-Friday World-January – 12, 2026
CM और पुलिस पर गंभीर आरोप – सबूत छीनने और जांच में बाधा डालने का दावा! हाई-वोल्टेज राजनीतिक ड्रामा: ED के छापे के दौरान ममता बनर्जी का हंगामा, अब सुप्रीम कोर्ट में केस
नई दिल्ली, 12 जनवरी 2026 – पश्चिम बंगाल में मनी लॉन्ड्रिंग और कोयला घोटाले की जांच के दौरान एनफोर्समेंट डायरेक्टोरेट (ED) ने बड़ा कदम उठाया है। केंद्रीय जांच एजेंसी ने मुख्यमंत्री ममता बनर्जी, राज्य के डीजीपी राजीव कुमार और कोलकाता पुलिस कमिश्नर मनोज वर्मा के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में आपराधिक प्रक्रिया संहिता (CrPC) की धारा 32 के तहत अर्जी दाखिल कर दी है। ED का आरोप है कि 8 जनवरी 2026 को कानूनी सर्च ऑपरेशन के दौरान मुख्यमंत्री और पुलिस ने जानबूझकर जांच में बाधा डाली, सबूतों के साथ छेड़छाड़ की और महत्वपूर्ण इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस जबरन छीन लिए।
ED के प्रमुख आरोप – क्या कह रही है जांच एजेंसी?
ED ने सुप्रीम कोर्ट को विस्तृत जानकारी देते हुए कई गंभीर आरोप लगाए हैं:
→ 8 जनवरी को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट (PMLA) की धारा 17 के तहत कोलकाता के पार्क स्ट्रीट स्थित प्रतीक जैन के आवास और बिधाननगर सेक्टर-V में इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमिटी (I-PAC) के दफ्तर पर छापेमारी की गई थी।
→ छापेमारी के दौरान मुख्यमंत्री ममता बनर्जी स्वयं 100 से अधिक पुलिस अधिकारियों के साथ प्रतीक जैन के घर पहुंचीं और ED अधिकारियों को रोकने की कोशिश की।
→ ED द्वारा जब्त किए गए लैपटॉप, मोबाइल फोन और महत्वपूर्ण दस्तावेजों को जबरन छीन लिया गया। ये सामान लगभग 2 घंटे तक पुलिस कस्टडी में रखे गए।
→ जांच एजेंसी का दावा है कि इस दौरान सबूतों को नष्ट करने और छेड़छाड़ करने की कोशिश की गई, जिससे जांच को गंभीर नुकसान पहुंचा।
→ ED ने इसे “जानबूझकर जांच में बाधा डालने” और “साक्ष्य नष्ट करने” की साजिश करार दिया है। **
कोयला घोटाला और I-PAC का कनेक्शन – जांच का केंद्र
यह पूरा मामला पश्चिम बंगाल में कथित कोयला तस्करी और मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़ा है, जिसमें कुल 2,742.32 करोड़ रुपये का कथित घोटाला सामने आया है। ED के मुताबिक, इस घोटाले से जुड़ी रकम हवाला चैनलों के जरिए I-PAC को ट्रांसफर की गई थी। जांच में पता चला कि I-PAC को 20 करोड़ रुपये से अधिक की अवैध राशि मिली थी।
I-PAC एक प्रमुख राजनीतिक कंसल्टेंसी फर्म है, जिसने तृणमूल कांग्रेस (TMC) के कई चुनावी अभियानों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। ED का मानना है कि यह फर्म अवैध धन के जरिए राजनीतिक फंडिंग का माध्यम बनी हुई है।
ममता बनर्जी का हंगामा – क्या था पूरा घटनाक्रम?
8 जनवरी को जब ED की टीम छापेमारी के लिए पहुंची, तो स्थिति तनावपूर्ण हो गई। मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने खुद मौके पर पहुंचकर नारेबाजी की और पुलिस को निर्देश दिए। उन्होंने ED अधिकारियों को “घर में घुसपैठिया” करार दिया और कहा कि यह केंद्र सरकार की साजिश है। इस दौरान भारी पुलिस बल तैनात किया गया और ED अधिकारियों को काफी देर तक रोका गया।
ED का कहना है कि इस पूरी घटना ने न केवल जांच को बाधित किया, बल्कि कानूनी प्रक्रिया का भी उल्लंघन किया गया। एजेंसी ने सुप्रीम कोर्ट से मांग की है कि इस मामले में सख्त कार्रवाई हो और संबंधित अधिकारियों को जवाबदेह ठहराया जाए।
राजनीतिक गलियारों में हलचल – TMC और BJP के बीच तीखी बयानबाजी
इस घटना के बाद TMC और BJP के बीच आरोप-प्रत्यारोप का दौर तेज हो गया है। TMC नेताओं का कहना है कि ED केंद्र की एजेंसी है और इसका इस्तेमाल विपक्ष को दबाने के लिए किया जा रहा है। वहीं BJP ने इसे “ममता बनर्जी की निरंकुशता” का सबूत बताया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला अब केवल जांच का नहीं रहा, बल्कि केंद्र और राज्य सरकार के बीच संवैधानिक टकराव का बड़ा मुद्दा बन चुका है। सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के बाद ही इसकी सच्चाई और आगे की कार्रवाई का रास्ता साफ होगा।
सुप्रीम कोर्ट में क्या होगा अगला कदम?
ED ने कोर्ट से अनुरोध किया है कि मामले की गंभीरता को देखते हुए तत्काल सुनवाई हो और पश्चिम बंगाल सरकार को निर्देश दिए जाएं कि भविष्य में जांच एजेंसियों के काम में किसी भी तरह की बाधा न डाली जाए। साथ ही, जब्त सामान की सुरक्षा और जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने की मांग की गई है।
यह घटना न केवल पश्चिम बंगाल की राजनीति में तूफान ला रही है, बल्कि पूरे देश में संघीय ढांचे और जांच एजेंसियों की स्वतंत्रता पर सवाल खड़े कर रही है।
ED मजबूत कदम उठा रही है। अब सुप्रीम कोर्ट का फैसला तय करेगा कि कानून की धज्जियां उड़ाने वालों को सजा मिलेगी या नहीं!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World-January – 12, 2026