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Tuesday, 24 March 2026

उत्तर कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं – ह्वासोंग-18 और ह्वासोंग-17 अब अमेरिकी मुख्यभूमि को सीधा खतरा!

उत्तर कोरिया के पास अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलें हैं – ह्वासोंग-18 और ह्वासोंग-17 अब अमेरिकी मुख्यभूमि को सीधा खतरा!
-Friday World March 24,2026
प्योंगयांग– उत्तर कोरिया ने एक बार फिर दुनिया को चौंकाने वाली ताकत का प्रदर्शन किया है। उसके पास अब ऐसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) हैं जो अमेरिका के किसी भी शहर – वाशिंगटन, न्यूयॉर्क, लॉस एंजेलिस या सैन फ्रांसिस्को – तक आसानी से पहुंच सकती हैं। किम जोंग उन की सेना के पास ह्वासोंग-15, ह्वासोंग-17, ह्वासोंग-18 और नवीनतम ह्वासोंग-19 जैसी मिसाइलें हैं, जिनकी रेंज 13,000 से 15,000 किलोमीटर तक बताई जाती है। 

यह कोई अनुमान नहीं, बल्कि वास्तविकता है। हाल के वर्षों में उत्तर कोरिया ने इन मिसाइलों का बार-बार सफल परीक्षण किया है और अब इन्हें परमाणु हथियारों से लैस करने की क्षमता भी विकसित कर ली है। 

ह्वासोंग सीरीज: उत्तर कोरिया की ‘गेम चेंजर’ मिसाइलें 

- *ह्वासोंग-15: 2017 में पहला सफल परीक्षण। अनुमानित रेंज 13,000 किमी से ज्यादा। यह मिसाइल अमेरिका की पूरी मुख्यभूमि को कवर कर सकती है। 

- ह्वासोंग-17: ‘मॉन्स्टर मिसाइल’ के नाम से मशहूर। रेंज 15,000 किमी से अधिक। यह MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) क्षमता वाली है, यानी एक मिसाइल में कई परमाणु वारहेड लगाकर अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला किया जा सकता है। 

- ह्वासोंग-18: ठोस ईंधन वाली पहली ICBM। 2023 में परीक्षण शुरू। ठोस ईंधन होने के कारण इसे लॉन्च करने में बहुत कम समय लगता है और इसे जल्दी तैयार किया जा सकता है। रेंज 15,000 किमी। यह मिसाइल अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को चकमा देने में ज्यादा सक्षम मानी जाती है। 

- ह्वासोंग-19 और ह्वासोंग-20: हाल के वर्षों में विकसित। ये और भी शक्तिशाली हैं और MIRV तकनीक से लैस हो सकती हैं। 

ये सभी मिसाइलें रोड-मोबाइल हैं, यानी ट्रांसपोर्टर पर घूम-घूमकर लॉन्च की जा सकती हैं। इससे उन्हें दुश्मन के सैटेलाइट या जासूसी से बचाना आसान हो जाता है। 

 उत्तर कोरिया के पास कुल कितनी मिसाइलें और परमाणु हथियार? सटीक संख्या सार्वजनिक नहीं है, क्योंकि उत्तर कोरिया अपनी सैन्य क्षमता को गुप्त रखता है। लेकिन अंतरराष्ट्रीय विशेषज्ञों और खुफिया एजेंसियों के अनुमान इस प्रकार हैं:

 - बैलिस्टिक मिसाइलों की कुल संख्या: सैकड़ों (शॉर्ट रेंज, मीडियम रेंज और ICBM मिलाकर)। 

- ICBMs (अमेरिका तक पहुंचने वाली): वर्तमान में 10 से कम से लेकर कुछ दर्जन तक अनुमानित। 2035 तक यह संख्या 50 तक पहुंच सकती है।

 - परमाणु हथियार: लगभग 50 से 100 के बीच। कुछ अनुमान कहते हैं कि पर्याप्त fissile material (प्लूटोनियम और यूरेनियम) उपलब्ध है, जिससे हर साल 10-20 नए हथियार बनाए जा सकते हैं।

 उत्तर कोरिया अब परमाणु हथियारों को छोटा और हल्का बनाने (miniaturization) में भी सफल हो चुका है, ताकि इन्हें मिसाइलों पर आसानी से फिट किया जा सके। 

 क्यों खतरनाक है यह क्षमता? 

1. ठोस ईंधन वाली मिसाइलें: पुरानी लिक्विड फ्यूल मिसाइलों को लॉन्च करने में घंटों लगते थे। नई ठोस ईंधन वाली मिसाइलें लगभग बिना चेतावनी के लॉन्च हो सकती हैं। 

2. MIRV तकनीक: एक मिसाइल से कई वारहेड अलग-अलग लक्ष्यों पर हमला कर सकते हैं। इससे मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भेदना बहुत मुश्किल हो जाता है।

 3. मोबाइल लॉन्चर: मिसाइलों को जंगल, सुरंगों या सड़कों पर घुमाया जा सकता है, जिससे उन्हें नष्ट करना चुनौतीपूर्ण है। 

4. दूसरे देशों के लिए सबक: किम जोंग उन बार-बार कह चुके हैं कि ईरान, लीबिया और इराक की तरह कमजोर होने पर उनका भी वही हश्र होता। इसलिए परमाणु और मिसाइल कार्यक्रम को “अपरिवर्तनीय” बना दिया गया है। 

 वैश्विक चिंता और भविष्य अमेरिका और उसके सहयोगी देश उत्तर कोरिया की इस बढ़ती क्षमता को गंभीर खतरा मानते हैं। अमेरिका ने THAAD, पैट्रियट और GBI जैसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम तैनात किए हैं, लेकिन विशेषज्ञों का मानना है कि उत्तर कोरिया की नई मिसाइलें इन सिस्टम को भी चुनौती दे सकती हैं। 

दूसरी ओर, उत्तर कोरिया का कहना है कि यह सब “रक्षा” के लिए है। किम जोंग उन की रणनीति साफ है – मजबूत परमाणु निरोध (nuclear deterrence) के बिना कोई भी देश सुरक्षित नहीं रह सकता। 

उत्तर कोरिया अब अमेरिका तक पहुंचने वाली मिसाइलों का मालिक बन चुका है। ह्वासोंग-17 और ह्वासोंग-18 जैसी मिसाइलें न सिर्फ रेंज में शक्तिशाली हैं, बल्कि उनकी गति, छुपने की क्षमता और MIRV तकनीक उन्हें और भी खतरनाक बनाती है। अनुमान के मुताबिक 50 से 100 परमाणु हथियारों के साथ उत्तर कोरिया की यह ताकत दुनिया की सुरक्षा व्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है। 

किम जोंग उन की सरकार इसे “अस्तित्व की गारंटी” मानती है, जबकि दुनिया इसे “अस्थिरता का स्रोत”। भविष्य में उत्तर कोरिया की मिसाइल और परमाणु क्षमता और बढ़ेगी – यह लगभग तय है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 24,2026