणवत्ता और स्वास्थ्य व्यवस्था इतनी कमजोर क्यों है? वे सरकार और महानगरपालिका से तत्काल कदम, पानी की लाइन का पूर्ण मरम्मत और जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।

यह महामारी सिर्फ एक स्वास्थ्य संकट नहीं है, बल्कि शहरी प्रबंधन और जवाबदेही की परीक्षा भी है। यदि तत्काल और सख्त कदम नहीं उठाए गए तो यह स्थिति और खराब हो सकती है।

Friday World 5 जनवरी, 2026  
सज्जादअली नयानी ✍