-Friday World – 26 February 2026
टोरंटो-नई दिल्ली: कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी की इस सप्ताह होने वाली भारत यात्रा के दौरान युरेनियम सप्लाई का एक बड़ा और महत्वपूर्ण सौदा होने की पूरी संभावना जताई जा रही है। कार्नी के साथ एक मजबूत व्यापारिक प्रतिनिधिमंडल भारत आ रहा है, जिसमें दुनिया की सबसे बड़ी युरेनियम उत्पादक कंपनी **कैमेको (Cameco)** के सीईओ टिम गिट्ज़ेस और बिजनेस काउंसिल ऑफ कनाडा के सीईओ एवं प्रेसिडेंट गोल्डी हाइडर भी शामिल हैं। हिंदुस्तान टाइम्स को दिए एक विशेष बयान में गोल्डी हाइडर ने इस बात की पुष्टि करते हुए कहा कि युरेनियम सप्लाई इस यात्रा का एक प्रमुख एजेंडा होगा।
कैमेको का बड़ा दांव और सस्कैचेवान का साथ** कैमेको का मुख्यालय कनाडा के सस्कैचेवान प्रांत की राजधानी सस्कैटून में स्थित है। सस्कैचेवान के प्रीमियर स्कॉट मो भी इस डेलिगेशन का हिस्सा होंगे। प्रीमियर मो ने स्पष्ट रूप से कहा है कि “युरेनियम सप्लाई भारत के साथ चर्चा का केंद्र बिंदु रहेगा।” अगर यह डील फाइनल होती है तो यह **कनाडाई डॉलर 2.8 बिलियन** (लगभग 1.7-1.8 बिलियन अमेरिकी डॉलर) की होगी और यह सौदा **10 साल** तक चलने वाला होगा। यह भारत की न्यूक्लियर एनर्जी महत्वाकांक्षाओं के लिए बहुत बड़ा कदम साबित होगा।
पिछले समझौते और 2020 में खत्म हुई डील यह पहली बार नहीं है जब भारत और कैमेको के बीच युरेनियम का सौदा होने जा रहा है। भारत के परमाणु ऊर्जा विभाग (Department of Atomic Energy) ने पहले भी कैमेको के साथ युरेनियम खरीद समझौता किया था, जो 2020 में समाप्त हो गया था। उससे पहले 2013 में कनाडा और भारत के बीच परमाणु सहयोग समझौता हुआ था। 2015 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कनाडा यात्रा के दौरान तत्कालीन कनाडाई पीएम स्टीफन हार्पर के साथ द्विपक्षीय चर्चा में युरेनियम सप्लाई को लेकर सहमति बनी थी। उस समझौते के तहत कनाडा ने शांतिपूर्ण उपयोग (विद्युत उत्पादन) के लिए युरेनियम सप्लाई करने की सहमति दी थी।
भारत की बढ़ती न्यूक्लियर जरूरतें भारत तेजी से अपनी न्यूक्लियर एनर्जी क्षमता बढ़ा रहा है। छोटे-छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर (Small Modular Reactors) विकसित किए जा रहे हैं, जिनके लिए उच्च गुणवत्ता वाला युरेनियम जरूरी है। भारत का लक्ष्य 2030 तक न्यूक्लियर पावर क्षमता को 22,480 MW तक पहुंचाना है और 2047 तक इसे और भी बढ़ाना है। कनाडा दुनिया का सबसे बड़ा युरेनियम उत्पादक देशों में से एक है और कैमेको वैश्विक स्तर पर सबसे भरोसेमंद सप्लायर है। ऐसे में यह डील भारत की स्वच्छ ऊर्जा यात्रा में मील का पत्थर साबित हो सकती है।
→ **पिछले महीने की तैयारी** इस डील की नींव पिछले महीने ही रखी गई थी। कनाडा के एनर्जी मंत्री टिम हॉग्सन ने पिछले महीने भारत का दौरा किया था और भारत के ऊर्जा मंत्री तथा परमाणु ऊर्जा विभाग के अधिकारियों के साथ कई दौर की बातचीत की थी। उस दौरान दोनों पक्षों ने युरेनियम सप्लाई चेन, सुरक्षा मानकों और लॉन्ग-टर्म कॉन्ट्रैक्ट पर विस्तृत चर्चा की थी। अब पीएम कार्नी की यात्रा के दौरान इस पर अंतिम मुहर लगने की संभावना है।
क्यों महत्वपूर्ण है यह सौदा?
- भारत को स्थिर और भरोसेमंद युरेनियम सप्लाई मिलेगी। - कनाडा को भारत जैसे बड़े बाजार में लंबे समय तक व्यापारिक मौका मिलेगा।
- दोनों देशों के बीच रणनीतिक साझेदारी और मजबूत होगी।
- भारत की नेट-जीरो और स्वच्छ ऊर्जा लक्ष्यों को बल मिलेगा।
→ **दोनों पक्षों की प्रतिक्रिया** कनाडाई अधिकारियों ने इस सौदे को “सकारात्मक और पारस्परिक लाभकारी” बताया है। भारतीय पक्ष ने अभी आधिकारिक बयान नहीं दिया है, लेकिन सूत्रों के अनुसार दोनों देशों के बीच बातचीत अंतिम चरण में है। अगर यह डील सफल होती है तो यह भारत-कनाडा संबंधों में नया अध्याय खुलेगा।
भारत-कनाडा के बीच युरेनियम डील: न्यूक्लियर भविष्य की नई शुरुआत
Sajjadali Nayani ✍
Friday World – 26 February 2026