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Saturday, 21 February 2026

ट्रंप के टैरिफ का भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर पर भयंकर असर: 50 लाख नौकरियां खतरे में, लेकिन रिकवरी की उम्मीद!!

ट्रंप के टैरिफ का भारतीय टेक्सटाइल सेक्टर पर भयंकर असर: 50 लाख नौकरियां खतरे में, लेकिन रिकवरी की उम्मीद!! -Friday World 22 February 2026
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारत पर लगाए गए  टैरिफ ने भारतीय टेक्सटाइल और गारमेंट उद्योग को गहरा झटका दिया है। यह सेक्टर, जो कृषि के बाद देश में सबसे बड़ा रोजगार सृजनकर्ता है, अब गंभीर चुनौतियों का सामना कर रहा है। उद्योग विशेषज्ञों और रिपोर्ट्स के अनुसार, इस टैरिफ ने अमेरिकी बाजार में भारतीय कपड़ों की प्रतिस्पर्धा को बुरी तरह प्रभावित किया, जिससे ऑर्डर रुक गए, उत्पादन घटा और लाखों मजदूरों की नौकरियां दांव पर लग गईं। हालांकि, हालिया विकास से उम्मीद की किरण दिख रही है। 

 अमेरिका में भारत का मजबूत हिस्सा, लेकिन टैरिफ ने सब उलट दिया भारत हर साल दुनिया भर में करीब 12 अरब डॉलर के कपड़े निर्यात करता है, जिसमें अमेरिका का हिस्सा लगभग 25-28% तक रहता है। खासकर कॉटन-आधारित गारमेंट्स, निटवियर और रेडीमेड कपड़े अमेरिकी बाजार में बहुत लोकप्रिय थे। लेकिन अगस्त 2025 में ट्रंप प्रशासन द्वारा लगाए गए 50% टैरिफ (रूसी तेल खरीद से जुड़े मुद्दों पर आधारित) ने भारतीय उत्पादों की कीमतों को 50% तक बढ़ा दिया। इससे अमेरिकी खरीदारों (जैसे Nike, Walmart) ने भारत से ऑर्डर रोक दिए और बांग्लादेश, वियतनाम, कंबोडिया जैसे देशों की ओर रुख किया, जहां टैरिफ बहुत कम हैं।

 नेशनल टेक्सटाइल एसोसिएशन (या इसी तरह के संगठनों) के विशेषज्ञों जैसे आर.के. विज ने विभिन्न सम्मेलनों और इंटरव्यू में बताया कि टैरिफ के कारण सैकड़ों फैक्टरियां उत्पादन कम कर चुकी हैं या बंद हो गई हैं। तिरुपुर (तमिलनाडु), सूरत, नोएडा और पनipat जैसे प्रमुख हब्स में उत्पादन 30-50% तक गिरा है। परिणामस्वरूप, टेक्सटाइल सेक्टर में काम करने वाले लाखों मजदूर प्रभावित हुए हैं—कुछ रिपोर्ट्स में 20 लाख से 50 लाख तक की नौकरियां जोखिम में बताई गई हैं, खासकर MSMEs में। तमिलनाडु जैसे राज्यों में जहां टेक्सटाइल 75 लाख से ज्यादा लोगों को रोजगार देता है, वहां 30 लाख नौकरियां तत्काल खतरे में बताई गईं। 

रोजगार का दूसरा सबसे बड़ा स्तंभ: 4 करोड़ से ज्यादा लोग जुड़े भारत में टेक्सटाइल सेक्टर कृषि के बाद सबसे बड़ा रोजगार प्रदाता है। यहां सीधे 4 करोड़ लोग काम करते हैं, जबकि अप्रत्यक्ष रूप से 6 करोड़ और जुड़े हैं। ज्यादातर मजदूर ग्रामीण क्षेत्रों से आते हैं, जिसमें महिलाओं की बड़ी संख्या है। टैरिफ के कारण फैक्टरियों में छंटनी, वेतन कटौती, काम के दिन कम होना और मजदूरों को "स्थिति सुधरने पर बुलाएंगे" जैसी बातें सुननी पड़ रही हैं। कई MSME यूनिट्स बंद होने की कगार पर हैं, जिससे पूरा सप्लाई चेन प्रभावित हो रहा है। 

रिकवरी की राह: नए बाजार और समझौते अच्छी खबर यह है कि यह संकट स्थायी नहीं लगता। विशेषज्ञों का कहना है कि 4-6 महीनों में सुधार आ सकता है। यूरोप, ब्रिटेन और अन्य देशों के साथ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स से नए बाजार मिल रहे हैं। केंद्र सरकार ने PLI स्कीम, निर्यात प्रोत्साहन और अन्य योजनाओं से सेक्टर को सपोर्ट किया है। हाल ही में अमेरिका के साथ व्यापार समझौते की खबरों से टैरिफ 50% से घटाकर 18% (या इससे कम) करने की संभावना जताई गई है, जो भारतीय निर्यातकों के लिए बड़ी राहत होगी। इससे अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धा फिर से मजबूत हो सकती है। 

पर्यावरण और सस्टेनेबिलिटी की चुनौती भी टेक्सटाइल सेक्टर पर्यावरण से भी जुड़ा है। आर.के. विज जैसे विशेषज्ञों ने बताया कि भारत में फेंके गए कपड़ों का सिर्फ 12% रिसाइक्लिंग होता है। बाकी कचरा जमीन और भूजल को नुकसान पहुंचाता है। पॉलिएस्टर फैब्रिक बायोडिग्रेडेबल नहीं होता। फिलहाल कपड़े बनाने में 50% कॉटन और 50% पॉलिएस्टर इस्तेमाल होता है। अच्छी बात—गुजरात में जल्द ही पॉलिएस्टर का पहला बड़ा रिसाइक्लिंग प्लांट लगने वाला है (प्रतिदिन 100 टन क्षमता), जो सस्टेनेबल प्रोडक्शन को बढ़ावा देगा। 

आगे की राह: डाइवर्सिफिकेशन जरूरी ट्रंप टैरिफ ने भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को सबक दिया है—एक बाजार पर ज्यादा निर्भरता खतरनाक है। अब डाइवर्सिफिकेशन, हाई-क्वालिटी प्रोडक्शन, सस्टेनेबल फैब्रिक्स और नए बाजारों (यूरोप, मध्य पूर्व, अफ्रीका) पर फोकस जरूरी है। MSMEs को विशेष मदद की जरूरत है, क्योंकि वे सबसे ज्यादा प्रभावित हैं। 

यह संकट करोड़ों परिवारों के सपनों से जुड़ा है। उम्मीद है कि सरकार, उद्योग और अंतरराष्ट्रीय समझौतों से जल्द रिकवरी होगी, और टेक्सटाइल सेक्टर फिर से चमकेगा—लाखों नौकरियां बचेंगी और नई उम्मीदें जागेंगी। 
Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World 22 February 2026