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12 जून 2025 को अहमदाबाद में हुए भीषण एयर इंडिया प्लेन क्रैश ने पूरे देश को झकझोर दिया था। इस हादसे में एयर इंडिया की लंदन जाने वाली फ्लाइट AI-171 क्रैश हो गई, जिसमें विमान में सवार 242 लोगों में से सिर्फ एक यात्री बच पाया, जबकि जमीन पर भी कई लोगों की जान गई। कुल मिलाकर 260 से ज्यादा लोगों की मौत हुई। लेकिन अब इस त्रासदी के एक पीड़ित की कहानी ने नया विवाद खड़ा कर दिया है।
यह कहानी है अजय परमार की, जो विमान क्रैश के दौरान ग्राउंड पर थे। अजय उस दिन अपने मोपेड पर खाने के लिए जा रहे थे, तभी प्लेन क्रैश हुआ और आग की लपटों ने उनके मोपेड को जला दिया। अजय को 23% तक गंभीर जलन हुई। वे दो महीने तक अहमदाबाद की सिविल हॉस्पिटल में भर्ती रहे, जहां उनका इलाज चला। लेकिन अब अजय का दावा है कि एयर इंडिया ने उनकी मजबूरी का फायदा उठाकर उनके साथ विश्वासघात किया।
शादी के सिर्फ एक महीने बाद आई यह मुसीबत अजय परमार की जिंदगी उस हादसे से पहले सामान्य थी। शादी को महज एक महीना ही हुआ था। लेकिन क्रैश के बाद उनकी शारीरिक अक्षमता इतनी बढ़ गई कि उनकी पत्नी भी उन्हें छोड़कर चली गई। आज अजय बेरोजगार हैं, कोई आय का स्रोत नहीं है। इलाज और दर्द के बीच वे संघर्ष कर रहे हैं।
"मोपेड के बिल के बहाने फुल एंड फाइनल सेटलमेंट पर साइन कराई" अजय का सबसे बड़ा आरोप यह है कि अस्पताल में भर्ती होने के दौरान एयर इंडिया के प्रतिनिधियों ने उनके पास दस्तावेज लाए। उन्होंने बताया कि दस्तावेज सिर्फ उनके जले हुए मोपेड के खर्च के बिल से जुड़े हैं। लेकिन बाद में पता चला कि वे "फुल एंड फाइनल सेटलमेंट" के कागज थे, जिसमें अजय ने भविष्य में कोई कानूनी कार्रवाई न करने की सहमति दी।
अजय कहते हैं, "मुझे दस्तावेज समझ नहीं आए। वकील नहीं था, परिवार के सदस्य भी नहीं थे। दबाव में साइन करा ली गई।" कंपनी ने उन्हें 5 लाख रुपये दिए, लेकिन अजय का कहना है कि यह रकम उनके स्थायी नुकसान, भविष्य की कमाई और शारीरिक पीड़ा के मुकाबले बहुत कम है। अब तक उन्हें 25 हजार रुपये कैश और 25 लाख रुपये (मेडिकल और कंपेंसेशन के तौर पर) मिले हैं, लेकिन यह पर्याप्त नहीं।
"5 लाख लौटा दूंगा, लेकिन न्याय चाहिए" अजय ने भावुक होकर कहा, "म��ं 5 लाख रुपये वापस करने को तैयार हूं, लेकिन मुझे न्याय चाहिए। एयर इंडिया ने मेरे साथ विश्वासघात किया है। मुझे रोजगार चाहिए, क्योंकि आज मेरे पास कोई काम नहीं है।" उनका दावा है कि कंपनी ने उनकी कमजोर हालत का फायदा उठाया और कायम रहने वाले कानूनी हक छीनने की कोशिश की।
क्या कहते हैं विशेषज्ञ और कानूनी पक्ष? ऐसे मामलों में पीड़ितों को अक्सर कम मुआवजा देकर "फुल एंड फाइनल" सेटलमेंट करा लिया जाता है, ताकि आगे मुकदमा न हो। लेकिन अगर दस्तावेज दबाव या धोखे से साइन कराए गए हों, तो अदालत में उन्हें चुनौती दी जा सकती है। अजय जैसे पीड़ितों के लिए यह लड़ाई न सिर्फ मुआवजे की है, बल्कि सम्मान और न्याय की भी है।
यह घटना एयर इंडिया की जिम्मेदारी पर सवाल उठाती है। एक तरफ कंपनी हादसे के बाद मुआवजा देने का दावा करती है, वहीं दूसरी तरफ पीड़ितों का आरोप है कि प्रक्रिया पारदर्शी नहीं रही। अजय परमार की यह आवाज अब कई अन्य पीड़ितों के लिए प्रेरणा बन सकती है, जो चुपचाप सह रहे हैं।
क्या एयर इंडिया इस मामले में स्पष्टिकरण देगी? क्या अजय को न्याय मिलेगा? समय बताएगा। लेकिन फिलहाल यह कहानी याद दिलाती है कि बड़ी त्रासदियों में छोटे-छोटे पीड़ित भी अक्सर अनदेखे रह जाते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 21th Feb 2026