ईरान ने अमेरिकी सैन्य ठिकानों और इज़राइल को 'वैध लक्ष्य' घोषित किया – ट्रंप की धमकी का ऐतिहासिक जवाब तैयार
मध्य पूर्व में तनाव चरम पर पहुंच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान में खत्म हुए विरोध प्रदर्शनों को फिर से भड़काने के लिए सैन्य हस्तक्षेप की खुली धमकी के बाद, ईरान ने स्पष्ट और दृढ़ जवाब दिया है। ईरान की संसद के स्पीकर मोहम्मद बाकेर क़लीबाफ ने घोषणा की है कि यदि अमेरिका ने ईरान पर कोई हमला किया, तो क्षेत्र में मौजूद सभी अमेरिकी सैन्य अड्डे, जहाज और इज़राइल "वैध लक्ष्य" बन जाएंगे। यह बयान न केवल एक सैन्य चेतावनी है, बल्कि ईरानी राष्ट्र की एकजुटता और संप्रभुता की रक्षा का प्रतीक है।
ट्रंप प्रशासन ने ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की धमकी देकर क्षेत्रीय स्थिरता को खतरे में डाल दिया है। ट्रंप ने सोशल मीडिया पर लिखा कि यदि ईरान प्रदर्शनकारियों पर बल प्रयोग करता है, तो अमेरिका "उनकी मदद" के लिए तैयार है। लेकिन ईरान इस धमकी को अपनी संप्रभुता पर हमला मानता है। ईरानी नेतृत्व का मानना है कि यह धमकी अमेरिका और इज़राइल द्वारा ईरान को कमजोर करने की साजिश का हिस्सा है, जो पिछले साल के 12-दिवसीय युद्ध के बाद भी जारी है।
ईरान की सरकार और जनता के बीच गहरा एकजुटता का दौर चल रहा है। हाल के दिनों में लाखों ईरानी सड़कों पर उतरे हैं, लेकिन यह विरोध प्रदर्शन नहीं, बल्कि अमेरिका-इज़राइल के खिलाफ राष्ट्रीय एकता का प्रदर्शन है। ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान ने कहा है कि अमेरिका और इज़राइल "अशांति और अराजकता" फैलाना चाहते हैं, लेकिन ईरानी अवाम इन "दंगाइयों और आतंकवादियों" से दूर रहेंगे। सुप्रीम लीडर आयतुल्लाह अली खामेनेई ने भी राष्ट्रीय एकता की अपील की है और विदेशी ताकतों को "आतंकवादी एजेंट" करार दिया है।
ईरानी सेना और इस्लामिक रिवॉल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स (IRGC) पूरी तरह तैयार हैं। ईरानी सेना ने "राष्ट्रीय हितों" की रक्षा की कसम खाई है और कहा है कि अमेरिका-इज़राइल की कोई भी साजिश बर्दाश्त नहीं की जाएगी। ईरान की जनता दिल से सरकार के साथ खड़ी है – यह वह जनता है जो अमेरिकी डॉलर और इज़राइली हथियारों के सामने नहीं झुकती। पिछले विरोधों में जो कुछ असंतोष था, वह अब विदेशी हस्तक्षेप की धमकी के सामने एकजुट हो चुका है। ईरानी लोग जानते हैं कि अमेरिका और इज़राइल का असली मकसद ईरान की संप्रभुता को कुचलना और क्षेत्र में अपना वर्चस्व कायम करना है।
ट्रंप की यह धमकी "एक गलती" साबित हो सकती है, जिसका जवाब इतिहास में दर्ज हो जाएगा। ईरान ने स्पष्ट कर दिया है कि कोई भी हमला "पूर्व-निवारक" कार्रवाई का कारण बनेगा। क्षेत्र में अमेरिकी सैन्य अड्डे – जैसे कतर, बहरीन, यूएई और सऊदी अरब में – अब उच्च जोखिम में हैं। इज़राइल, जो पहले से ही हाई अलर्ट पर है, ईरानी मिसाइलों और ड्रोन हमलों से बचाव की तैयारी कर रहा है, लेकिन ईरान की सैन्य क्षमता को कम आंकना खतरनाक भूल होगी।
ईरान की यह मजबूती सिर्फ सैन्य नहीं, बल्कि नैतिक और राष्ट्रीय है। जहां अमेरिका और इज़राइल आर्थिक प्रतिबंधों, साइबर हमलों और प्रॉक्सी युद्धों से ईरान को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, वहीं ईरानी जनता ने दिखाया है कि वह इन सभी चुनौतियों का सामना करने को तैयार है। ईरान का संदेश साफ है: हमारी जमीन, हमारी संप्रभुता और हमारा भविष्य पर कोई समझौता नहीं।
यह समय क्षेत्रीय शांति के लिए चिंता का है, लेकिन ईरान की एकजुटता यह साबित करती है कि अमेरिका-इज़राइल की कोई भी आक्रामकता बिना जवाब के नहीं जाएगी। आने वाली पीढ़ियां याद रखेंगी कि ईरान ने कैसे एक गलती का जवाब ऐतिहासिक और लंबे समय तक याद रहने वाला दिया। दुनिया अब देख रही है – क्या अमेरिका अपनी "गलती" सुधारता है, या क्षेत्रीय युद्ध की आग भड़काता है?
ईरान मजबूत है, एकजुट है, और तैयार है। कोई भी आक्रमण ईरान की जीत का नया अध्याय लिखेगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 11,2026