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Saturday, 21 February 2026

ईरान का डेना विध्वंसक विशाखापत्तनम पहुंचा: तेहरान-नई दिल्ली ने मजबूत की समुद्री सुरक्षा साझेदारी, मिलन 2026 में होगी बड़ी नौसैनिक कवायद!

ईरान का डेना विध्वंसक विशाखापत्तनम पहुंचा: तेहरान-नई दिल्ली ने मजबूत की समुद्री सुरक्षा साझेदारी, मिलन 2026 में होगी बड़ी नौसैनिक कवायद! -Friday World 22 February 2026

ईरान की नौसेना का स्वदेशी निर्माण किया गया डेना विध्वंसक (Dena Destroyer) शुक्रवार को भारत के विशाखापत्तनम बंदरगाह पर पहुंच गया। यह जहाज मिलन 2026 (Milan 2026) बहुराष्ट्रीय नौसैनिक अभ्यास में भाग लेने आया है। इसी दौरान ईरान के नौसेना प्रमुख रियर एडमिरल शाहराम ईरानी ने भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी से मुलाकात की और दोनों देशों के बीच समुद्री सुरक्षा सहयोग को और मजबूत करने पर गहन चर्चा की। 

 ईरानी कमांडर की भारत यात्रा का उद्देश्य रियर एडमिरल शाहराम ईरानी तीन प्रमुख कार्यक्रमों में हिस्सा लेने भारत आए हैं: 

- इंडियन ओशन नेवल सिम्पोजियम (IONS) 

- मिलन 2026 नेवल एक्सरसाइज 

- इंटरनेशनल फ्लीट रिव्यू (IFR) 

मुलाकात में ईरानी कमांडर ने कहा, "क्षेत्रीय देशों के बीच सहयोग और तालमेल से ही सतत समुद्री सुरक्षा सुनिश्चित की जा सकती है। इस क्षेत्र में सक्रिय और जिम्मेदार मौजूदगी ही महत्वपूर्ण ऊर्जा और व्यापार मार्गों की स्थिरता और सुरक्षा की गारंटी देती है।" 

उन्होंने हिंद महासागर क्षेत्र की वैश्विक व्यापार में रणनीतिक अहमियत पर जोर देते हुए कहा कि बहुपक्षीय अभ्यास ऑपरेशनल समन्वय बढ़ाने, युद्ध तैयारियों को मजबूत करने और रक्षा कूटनीति को गति देने का शानदार अवसर प्रदान करते हैं। 

ईरानी कमांडर ने भारत के साथ तकनीकी और शैक्षणिक सहयोग बढ़ाने तथा आपसी हितों वाले क्षेत्रों में संयुक्त अभ्यास करने की इच्छा जताई। उन्होंने विशेष रूप से लंबी दूरी की ऑपरेशंस और वाणिज्यिक जहाजों के एस्कॉर्ट मिशन में अनुभव साझा करने पर जोर दिया, जिससे दोनों नौसेनाओं की क्षमताओं में इजाफा हो सकता है। 

भारतीय नौसेना प्रमुख की प्रतिक्रिया एडमिरल दिनेश कुमार त्रिपाठी ने कहा कि क्षेत्रीय नौसेनाओं के बीच निरंतर और रचनात्मक जुड़ाव समुद्री डकैती, संगठित तस्करी और प्राकृतिक आपदाओं जैसी साझा चुनौतियों से निपटने में अहम भूमिका निभाता है।

 उन्होंने तकनीकी विशेषज्ञता साझा करने, आपसी प्रशिक्षण क्षमताओं का उपयोग करने और साझा हितों के दायरे में समुद्री सहयोग बढ़ाने की आवश्यकता पर बल दिया।

 भारत के रक्षा मंत्रालय के बयान के अनुसार, इस बहुराष्ट्रीय अभ्यास में 74 देशों के नौसेना प्रमुख और प्रतिनिधिमंडल शामिल हैं। 

 डेना विध्वंसक की खासियतें डेना विध्वंसक ईरान की मोवज-क्लास (Mowj-class) का हिस्सा है, जो पूरी तरह स्वदेशी तकनीक से निर्मित है। यह जहाज लंबी समुद्री यात्राओं के लिए डिजाइन किया गया है और हवाई, सतह तथा पनडुब्बी लक्ष्यों को डिटेक्ट, ट्रैक और नष्ट करने की क्षमता रखता है।

 इसके डेक पर हेलीकॉप्टर तैनात करने की सुविधा है। जहाज पर रक्षात्मक और आक्रामक हथियार प्रणालियां लगी हैं, जो इसे बहुमुखी युद्धपोत बनाती हैं। 

इस तैनाती का मकसद समुद्री कूटनीति को बढ़ावा देना, रक्षा संबंधों का विस्तार और ईरानी नौसेना की परिचालन क्षमताओं को प्रदर्शित करना है। 

मिलन 2026: हिंद महासागर में शक्ति प्रदर्शन मिलन 2026 हिंद महासागर क्षेत्र की सबसे बड़ी नौसैनिक कवायदों में से एक है। यह अभ्यास न केवल युद्ध कौशल को निखारता है, बल्कि क्षेत्रीय देशों के बीच विश्वास और समन्वय बढ़ाने में भी अहम भूमिका निभाता है।

 ईरान का इस अभ्यास में शामिल होना खासा महत्वपूर्ण है, क्योंकि हिंद महासागर वैश्विक व्यापार और ऊर्जा आपूर्ति का प्रमुख मार्ग है। ईरान और भारत दोनों ही इस क्षेत्र में अपनी उपस्थिति मजबूत करना चाहते हैं। 

भारत-ईरान संबंधों में नया अध्याय? यह दौरा भारत और ईरान के बीच रक्षा और समुद्री सहयोग को नई दिशा दे सकता है। दोनों देश पहले से ही चाबहार पोर्ट जैसे प्रोजेक्ट्स में सहयोग कर रहे हैं। अब नौसेना स्तर पर बढ़ता जुड़ाव दोनों देशों के लिए सामरिक रूप से फायदेमंद साबित हो सकता है।

 विशाखापत्तनम में डेना विध्वंसक की मौजूदगी और दोनों कमांडरों की मुलाकात से साफ संकेत मिलता है कि हिंद महासागर में शांति और सुरक्षा के लिए भारत और ईरान साथ मिलकर काम करने को तैयार हैं। 

क्या मिलन 2026 और आने वाले दिनों में दोनों नौसेनाओं के बीच और बड़े अभ्यास देखने को मिलेंगे? समय बताएगा। फिलहाल, यह दौरा दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का मजबूत संदेश दे रहा है।

 Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 22 February 2026