-Friday World 22 February 2026
अमेरिका और ईरान के बीच तनाव अब युद्ध की कगार पर पहुँच चुका है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को न्यूक्लियर डील के लिए 10 से 15 दिनों की अल्टीमेटम दी है – "मीनिंगफुल डील नहीं तो बहुत बुरा होगा!" इस धमकी के साथ अमेरिका ने मिडिल ईस्ट में दुनिया का सबसे बड़ा मिलिट्री बिल्डअप किया है – दो एयरक्राफ्ट कैरियर्स, वॉरशिप्स, फाइटर जेट्स और हजारों सैनिक तैयार! ईरान भी पीछे नहीं हट रहा – होर्मुज स्ट्रेट में लाइव फायर ड्रिल्स कर रहा है और धमकी दे रहा है कि अमेरिकी बेस पर हमला करेगा।
यह संभावित युद्ध सिर्फ दो देशों तक सीमित नहीं रहेगा – इसकी मार पूरी दुनिया पर पड़ेगी। यहाँ 6 मुख्य आपदाएँ जो हो सकती हैं:
1. तेल-गैस की कीमतों में विस्फोटक उछाल – ऊर्जा संकट की शुरुआत! होर्मुज स्ट्रेट – दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण 'तेल का गला' – जहाँ से रोजाना 20-25% वैश्विक तेल और 20% LNG गुजरता है। ईरान इसे बंद कर देगा तो तेल की कीमतें 100-150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुँच सकती हैं! भारत जैसे देश जो 80% तेल आयात करते हैं, उन्हें भारी झटका लगेगा। पेट्रोल-डीजल ₹150-200+ हो जाएगा, ट्रांसपोर्ट और उत्पादन लागत बढ़ेगी – आम आदमी की जेब पर सीधा हमला!
2. वैश्विक अर्थव्यवस्था में भारी मंदी – शेयर बाजार टूटेगा! युद्ध शुरू होते ही शेयर बाजार में 10-20% की गिरावट आ सकती है। तेल की कीमत बढ़ने से मैन्युफैक्चरिंग, ट्रांसपोर्ट और फूड प्रोसेसिंग की लागत बढ़ेगी – हर चीज महंगी हो जाएगी। बड़ी बैंकों और वित्तीय संस्थाओं ने चेतावनी दी है कि यह युद्ध वैश्विक रिसेशन (मंदी) ला सकता है। नौकरियों में कटौती, आर्थिक विकास रुकना – 2008 की मंदी से भी बदतर स्थिति बन सकती है।
3. मिडिल ईस्ट में फैलता युद्ध – आग का गोला! यह युद्ध सीमित नहीं रहेगा। ईरान के प्रॉक्सी ग्रुप्स (हिजबुल्लाह, हूती, हमास) और पड़ोसी देश (इराक, सीरिया, लेबनान) भी इसमें शामिल हो जाएँगे। इजरायल भी हमला कर सकता है। भयंकर बमबारी और मिसाइल हमलों से लाखों लोग मारे जाएँगे, शहर खंडहर हो जाएँगे – पूरा मिडिल ईस्ट आग में जल जाएगा!
4. बड़ा शरणार्थी संकट – लाखों लोग बेघर! युद्ध से लाखों लोग अपने घर छोड़ने को मजबूर होंगे। वे तुर्की, जॉर्डन, यूरोप और अन्य देशों की ओर जाएँगे – जिससे वहाँ सामाजिक-आर्थिक तनाव बढ़ेगा। यूरोप में पहले से ही शरणार्थी समस्या है, यह नया संकट इसे और गंभीर बना देगा। मानवीय त्रासदी – भूख, बीमारी और अनिश्चितता!
5. भारत पर सीधी मार – महंगाई और ऊर्जा संकट! भारत तेल का बड़ा आयातक है – ईरान और गल्फ से बड़ा हिस्सा आता है। होर्मुज बंद होने से तेल की कीमतें बढ़ेंगी, रुपया कमजोर पड़ेगा, महंगाई 10-15% तक बढ़ सकती है। ट्रांसपोर्ट, खाद्यान्न और औद्योगिक उत्पादन पर असर – आम आदमी की जेब पर बोझ!
6. वैश्विक सुरक्षा और राजनीति में अस्थिरता – नए युद्धों की शुरुआत? यह युद्ध रूस, चीन जैसे देशों को भी प्रभावित करेगा – वे ईरान के समर्थक हैं। वैश्विक सुरक्षा व्यवस्था हिल जाएगी, नए गठबंधन बनेंगे और हथियारों की दौड़ शुरू हो सकती है। न्यूक्लियर युद्ध का खतरा भी बढ़ेगा!
इस अल्टीमेटम के 10-15 दिनों में पूरी दुनिया साँस रोककर देख रही है – शांति की उम्मीद या युद्ध की आग? अपडेट्स और जांच के लिए जुड़े रहें। सत्य और शांति की जीत हो, यही प्रार्थना!
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 22 February 2026