देश में न्यू इंडिया का नारा लग रहा है, विजन २०४७ की बातें हो रही हैं, और हर तरफ आत्मनिर्भर भारत की हुंकार गूंज रही है। ऐसे में गलगोटिया यूनिवर्सिटी ने एक ऐसा कमाल कर दिखाया कि पूरी दुनिया ठहाके मारकर हंस पड़ी। एक चाइनीज रोबोट डॉग को 'ओरियन' नाम देकर, ३५० करोड़ के निवेश का ढोल पीटकर, और 'हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस ने डेवलप किया' कहकर पेश कर दिया। जैसे कोई बच्चा पड़ोसी के खिलौने को घर लाकर कहे—'ये मैंने बनाया है, देखो कितना क्यूट है!'
प्रोफेसर नेहा सिंह मैडम, जो कम्युनिकेशन की टीचर हैं, कैमरे के सामने खड़ी हुईं। आत्मविश्वास ऐसा कि बीजेपी के टॉप स्पोक्सपर्सन भी शरमा जाएं। “ये ओरियन है... ये हमारे सेंटर ऑफ एक्सीलेंस में डेवलप हुआ है... ये काफी नॉटी भी है!” कहते हुए रोबोट को प्यार से देख रही थीं, जैसे मां अपने बच्चे को देखती है। लेकिन इंटरनेट की दुनिया में बच्चा जल्दी बड़ा हो जाता है—लोगों ने तुरंत पहचान लिया कि ये तो यूनिट्री गो२ है, चीन की कंपनी का रेडीमेड प्रोडक्ट, जो २-३ लाख में अमेजन-फ्लिपकार्ट पर मिल जाता है।
फिर क्या था—वायरल, ट्रोल, मीम्स, अंतरराष्ट्रीय मीडिया तक पहुंच गया मामला। गलगोटिया को AI इम्पैक्ट समिट २०२६ से बाहर का रास्ता दिखाया गया। स्टॉल खाली करवाया गया, बिजली काट दी गई। यूनिवर्सिटी ने डैमेज कंट्रोल मोड ऑन किया—
प्रोफेसर नेहा सिंह को 'ओवर-एन्थुजियास्टिक' और 'इल-इनफॉर्म्ड' घोषित कर दिया। कहा गया—“हमने कभी क्लेम नहीं किया कि हमने बनाया।” लेकिन वीडियो तो मौजूद है ना! मैडम ने सफाई दी—“शायद मैंने क्लियरली नहीं कहा... एनर्जी ज्यादा थी... इंटेंट समझा नहीं गया।” अरे मैडम, इंटेंट तो क्लियर था—एडमिशन बढ़ाने के लिए थोड़ा 'मेक इन इंडिया' का तड़का लगाना था।
हास्य कवि संपत सरल जी ने ठीक कहा था—**“मोदीजी ने भारत को ये सिखाया है कि झूठ बोलो तब भी विजन बड़ा होना चाहिए।”** गलगोटिया ने इसे शाब्दिक अर्थों में ले लिया। चाइनीज रोबोट को इन-हाउस इनोवेशन बताकर न्यू इंडिया का प्रतिनिधि चेहरा बन गईं नेहा सिंह मैडम। कॉन्फिडेंस देखकर तो लगा कि ये मैडम बीजेपी की प्रेस कॉन्फ्रेंस संभाल सकती हैं। मीडिया से बहस में जीत सकती हैं। रिपोर्टर को आंखें लाल करके डांट सकती हैं—“तुमने तोड़ा-मरोड़ा है! मैं तो मोदीजी के विजन के हिसाब से न्यू इंडिया बना रही हूं!”
कल्पना कीजिए—भविष्य में कोई चोर ताला तोड़ते पकड़ा जाए। रिपोर्टर माइक घुसेड़े तो चोर डपटकर बोले—“चुप बे! तोड़ना-मरोड़ना तुम लोगों का काम है। मैं तो आत्मनिर्भर भारत बना रहा हूं। ये ताला तो मैंने इम्पोर्ट किया था, लेकिन विजन तो मेरा है!”
नेहा सिंह मैडम का यह तेवर देखकर लगता है कि उन्हें तुरंत प्रमोशन मिलना चाहिए। सूचना प्रसारण मंत्रालय में सलाहकार? नहीं-नहीं, सीधे प्रवक्ता! क्योंकि झूठ को भी इतने आत्मविश्वास से बोलना सीखना पड़ता है। जब यूनिवर्सिटी ने उन्हें 'बलि का बकरा' बना दिया, तब भी मैडम ने हार नहीं मानी। लिंक्डइन पर 'ओपन टू वर्क' डाल दिया—मतलब अब वो उपलब्ध हैं न्यू इंडिया के लिए। शायद अगला टारगेट DRDO हो, जहां चाइनीज ड्रोन को 'स्वदेशी' बताकर प्रेजेंटेशन दें।
मीडिया के अच्छे दिन आ गए हैं। पहले जहां रिपोर्टर सवाल पूछते थे, अब वो भीगी बिल्ली बनकर खड़े रहते हैं। मैडम आंखें लाल करके देखती हैं, और रिपोर्टर सोचते हैं—“शायद हमने ही तोड़ा-मरोड़ा होगा।” यह है न्यू इंडिया का असली आत्मविश्वास—झूठ बोलो, पकड़े जाओ, फिर भी डटे रहो। क्योंकि विजन बड़ा होना चाहिए।
अब सवाल ये है—क्या नेहा सिंह मैडम को जल्द ही कोई बड़ा ओहदा मिलेगा? क्योंकि देश को ऐसे कॉन्फिडेंट चेहरों की जरूरत है, जो हार मानने से इनकार करें। चाइनीज रोबोट हो या चाइनीज ऐप—सबको 'मेक इन इंडिया' का ठप्पा लगाकर पेश कर दें। और अगर पकड़े जाएं तो कह दें—“ये प्रोपगैंडा है! हम तो सिर्फ स्टूडेंट्स के माइंड बना रहे हैं।” वाह रे न्यू इंडिया! जहां रोबोट चाइनीज हों, लेकिन सपने १००% स्वदेशी। जहां झूठ की भी एक 'विजन' वाली पैकेजिंग हो।
और जहां एक प्रोफेसर का 'स्लिप ऑफ टंग' पूरे देश को हंसाने के लिए काफी हो। संपत सरल जी, आपकी कविता अब पुरानी पड़ गई। अब नया संस्करण चाहिए—
“झूठ बोलो, विजन बड़ा रखो,
पकड़े जाओ तो मैडम बनकर डट जाओ।
चाइनीज माल को ओरियन कह दो,
फिर मीडिया को आंख दिखाकर कह दो— ‘तुमने तोड़ा-मरोड़ा, हम तो बस न्यू इंडिया बना रहे हैं!’
हंसें,और सोचें कि क्या यही है हमारा न्यू इंडिया?) 😏
Sajjadali Nayani ✍
Friday World 19th Feb 2026