Friday World January 3,2026
ईरान की सर्वोच्च राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के सचिव अली लारीजानी ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के ईरान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की धमकी पर तीखी प्रतिक्रिया दी है।
→ लारीजानी ने स्पष्ट किया कि ईरान वैध विरोध करने वाले नागरिकों को तोड़फोड़ करने वाले तत्वों से अलग मानता है। उन्होंने चेतावनी दी कि अमेरिका का इस आंतरिक मुद्दे में हस्तक्षेप पूरे क्षेत्र में अराजकता फैलाएगा और अमेरिकी हितों का विनाश करेगा।
→ उन्होंने आगे कहा, "अमेरिकी जनता को जान लेना चाहिए कि इस खतरनाक दुस्साहस की शुरुआत ट्रंप ने की है, इसलिए उन्हें अपने सैनिकों की सुरक्षा को लेकर सतर्क रहना चाहिए।" यह बयान हालिया ईरानी विरोध प्रदर्शनों के बीच आया है, जहां ट्रंप ने प्रदर्शनकारियों की "रक्षा" का वादा किया था।
ताइवान जलडमरूमध्य में चीन की सख्त चेतावनी एक अन्य मोर्चे पर, चीन के रक्षा मंत्रालय ने ताइवान जलडमरूमध्य में विदेशी हस्तक्षेप के खिलाफ कड़ा रुख अपनाया है।
→ मंत्रालय ने बयान जारी कर कहा कि किसी भी पक्ष या शक्ति को चीन के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप करने या अस्थिरता फैलाने की अनुमति नहीं दी जाएगी।
→ हालिया सैन्य अभ्यासों को अलगाववादी ताकतों से मुकाबला करने, राष्ट्रीय पुनर्संघटन को मजबूत करने और विदेशी हस्तक्षेप का सामना करने के दृढ़ संकल्प के रूप में पेश किया गया। यह चेतावनी अमेरिकी हथियार बिक्री और जापान के बयानों के बाद आई, जो ताइवान मुद्दे पर बढ़ते तनाव को दर्शाती है।
माहातीर मोहम्मद ने इस्राइल को "राक्षस" करार दिया मलेशिया के पूर्व प्रधानमंत्री माहातीर मोहम्मद. ने गाजा में युद्धविराम के बावजूद जारी हिंसा की कड़ी निंदा की है।
→ उन्होंने इस्राइली शासन को "राक्षस" और "जानवरों से भी बदतर" बताया, कहा कि युद्धविराम के दौरान भी हत्याएं जारी हैं।
→ माहातीर ने जोर देकर कहा कि गाजा को दवाइयों और खाद्य सामग्री से वंचित किया जा रहा है, डॉक्टरों को अस्पतालों में प्रवेश से रोका जा रहा है।
→ उन्होंने अंतरराष्ट्रीय समुदाय पर आरोप लगाया कि दुनिया सब देख रही है, लेकिन अमेरिका के सक्रिय समर्थन के कारण कोई कार्रवाई नहीं हो रही। यह बयान गाजा में जारी मानवीय संकट के बीच आया है।
अमेरिका का "रक्तरंजित वर्ष": 40 हज़ार से अधिक लोग हथियारों के शिकार अमेरिका में 2025 एक और हिंसक वर्ष साबित हुआ, जहां -गन वायलेंस आर्काइव- के प्रारंभिक आंकड़ों के अनुसार 40,000 से अधिक लोग गोलीबारी के शिकार हुए।
→ इसमें 14,600 से अधिक मौतें और 26,100 से अधिक घायल शामिल हैं।
→ बच्चों (11 वर्ष या कम) में 224 मौतें और 461 घायल हुए।
→ सीडीसी के अनुसार, आग्नेयास्त्रों से आत्महत्या के कारण 24,000 से अधिक मौतें हुईं।
→ औसतन प्रतिदिन 110 से अधिक लोग सशस्त्र हिंसा में मारे गए या घायल हुए। यह आंकड़े अमेरिका की बंदूक संस्कृति और नियंत्रण की कमी पर गंभीर सवाल उठाते हैं, खासकर जब ईरान जैसे देश अमेरिकी हस्तक्षेप पर सैनिकों की सुरक्षा की चिंता जता रहे हैं।
सूडान में अल-बुरहान का दृढ़ संकल्प: विभाजन की कल्पनाएं कभी साकार नहीं होंगी सूडान के संकट में संप्रभु परिषद के अध्यक्ष अब्दुल फत्ताह अल-बुरहान ने स्पष्ट किया कि देश का विभाजन कभी नहीं होगा।
→ उन्होंने कहा कि जो शक्तियां सूडान को बांटने का सपना देख रही हैं, उनकी ये भ्रांतियां कभी साकार नहीं होंगी।
→ यह बयान RSF के साथ जारी गृहयुद्ध के बीच आया है, जहां अल-बुरहान RSF की आत्मसमर्पण की मांग पर अड़े हैं।
→ सूडान में भुखमरी, विस्थापन और हिंसा चरम पर है, लेकिन अल-बुरहान पड़ोसी देशों को हस्तक्षेप से दूर रहने की चेतावनी दे चुके हैं।
ये घटनाक्रम वैश्विक स्तर पर बढ़ते तनाव को उजागर करते हैं। ईरान-अमेरिका, चीन-ताइवान, इजराइल-गाजा और सूडान जैसे मुद्दे एक-दूसरे से जुड़े दिखते हैं, जहां बड़े शक्तियों का हस्तक्षेप स्थानीय संकटों को और गहरा कर रहा है। दुनिया को शांति और संवाद की जरूरत है, वरना ये आग पूरे क्षेत्र को भस्म कर सकती है।
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Sajjadali Nayani ✍