श्रीहरिकोटा (आंध्र प्रदेश), 12 जनवरी 2026: भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (इसरो) के लिए आज का दिन मिश्रित भावनाओं वाला रहा। सुबह के समय PSLV-C62 रॉकेट ने श्रीहरिकोटा के सतीश धवन स्पेस सेंटर से EOS-N1 (Earth Observation Satellite-N1) मिशन को सफलतापूर्वक उड़ान भरी, लेकिन मिशन के आखिरी चरण में एक अप्रत्याशित 'गड़बड़ी' ने पूरे अभियान को प्रभावित कर दिया। इसरो ने इस घटना की गहन जांच शुरू कर दी है और जल्द ही पूरी सच्चाई सामने लाने का वादा किया है।
इसरो के अध्यक्ष डॉ. वी. नारायणन ने शाम को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में पूरी स्थिति स्पष्ट की। उन्होंने कहा, "पीएसएलवी एक बेहद विश्वसनीय और अनुभवी रॉकेट है, जिसमें चार स्टेज होते हैं—
दो सॉलिड बूस्टर स्टेज और दो लिक्विड स्टेज। आज का लॉन्च भी शुरू से ही पूरी तरह से योजना के अनुसार चल रहा था। पहले, दूसरे और तीसरे स्टेज के शुरुआती हिस्से तक रॉकेट का प्रदर्शन बिल्कुल उम्मीद के मुताबिक था।"
डॉ. नारायणन ने आगे बताया, "तीसरे स्टेज के अंतिम चरण में अचानक रोल रेट (रॉकेट का अपने एक्सिस के चारों ओर घूमने की गति) में असामान्य वृद्धि देखी गई। इससे रॉकेट के फ्लाइट पाथ में अप्रत्याशित बदलाव आया। इस वजह से चौथा स्टेज और सैटेलाइट को सही ऑर्बिट में डालना संभव नहीं हो सका। हमने मिशन को सुरक्षित रूप से टर्मिनेट कर दिया, लेकिन यह हमारे लिए निश्चित रूप से एक चुनौतीपूर्ण स्थिति थी।"
इसरो ने अपनी आधिकारिक एक्स (पूर्व ट्विटर) हैंडल पर पोस्ट करते हुए लिखा:
"PSLV-C62/EOS-N1 मिशन के दौरान तीसरे स्टेज के अंत में रोल रेट में गड़बड़ी देखी गई। मिशन आगे नहीं बढ़ सका। सभी ग्राउंड स्टेशनों से प्राप्त डेटा का विश्लेषण शुरू कर दिया गया है।"
क्या थी EOS-N1 मिशन की खासियत? EOS-N1 भारत का एक उन्नत अर्थ ऑब्जर्वेशन सैटेलाइट था, जिसका मुख्य उद्देश्य उच्च-रिज़ॉल्यूशन इमेजिंग, कृषि निगरानी, आपदा प्रबंधन, शहरी योजना और पर्यावरण निगरानी में योगदान देना था। यह सैटेलाइट 800 किलोग्राम से अधिक वजन का था और इसे 650 किलोमीटर की ध्रुवीय सूर्य-सिंक्रोनस ऑर्बिट (SSPO) में स्थापित करने की योजना थी। इस मिशन से भारत को रियल-टाइम उच्च-गुणवत्ता वाली सैटेलाइट इमेजरी मिलने की उम्मीद थी, जो जलवायु परिवर्तन, बाढ़, सूखा और वन क्षेत्र की निगरानी में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती थी।
PSLV की विश्वसनीयता पर सवाल नहीं पीएसएलवी (Polar Satellite Launch Vehicle) भारत का सबसे भरोसेमंद रॉकेट माना जाता है। 1993 से अब तक इसने 60 से अधिक सफल मिशन पूरे किए हैं और विदेशी सैटेलाइट्स को भी नियमित रूप से अंतरिक्ष में पहुंचाया है। PSLV-C62 यह 62वां PSLV मिशन था, जिसकी वजह से इसे विशेष महत्व प्राप्त था। हालांकि इसरो के वैज्ञानिकों का मानना है कि ऐसी छोटी-मोटी गड़बड़ियां बड़े मिशनों में कभी-कभी आ ही जाती हैं और
Sajjadali Nayani ✍
Friday World January 12,2026