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Thursday, 1 January 2026

ईरान की कड़ी चेतावनी: अमेरिकी धमकियाँ IAEA की साख और वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को तबाह कर सकती हैं।

ईरान की कड़ी चेतावनी: अमेरिकी धमकियाँ IAEA की साख और वैश्विक अप्रसार व्यवस्था को तबाह कर सकती हैं।
Friday World0 1 जनवरी, 2026
तेहरान ने अमेरिका की ओर से ईरान के शांतिपूर्ण परमाणु कार्यक्रम के खिलाफ जारी की गई हालिया धमकियों को अंतरराष्ट्रीय कानून का खुला उल्लंघन करार देते हुए गंभीर चेतावनी जारी की है। ईरान का कहना है कि ऐसी धमकियों का सामान्यीकरण न केवल IAEA (अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी) की विश्वसनीयता को नष्ट कर देगा, बल्कि पूरी वैश्विक परमाणु अप्रसार व्यवस्था को गहरी चोट पहुंचाएगा। 

वियना में स्थित ईरान के स्थायी प्रतिनिधि कार्यालय ने IAEA के महानिदेशक राफ़ाएल ग्रोसी को लिखे एक पत्र में स्पष्ट किया कि अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा हाल ही में दोहराई गई धमकियाँ “अंतरराष्ट्रीय संस्थानों की निष्पक्षता और स्वतंत्रता पर सीधा हमला” हैं। ईरान ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर भी इस मुद्दे पर मजबूत संदेश जारी किया। 

ट्रंप की धमकियाँ: क्या बोले अमेरिकी राष्ट्रपति? 
29 दिसंबर 2025 को इज़राइल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू से मुलाकात के बाद ट्रंप ने कहा:

 “मैंने सुना है कि ईरान अपनी परमाणु क्षमताओं को फिर से बनाने की कोशिश कर रहा है। अगर ऐसा हुआ तो हम उसे पूरी तरह नष्ट कर देंगे।” 

जब उनसे पूछा गया कि क्या वे नेतन्याहू को ईरान पर हमला करने की अनुमति देंगे, तो ट्रंप का जवाब था:

 “बैलिस्टिक मिसाइलों के लिए हाँ। परमाणु हथियार के लिए तुरंत!” 

ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराक़ची ने इन बयानों को संयुक्त राष्ट्र चार्टर और अंतरराष्ट्रीय कानून का “घोर उल्लंघन” बताया। उन्होंने कहा कि ईरान आत्मरक्षा के अपने निर्विवाद अधिकार (UN Charter Article 51) के तहत किसी भी आक्रमण का “कड़ा और पछतावा कराने वाला” जवाब देने में कोई संकोच नहीं करेगा। 

ईरान ने इस मुद्दे को संयुक्त राष्ट्र महासचिव और सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष तक भी औपचारिक रूप से पहुंचाया है। 

धमकियों के खतरनाक परिणाम: तीन बड़े खतरे 

1. IAEA की साख पर गहरा संकट IAEA एक तकनीकी और वैज्ञानिक संस्था है, जिसका काम निष्पक्ष मूल्यांकन करना है। जब बड़ी शक्तियाँ उसके फैसलों पर राजनीतिक दबाव डालती हैं, तो उसकी विश्वसनीयता खत्म हो जाती है। ईरान का कहना है कि 12 दिनों के युद्ध में इज़राइल-अमेरिका द्वारा ईरानी परमाणु सुविधाओं पर हमले के दौरान ग्रोसी की चुप्पी ने ट्रंप को और दुस्साहस दिया। 

2. वैश्विक अप्रसार व्यवस्था का ढहना NPT (परमाणु अप्रसार संधि) का मूल सिद्धांत है: हथियार न बनाओ, बदले में शांतिपूर्ण परमाणु तकनीक का अधिकार मिलेगा। अगर NPT का पालन करने वाले ईरान को भी धमकियाँ मिलती हैं, तो अन्य देशों के लिए भी संधि का पालन करने का कोई औचित्य नहीं बचेगा। इससे गुप्त परमाणु कार्यक्रमों का खतरा बढ़ेगा। 

3. धमकी को विदेश नीति का सामान्य हथियार बनाना अगर किसी देश की वैध वैज्ञानिक गतिविधियों के खिलाफ धमकी देना सामान्य हो गया, तो भविष्य में हर क्षेत्र में यही तरीका अपनाया जाएगा। इससे वैश्विक सहयोग, वैज्ञानिक प्रगति और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा का माहौल पूरी तरह विषाक्त हो जाएगा। 

 ईरान का परमाणु कार्यक्रम: तथ्य क्या कहते हैं? ईरान का परमाणु कार्यक्रम पूरी तरह NPT के दायरे में है और IAEA की निरंतर निगरानी में चल रहा है। तेहरान बार-बार दोहराता रहा है कि उसका लक्ष्य केवल शांतिपूर्ण उपयोग है: 

- परमाणु ऊर्जा से बिजली उत्पादन 

- चिकित्सा में रेडियोआइसोटोप

 - कृषि और पर्यावरण संरक्षण

 फिर भी अमेरिका और उसके कुछ सहयोगी इसे खतरे के रूप में पेश करते हैं और ईरान के वैज्ञानिक विकास को रोकने के लिए हर संभव दबाव का इस्तेमाल करते हैं। 

धमकी नहीं, संवाद ही समाधान ईरान की चेतावनी स्पष्ट है: ये धमकियाँ न केवल तेहरान के खिलाफ हैं, बल्कि पूरी अंतरराष्ट्रीय व्यवस्था की नींव को हिला रही हैं। 

वास्तविक समाधान केवल तीन बातों में छिपा है: 

- अंतरराष्ट्रीय कानून का सम्मान 

- शांतिपूर्ण परमाणु ऊर्जा के अधिकार की मान्यता

 - IAEA की निष्पक्षता और स्वतंत्रता की रक्षा 

धमकी और दबाव से वैश्विक सुरक्षा मजबूत नहीं, बल्कि और नाजुक होती है। संवाद, विश्वास-निर्माण और बहुपक्षीय सहयोग ही अप्रसार व्यवस्था को बचाने का एकमात्र रास्ता है। 

अन्यथा, ये अनियंत्रित धमकियाँ न सिर्फ ईरान, बल्कि पूरे विश्व को एक खतरनाक और अस्थिर भविष्य की ओर धकेल रही हैं। 

Friday World0 1 जनवरी, 2026
Sajjadali Nayani ✍