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Tuesday, 24 March 2026

ट्रंप के शांति दावों पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया: कच्चे तेल के दाम फिर 103 डॉलर के पार, बाजार में उथल-पुथल

ट्रंप के शांति दावों पर ईरान की तीखी प्रतिक्रिया: कच्चे तेल के दाम फिर 103 डॉलर के पार, बाजार में उथल-पुथल-Friday World March 24,2026 
लंदन/न्यूयॉर्क, 24 मार्च 2026 – अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के “ईरान के साथ उत्पादक बातचीत” और शांति समझौते की संभावना वाले दावों से सोमवार को कच्चे तेल की कीमतों में भारी गिरावट आई थी, लेकिन ईरान की तुरंत नकारात्मक प्रतिक्रिया के बाद मंगलवार सुबह एशियाई बाजारों में कीमतें फिर से उछल गईं। 

ब्रेंट क्रूड (Brent Crude) मंगलवार सुबह 3.75% बढ़कर 103.69 अमेरिकी डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गया, जबकि वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) भी ऊपर चढ़ गया। इससे पहले सोमवार को ट्रंप के बयान के बाद ब्रेंट में 10-14% तक की भारी गिरावट दर्ज की गई थी और कीमत 96 डॉलर प्रति बैरल तक गिर गई थी। 

क्या कहा था ट्रंप ने? 

सोमवार सुबह ट्रंप ने अपने ट्रुथ सोशल पोस्ट में लिखा था: 

“मैं खुशी से बताना चाहता हूं कि पिछले दो दिनों में अमेरिका और ईरान के बीच बहुत अच्छी और उत्पादक बातचीत हुई है। हम मध्य पूर्व में शत्रुता को पूरी तरह समाप्त करने की दिशा में आगे बढ़ रहे हैं। बातचीत इस हफ्ते भी जारी रहेगी।” 

ट्रंप ने यह भी कहा कि उन्होंने ईरान की ऊर्जा सुविधाओं पर हमले को पांच दिनों के लिए टाल दिया है। उनके इस बयान से निवेशकों में शांति की उम्मीद जगी और तेल की कीमतें तेजी से गिर गईं। 

ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया ट्रंप के दावे सामने आते ही ईरान ने उन्हें सिरे से खारिज कर दिया। 

- ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता एस्माइल बग़ई ने कहा कि अमेरिका के साथ कोई बातचीत नहीं हो रही है। 

- ईरानी संसद के स्पीकर मोहम्मद बाग़ेर घालिबाफ ने ट्रंप को “झूठ बोलने” का आरोप लगाते हुए कहा कि यह बयान तेल बाजार को नियंत्रित करने और अमेरिका-इजरायल को “कीचड़” से निकालने की कोशिश है।

 - ईरान ने स्पष्ट किया कि होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने या युद्ध समाप्त करने की शर्तें नहीं बदली हैं। 

ईरान के इन बयानों से बाजार में फिर अनिश्चितता फैल गई और तेल की कीमतें तेजी से उछल पड़ीं। 

तेल बाजार में क्यों हो रही है यह उथल-पुथल? ईरान-इजरायल-अमेरिका संघर्ष शुरू होने के बाद से तेल की कीमतें बहुत अस्थिर हो गई हैं:

 - संघर्ष से पहले ब्रेंट क्रूड करीब 70-80 डॉलर प्रति बैरल था। 

- युद्ध के चरम पर यह 119 डॉलर तक पहुंच गया।

 - ट्रंप के “शांति बातचीत” वाले बयान से 10-14% गिरावट आई। 

- ईरान की नकारात्मक प्रतिक्रिया से फिर 3-4% की बढ़ोतरी। 

विश्लेषकों का कहना है कि होर्मुज स्ट्रेट (जिससे विश्व के 20% तेल व्यापार गुजरता है) पर ईरान की धमकी अभी भी बनी हुई है। अगर स्ट्रेट बंद हुआ तो कीमतें आसमान छू सकती हैं। 

 गोल्डमैन सैक्स और अन्य विशेषज्ञों की राय 

- गोल्डमैन सैक्स ने अपनी भविष्यवाणी बढ़ाते हुए कहा कि मार्च-अप्रैल में ब्रेंट क्रूड औसतन 110 डॉलर पर रह सकता है।

 - कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि अगर युद्ध लंबा खिंचा तो कीमतें 120-130 डॉलर तक जा सकती हैं। 

- वहीं, अगर कोई ठोस शांति समझौता हुआ तो कीमतें 80-90 डॉलर तक गिर सकती हैं। 

 भारत पर क्या असर? भारत दुनिया का तीसरा सबसे बड़ा तेल आयातक देश है। तेल की कीमतों में उतार-चढ़ाव सीधे पेट्रोल-डीजल, एलपीजी और परिवहन लागत पर असर डालता है। 

- हाल के दिनों में भारत ने वैकल्पिक स्रोतों (अमेरिका, रूस, सऊदी अरब आदि) से तेल खरीद बढ़ाया है। 

- लेकिन होर्मुज स्ट्रेट की अनिश्चितता भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए बड़ी चुनौती बनी हुई है। 

- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में कहा था कि सरकार स्थिति पर नजर रखे हुए है और वैकल्पिक आपूर्ति के प्रयास तेज किए जा रहे हैं। 

 आगे क्या हो सकता है? बाजार अब ट्रंप और ईरान के अगले बयानों पर नजर टिकाए हुए है। अगर ट्रंप और ईरान के बीच कोई वास्तविक बातचीत शुरू हुई तो कीमतें गिर सकती हैं। लेकिन ईरान की सख्ती और होर्मुज स्ट्रेट पर उसकी धमकी बनी रही तो तेल महंगा रह सकता है। 

ट्रंप के शांति दावों से सोमवार को तेल सस्ता हुआ, लेकिन ईरान की तीखी प्रतिक्रिया ने मंगलवार को कीमतों को फिर 103 डॉलर के पार पहुंचा दिया। यह घटनाक्रम दिखाता है कि मध्य पूर्व का संघर्ष कितना संवेदनशील है और तेल बाजार पर उसका कितना बड़ा असर पड़ रहा है।

 निवेशक, उपभोक्ता और सरकारें अब इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि क्या ट्रंप और ईरान के बीच कोई ठोस प्रगति होती है या फिर युद्ध और बढ़ता है। फिलहाल अनिश्चितता बनी हुई है और तेल की कीमतें उतार-चढ़ाव भरी राह पर चल रही हैं। 

Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 24,2026