Friday World 4 January ,2026
गुजरात में IAS अधिकारियों की बढ़ती बदनामी: 1500 करोड़ के जमीनी घोटाले में पूर्व सुरेंद्रनगर कलेक्टर राजेंद्रकुमार पटेल सस्पेंड, ED की गिरफ्तारी के बाद बड़ा एक्शन
गुजरात की प्रशासनिक व्यवस्था में एक बार फिर हड़कंप मच गया है। 1500 करोड़ रुपये के बड़े जमीनी घोटाले में फंसे सुरेंद्रनगर के पूर्व जिला कलेक्टर और 2015 बैच के IAS अधिकारी डॉ. राजेंद्रकुमार पटेल को प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने 2 जनवरी 2026 को गिरफ्तार किया।
इसके बाद गुजरात सरकार ने उन्हें तुरंत सस्पेंड कर दिया। यह मामला बिना खेती (NA - Non-Agricultural) जमीन कन्वर्शन से जुड़ा है, जहां रिश्वत लेकर फाइलों को तेजी से मंजूरी दी जाती थी।
ED की जांच में खुलासा ED की प्रारंभिक जांच में पता चला कि इस घोटाले में 10 करोड़ रुपये से अधिक की रिश्वत ली गई।
जांचकर्ताओं ने एक "हिसाब शीट" बरामद की, जिसमें करीब 800 NA परमिशन एप्लीकेशनों का जिक्र था। रिश्वत की दरें तय थीं - प्रति वर्ग मीटर 5 से 10 रुपये तक। मुख्य आरोपी राजेंद्र पटेल को कुल रिश्वत का 50% हिस्सा मिलता था, जबकि 10% बिचौलिए के पास जाता और बाकी अन्य अधिकारियों में बंटता।
ED ने डिप्टी मामलतदार चंद्रसिंह मोरी, कलेक्टर के PA जयराजसिंह झाला और क्लर्क मयूरसिंह गोहिल के घरों पर छापे मारे।
मोरी के घर से 67.50 लाख रुपये नकद बरामद हुए, जो बिस्तर में छिपाए गए थे। इन तीनों ने ED के सामने बयान दिए कि पूरा नेटवर्क पटेल के इशारे पर चलता था। पटेल को मुख्य सूत्रधार और सबसे बड़ा लाभार्थी बताया गया।
कोर्ट ने 7 जनवरी तक रिमांड मंजूर गिरफ्तारी के बाद ED ने अहमदाबाद की स्पेशल PMLA कोर्ट में पटेल को पेश किया। एजेंसी ने 10 दिनों का रिमांड मांगा, लेकिन कोर्ट ने 7 जनवरी 2026 तक का रिमांड मंजूर किया। जांच में पटेल के खिलाफ मनी लॉन्ड्रिंग, रिश्वत और भ्रष्टाचार के गंभीर सबूत मिले हैं।
पटेल की संपत्ति पर भी सवाल ED ने पाया कि पटेल ने अहमदाबाद के चंदलोडिया इलाके में एक फ्लैट खरीदा था, लेकिन उसका किराया उनकी मां के बैंक खाते में जमा होता था। सुरेंद्रनगर में उनके बच्चों की स्कूल फीस भी समय पर नहीं चुकाई गई। आयकर रिटर्न में कृषि भूमि होने के बावजूद कोई कृषि आय नहीं दिखाई गई। ये सभी संकेत अवैध कमाई को छिपाने के प्रयासों की ओर इशारा करते हैं।
4 साल में चौथा कलेक्टर सस्पेंड: गुजरात IAS की छवि पर सवाल यह घटना गुजरात में पिछले 4 वर्षों में चौथा मामला है, जहां कोई कलेक्टर जमीनी घोटाले या भ्रष्टाचार में फंसकर सस्पेंड हुआ। पहले के प्रमुख मामले इस प्रकार हैं:
→ 2024: सूरत कलेक्टर आयुष ओक - करोड़ों की सरकारी जमीन हड़पने के आरोप में 1 साल से अधिक समय से सस्पेंड।
→ 2023: आनंद कलेक्टर डी.एस. गढ़वी - ऑफिस में अश्लील हरकतों के वीडियो और नैतिक गिरावट के आरोप।
→ 2022: सूरत पूर्व कलेक्टर के. राजेश - हथियार लाइसेंस और जमीनी घोटाले में CBI गिरफ्तारी।
पिछले 7 वर्षों में कुल 6 IAS अधिकारियों पर भ्रष्टाचार, रिश्वत और जमीनी घोटालों के आरोप लगे हैं। सूरत, आनंद, जूनागढ़ और अब सुरेंद्रनगर जैसे जिलों में ये घटनाएं प्रशासन की विश्वसनीयता पर गहरे सवाल खड़े कर रही हैं।
पारदर्शिता की जरूरत यह मामला दिखाता है कि कैसे सिस्टमैटिक तरीके से रिश्वत का नेटवर्क चलाया जा रहा था। ED की जांच अब आगे बढ़ रही है और यह देखना होगा कि क्या इस घोटाले के पीछे और बड़े नाम सामने आते हैं। गुजरात सरकार को ऐसे मामलों पर सख्त कार्रवाई कर प्रशासन में पारदर्शिता और विश्वास बहाल करने की जरूरत है।
Sajjadali Nayani ✍
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