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Saturday, 10 January 2026

अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की अधूरी पुकार और उत्तराखंड में उभरता जन-आक्रोश

अंकिता भंडारी हत्याकांड: न्याय की अधूरी पुकार और उत्तराखंड में उभरता जन-आक्रोश
Friday World January 7,2026
उत्तराखंड की बेटी अंकिता भंडारी की मौत ने पूरे राज्य को झकझोर दिया था। एक साधारण रिसेप्शनिस्ट की जिंदगी, जो सपनों के साथ ऋषिकेश के पास यमकेश्वर स्थित वनंतरा (Vanantra) रिजॉर्ट में काम करने आई थी, मात्र 20 दिनों में ही एक क्रूर हत्याकांड का शिकार बन गई। यह मामला न केवल एक अपराध की कहानी है, बल्कि सत्ता, प्रभाव और न्याय व्यवस्था पर सवाल भी उठाता है।

घटना का क्रूर सच 
19 वर्षीय अंकिता भंडारी 18 सितंबर 2022 को वनंतरा रिजॉर्ट से गायब हो गईं। चार दिन बाद, 24 सितंबर को उनकी लाश चीला नहर (Chilla Canal) के बैराज से बरामद हुई। जांच में सामने आया कि रिजॉर्ट मालिक पुलकित आर्य (पूर्व भाजपा नेता विनोद आर्य के बेटे), मैनेजर सौरभ भास्कर और असिस्टेंट मैनेजर अंकित गुप्ता ने मिलकर अंकिता की हत्या की। आरोप था कि अंकिता से "एक्स्ट्रा सर्विस" (यौन संबंधित) की मांग की गई, जिसे उन्होंने ठुकरा दिया। गुस्से में तीनों ने उन्हें नहर में धक्का दे दिया।

 पुलिस ने SIT गठित की, जिसमें 47 गवाहों के बयान और फोरेंसिक सबूतों के आधार पर कोटद्वार की अदालत ने 30 मई 2025 को तीनों को उम्रकैद की सजा सुनाई। अदालत ने हत्या (IPC 302), सबूत मिटाने (IPC 201), छेड़छाड़ (IPC 354A) और अनैतिक व्यापार जैसे आरोपों पर दोषी ठहराया। 

सबूत मिटाने का विवाद और बुलडोजर एक्शन 

हत्या के तुरंत बाद, 23-24 सितंबर 2022 की रात में वनंतरा रिजॉर्ट के हिस्से को बुलडोजर से ढहा दिया गया। इसमें अंकिता के कमरे को भी निशाना बनाया गया। अंकिता के परिवार और विपक्ष ने इसे सबूत मिटाने की साजिश बताया। एक JCB चालक ने कोर्ट में गवाही दी कि यह कार्रवाई भाजपा विधायक रेणु बिष्ट और प्रशासन के निर्देश पर हुई। 

पुलिस का दावा है कि रिजॉर्ट की वीडियोग्राफी पहले ही कर ली गई थी और कोई फोरेंसिक सबूत नष्ट नहीं हुआ। लेकिन कई पूर्व पुलिस अधिकारियों ने कहा कि ऐसे एक्शन से सूक्ष्म सबूत (जैसे बाल, डीएनए, सलाइवा) नष्ट हो सकते थे। यह एक्शन राज्य सरकार की ओर से "तेज कार्रवाई" के रूप में पेश किया गया, लेकिन इसने संदेहों को और बढ़ा दिया। 

2026 में फिर गरमाया मामला: VIP एंगल और नया आंदोलन 

2025 के फैसले के बाद मामला शांत हो गया था, लेकिन दिसंबर 2025  में नया मोड़ आया। अभिनेत्री उर्मिला सनावर ने सोशल मीडिया पर ऑडियो-वीडियो जारी कर दावा किया कि अंकिता से "सर्विस" की मांग करने वाला VIP भाजपा का बड़ा नेता (कथित तौर पर "गट्टू" यानी दुष्यंत गौतम) था। इससे राज्य में उबाल आ गया: 

- विपक्ष (कांग्रेस, UKD, CPI आदि) ने CBI जांच की मांग तेज की। 

- अंकिता के पिता वीरेंद्र सिंह भंडारी ने सीएम पुष्कर सिंह धामी से मुलाकात मांगी और कहा कि वे परिवार की मांग मानेंगे। 

- पूर्व सैनिक, महिला संगठन और आम लोग सड़कों पर उतरे। 

- 11 जनवरी 2026 को पूरे उत्तराखंड में बंद का ऐलान किया गया।

 सीएम धामी ने कहा कि कोई VIP शामिल नहीं है और जांच हर स्तर पर तैयार है। पुलिस ने भी VIP एंगल को खारिज किया, लेकिन जनता का गुस्सा शांत नहीं हुआ। 

क्या यह सिर्फ एक हत्या है या बड़ा "मॉड्यूल"? कई लोग इसे एपस्टीन-स्टाइल नेटवर्क मानते हैं, जहां रिजॉर्ट में "स्पेशल सर्विस" के लिए लड़कियों को दबाव में लाया जाता था। आरोप है कि सत्तारूढ़ पार्टी के प्रभावशाली लोग यहां आते थे। लेकिन जांच में ऐसा कोई ठोस सबूत नहीं मिला।

 परिवार और कार्यकर्ता कहते हैं कि उम्रकैद "अधूरा न्याय" है। अंकिता की मां सोनी देवी ने कहा, "जिस तरह मेरी बेटी को मारा गया, उसके लिए फांसी ही काफी है।" 

 अंत में: न्याय की राह में बाधाएं अंकिता भंडारी का मामला सिर्फ एक लड़की की मौत नहीं, बल्कि सत्ता के दुरुपयोग, सबूत मिटाने और प्रभावशाली लोगों की सुरक्षा का प्रतीक बन गया है। राज्य में 11 जनवरी का बंद इस बात का संकेत है कि लोग अब चुप नहीं रहेंगे। 

सवाल यह है — क्या CBI जांच होगी? क्या VIP एंगल की सच्चाई सामने आएगी? या फिर यह मामला भी धीरे-धीरे ठंडा पड़ जाएगा? 

अंकिता के लिए न्याय तब तक अधूरा है, जब तक हर सवाल का जवाब नहीं मिल जाता।

#JusticeForAnkitaBhandari

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World January 7,2026