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Friday, 9 January 2026

एकतरफावाद का मुकाबला: तेहरान-बीजिंग का संतुलित और दूरदर्शी सहयोग नई विश्व व्यवस्था की नींव

एकतरफावाद का मुकाबला: तेहरान-बीजिंग का संतुलित और दूरदर्शी सहयोग नई विश्व व्यवस्था की नींव Friday World January 9,2026
आज की वैश्विक राजनीति में एकतरफावाद (unilateralism) और प्रभुत्ववाद (hegemony) की बढ़ती चुनौतियां दुनिया को दो ध्रुवों में बांट रही हैं। पश्चिमी शक्तियों द्वारा लगाए गए प्रतिबंध, हस्तक्षेप और दबाव की नीतियां विकासशील राष्ट्रों की संप्रभुता को खतरे में डाल रही हैं। ऐसे समय में ईरान और चीन का रणनीतिक साझेदारी एक मजबूत विकल्प के रूप में उभर रही है। चीन में ईरान के राजदूत अब्दोलरेजा रहमानी फजली ने हाल ही में कहा है कि तेहरान और बीजिंग को **"दूरदर्शी और संतुलित" (wise and balanced)** सहयोग के माध्यम से आधुनिक चुनौतियों का सामना करना चाहिए। यह सहयोग न केवल द्विपक्षीय स्तर पर सीमित है, बल्कि यह एशिया की नई भूमिका को मजबूत करने और वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में एशियाई राष्ट्रों की आवाज को बुलंद करने का माध्यम बन रहा है। 

 ईरान-चीन संबंध: एक रणनीतिक साझेदारी से आगे ईरान और चीन के बीच संबंध 1971 में राजनयिक संबंध स्थापित होने के बाद से मजबूत होते गए हैं। 2021 में हस्ताक्षरित **25 वर्षीय व्यापक रणनीतिक सहयोग समझौता** इसकी सबसे बड़ी मिसाल है। यह समझौता ऊर्जा, बुनियादी ढांचा, परिवहन, प्रौद्योगिकी और रक्षा क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा देता है। ईरान के राजदूत ने बीजिंग में छात्रों और शोधकर्ताओं से बातचीत में जोर दिया कि यह संबंध अब द्विपक्षीय सहयोग से कहीं आगे बढ़ चुका है। यह **"नए एशिया"** की स्थापना का हिस्सा है, जहां प्राचीन सभ्यताओं वाले स्वतंत्र राष्ट्र वैश्विक व्यवस्था में अपनी भूमिका को पुनर्परिभाषित कर रहे हैं।

 राजदूत फजली के अनुसार, पूर्वी एशिया की आर्थिक और तकनीकी शक्ति चीन के साथ पश्चिमी एशिया की ईरान की रणनीतिक स्थिति मिलकर पूर्व और पश्चिम एशिया के बीच मजबूत कड़ी बना सकती है। यह सहयोग बुनियादी ढांचा, ऊर्जा, परिवहन और उभरती प्रौद्योगिकियों में "संतुलित" तरीके से आगे बढ़ रहा है, जो क्षेत्रीय संबंधों को नया रूप देगा। 

 एकतरफावाद और प्रभुत्ववाद के खिलाफ संयुक्त मोर्चा वर्तमान अंतरराष्ट्रीय माहौल में अस्थिरता और एकतरफावाद का बढ़ना ईरान-चीन संबंधों की अहमियत को और बढ़ा रहा है। अमेरिका और उसके सहयोगियों द्वारा ईरान पर लगाए गए अवैध प्रतिबंध, इजराइल के हमले और परमाणु समझौते (JCPOA) से अमेरिका की एकतरफा वापसी जैसी घटनाएं तेहरान के लिए चुनौती बनी हुई हैं। ऐसे में चीन ने स्पष्ट रूप से कहा है कि वह ईरान की संप्रभुता, क्षेत्रीय अखंडता और राष्ट्रीय गरिमा का समर्थन करता है। 

चीनी राजदूत कांग पेइवु ने तेहरान में कई मौकों पर दोहराया है कि दोनों देश एकतरफावाद और धौंसबाजी का विरोध करते हैं। SCO (शंघाई सहयोग संगठन) और BRICS जैसे मंचों पर दोनों राष्ट्र बहुपक्षवाद को मजबूत करने और वैश्विक शासन में सुधार के लिए समन्वय कर रहे हैं। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियन ने भी बीजिंग में कहा कि तेहरान और बीजिंग को उत्पीड़न, आक्रामकता और एकतरफावाद का विरोध करते हुए क्षेत्रीय शांति और सुरक्षा को मजबूत करना चाहिए।

 यह सहयोग न केवल राजनीतिक विश्वास को गहरा कर रहा है, बल्कि व्यावहारिक क्षेत्रों में भी फल-फूल रहा है। ईरान की तेल निर्यात में चीन की भूमिका, संयुक्त परियोजनाएं जैसे हाई-स्पीड रेल और राजमार्ग, तथा तकनीकी सहयोग अमेरिकी प्रतिबंधों के बावजूद जारी है। चीन ने स्पष्ट किया है कि यदि ईरान पर नए प्रतिबंध उसके हितों को प्रभावित करेंगे, तो वह कार्रवाई करेगा। 

नई एशियाई व्यवस्था की ओर एक कदम राजदूत फजली का बयान स्पष्ट संदेश देता है: ईरान-चीन साझेदारी क्षेत्रीय सहयोग को मजबूत करने, रणनीतिक स्वायत्तता बढ़ाने और एशियाई राष्ट्रों की वैश्विक निर्णय प्रक्रिया में भूमिका को ऊंचा करने का माध्यम है। जब कुछ विदेशी शक्तियां हस्तक्षेपवादी नीतियों और एकतरफा प्रतिबंधों से पश्चिम एशिया को अस्थिर करने की कोशिश कर रही हैं, तब तेहरान-बीजिंग की साझेदारी **परस्पर सम्मान, बहुपक्षवाद और शांतिपूर्ण विकास** पर आधारित एक अनूठा मॉडल पेश कर रही है।

 यह साझेदारी न केवल दोनों देशों के लिए फायदेमंद है, बल्कि ग्लोबल साउथ के लिए भी प्रेरणा स्रोत है। जहां पश्चिमी व्यवस्था दबाव और प्रतिबंधों पर टिकी है, वहीं ईरान और चीन का मॉडल समानता, न्याय और साझा भविष्य पर आधारित है।  

एक मजबूत भविष्य की नींव आज की दुनिया में जहां एकतरफावाद वैश्विक शांति को चुनौती दे रहा है, तेहरान और बीजिंग का दूरदर्शी सहयोग एक संतुलित विकल्प प्रस्तुत करता है। यह साझेदारी न केवल आधुनिक चुनौतियों का मुकाबला करने में सक्षम है, बल्कि एक बहुध्रुवीय विश्व व्यवस्था की स्थापना में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है। जैसे राजदूत फजली ने कहा, यह संबंध "सामान्य आर्थिक और राजनयिक संबंधों से कहीं आगे" है – यह नई एशिया की रचना का आधार है।

 भविष्य में यदि दोनों राष्ट्र इस संतुलित दृष्टिकोण को बनाए रखें, तो यह न केवल अपनी संप्रभुता की रक्षा करेगा, बल्कि वैश्विक न्याय और शांति के लिए एक नया मॉडल भी पेश करेगा। ईरान-चीन साझेदारी: एकतरफावाद के खिलाफ मजबूत दीवार, और बहुपक्षीय दुनिया की उम्मीद।

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World January 9,2026