-Friday world 13th Feb 2026
नई दिल्ली: संसद के बजट सत्र में विपक्ष के नेता राहुल गांधी के भाषण ने एक बार फिर राजनीतिक तूफान खड़ा कर दिया है। जहां एक तरफ बीजेपी ने राहुल के खिलाफ विशेषाधिकार हनन (प्रिविलेज मोशन) न लाने का फैसला किया है, वहीं प्रियंका गांधी वाड्रा ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को 'माचो मैन' कहकर तीखा हमला बोला है। यह घटनाक्रम लोकसभा में बजट चर्चा के दौरान राहुल के आरोपों से शुरू हुआ, जो अब सियासी जंग में बदल चुका है। आइए विस्तार से समझते हैं कि क्या हुआ, क्यों हुआ और आगे क्या हो सकता है।
राहुल गांधी का 'धमाकेदार भाषण: क्या थे आरोप? बुधवार को लोकसभा में बजट पर बोलते हुए राहुल गांधी ने मोदी सरकार पर जमकर हमला किया। उन्होंने भारत-अमेरिका ट्रेड डील को लेकर सवाल उठाए और इसे 'राष्ट्रीय हितों के खिलाफ' करार दिया। राहुल ने जेफरी एपस्टीन फाइल्स का जिक्र किया, जो अमेरिकी सेक्स ट्रैफिकिंग स्कैंडल से जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि इन फाइलों में कुछ नामों का उल्लेख है, जो भारत की सत्ता के करीब हैं। इसके अलावा, राहुल ने अनिल अंबानी और गौतम अदानी से जुड़े मामलों का हवाला दिया। उन्होंने केंद्रीय मंत्री हरदीप सिंह पुरी पर भी आरोप लगाए, कहते हुए कि ट्रेड डील में 'क्रोनी कैपिटलिज्म' का खेल चल रहा है।
राहुल का यह भाषण संसद में लंबे गतिरोध के बाद आया, जहां विपक्ष लगातार सरकार से जवाब मांग रहा था। उनके शब्दों ने सत्ता पक्ष को झकझोर दिया, और तुरंत ही बीजेपी सांसदों ने हंगामा शुरू कर दिया। संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू ने राहुल के आरोपों को 'निराधार' बताते हुए कहा, "ये आरोप बिना सबूत के लगाए गए हैं। इन्हें संसद की कार्यवाही से हटाया जाएगा।" रिजिजू ने जोर देकर कहा कि राहुल के भाषण की 'गलत बातें' रिकॉर्ड से मिटा दी जाएंगी, क्योंकि वे 'ऑथेंटिकेटेड' नहीं हैं।
बीजेपी का यू-टर्न: प्रिविलेज मोशन क्यों नहीं? शुरुआत में खबरें आईं कि बीजेपी राहुल के खिलाफ प्रिविलेज मोशन लाएगी, जो संसद में गंभीर मामलों के लिए इस्तेमाल होता है। लेकिन गुरुवार को बीजेपी सांसद निशिकांत दुबे ने साफ किया कि कोई प्रिविलेज मोशन नहीं लाया जा रहा। उन्होंने कहा, "हमने राहुल गांधी के खिलाफ मूल प्रस्ताव (सबस्टैंटिव मोशन) का नोटिस दिया है, जिसमें कार्रवाई की मांग की गई है।" दुबे ने राहुल पर 'राष्ट्र को गुमराह करने' का आरोप लगाते हुए कहा कि उन्हें आजीवन चुनाव लड़ने से रोका जाना चाहिए।
सरकारी सूत्रों के मुताबिक, प्रिविलेज मोशन न लाने का फैसला इसलिए लिया गया क्योंकि सरकार संसदीय बहस के जरिए मुद्दे को सुलझाना चाहती है। हालांकि, राहुल के भाषण के कुछ हिस्सों को रिकॉर्ड से हटाने की प्रक्रिया जारी है। बीजेपी चीफ व्हिप संजय जायसवाल ने भी 'आपत्तिजनक हिस्सों' को हटाने की मांग की है। यह फैसला बीजेपी की रणनीति का हिस्सा लगता है – सख्ती दिखाते हुए भी विपक्ष को ज्यादा तूल न देना।
प्रियंका गांधी का तीखा हमला: 'माचो मैन' का ताना इस पूरे विवाद में कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी वाड्रा ने तीखी प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, "कुछ लोग खुद को माचो मैन समझते हैं, इसलिए उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं होनी चाहिए।" प्रियंका ने सरकार पर तंज कसते हुए कहा कि राहुल ने जो आरोप लगाए, वे सच्चाई पर आधारित हैं और सरकार उन्हें दबाना चाहती है। उन्होंने मीडिया से बातचीत में जोर देकर कहा, "राहुल ने संसद में सवाल उठाए हैं, जो जनता के हित में हैं। सरकार जवाब देने की बजाय दमन कर रही है।"
प्रियंका की यह टिप्पणी सोशल मीडिया पर वायरल हो गई है। कांग्रेस कार्यकर्ताओं ने इसे 'मोदी सरकार की पोल खोल' करार दिया। प्रियंका ने आगे कहा, "बीजेपी डर गई है क्योंकि राहुल के आरोपों में दम है। प्रिविलेज मोशन न लाना उनका यू-टर्न है।" उनकी यह प्रतिक्रिया कांग्रेस की रणनीति को दर्शाती है – हमले को हमले से जवाब देना।
संसद में बढ़ती सियासी गर्मी: राहुल का मीडिया पर स्नैप विवाद यहीं नहीं थमा। संसद के बाहर मीडिया से बात करते हुए राहुल गांधी ने पत्रकारों पर ही भड़क उठे। उन्होंने कहा, "आज का कोड वर्ड क्या है? कल 'ऑथेंटिकेट' था, आज 'प्रिविलेज' है। आप बीजेपी के इशारे पर काम कर रहे हैं? थोड़ा ऑब्जेक्टिव रहिए, देश के साथ अन्याय मत करिए।" राहुल की यह टिप्पणी मीडिया की स्वतंत्रता पर सवाल उठाती है और विपक्ष की फ्रस्टेशन को दिखाती है।
कांग्रेस के महासचिव केसी वेणुगोपाल ने भी कहा, "हमें किसी मोशन से फर्क नहीं पड़ता। अगर सरकार हमें फांसी भी देना चाहे, तो हम तैयार हैं।" यह बयान कांग्रेस की आक्रामकता को दर्शाता है।
क्या है प्रिविलेज मोशन और सबस्टैंटिव मोशन? समझने के लिए बता दें कि प्रिविलेज मोशन संसद में सदस्यों के विशेषाधिकारों के हनन पर लाया जाता है, जो गंभीर होता है और सजा तक हो सकती है। वहीं, सबस्टैंटिव मोशन एक सामान्य प्रस्ताव है, जिसमें चर्चा और फैसला होता है। बीजेपी ने प्रिविलेज से बचकर सबस्टैंटिव का रास्ता चुना, जो कम कठोर है लेकिन मुद्दे को जिंदा रखता है।
आगे क्या? संसद में जारी रहेगा टकराव यह विवाद बजट सत्र को प्रभावित कर सकता है। विपक्ष ट्रेड डील पर बहस की मांग कर रहा है, जबकि सरकार आरोपों को निराधार बता रही है। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा 2026 के चुनावों तक गूंजेगा। राहुल और प्रियंका की आक्रामकता कांग्रेस को मजबूत कर रही है, जबकि बीजेपी इसे 'विपक्ष की हताशा' बता रही है।
कुल मिलाकर, यह घटना भारतीय राजनीति की गर्माहट को दिखाती है, जहां आरोप-प्रत्यारोप संसद से सड़क तक पहुंच गए हैं। प्रियंका का 'माचो मैन' तंज अब सियासी बहस का नया हथियार बन सकता है। क्या सरकार राहुल के आरोपों का जवाब देगी या चुप्पी साधेगी? समय बताएगा।
Sajjadali Nayani ✍
Friday world 13th Feb 2026