प्योंगयांग, 24 मार्च 2026– उत्तर कोरिया के तानाशाह किम जोंग उन ने एक बार फिर दुनिया को अपना कड़ा संदेश दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर हाल के भीषण हमलों ने साबित कर दिया कि उनका देश परमाणु हथियारों को कभी नहीं छोड़ने का फैसला बिल्कुल सही था। किम के मुताबिक, आज के इस हिंसक और अनिश्चित विश्व में केवल मजबूत सैन्य ताकत ही किसी राष्ट्र को बचाती है– न बातचीत, न समझौते, न प्रतिबंध।
सोमवार को प्योंगयांग में सुप्रीम पीपुल्स असेंबली (उत्तर कोरिया की संसद) को संबोधित करते हुए किम जोंग उन ने लंबा भाषण दिया। मंगलवार को सरकारी मीडिया के माध्यम से जारी इस भाषण में उन्होंने ईरान संकट को “लाइव उदाहरण” बताते हुए अपनी परमाणु नीति को और मजबूत करने का ऐलान किया।
किम का आग बबूला संदेश: “परमाणु शक्ति = अस्तित्व की गारंटी” किम ने साफ-साफ कहा:
- “अमेरिका दुनिया भर में जो आतंकवादी और आक्रामक कार्रवाई कर रहा है, उससे साफ पता चलता है कि हमारा परमाणु कार्यक्रम बढ़ाना गलत नहीं था।”
- “दुश्मनों की मीठी-मीठी बातों में आकर परमाणु हथियार छोड़ना हमारी सबसे बड़ी भूल होती। आज उत्तर कोरिया किसी भी खतरे से पूरी तरह सुरक्षित है।”
- “जरूरत पड़ी तो हम खुद दूसरों के लिए खतरा बन सकते हैं। किसी देश की प्रतिष्ठा, हित और जीत केवल सबसे मजबूत ताकत से ही तय होती है।”
उन्होंने 2019 में डोनाल्ड ट्रंप के साथ हुई बातचीत के टूटने के बाद परमाणु हथियार बढ़ाने के फैसले को अपना “सबसे सही और दूरदर्शी कदम” बताया। किम ने घोषणा की कि अब वे और ज्यादा परमाणु हथियार, लंबी दूरी की मिसाइलें, पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली मिसाइलें और आधुनिक डिलीवरी सिस्टम बनाएंगे।
दक्षिण कोरिया को खुली चुनौती और चेतावनी भाषण का एक बड़ा हिस्सा पड़ोसी दक्षिण कोरिया पर केंद्रित रहा। किम ने सियोल को “सबसे बड़ा और सबसे शत्रुतापूर्ण दुश्मन” करार देते हुए कहा:
- “हम दक्षिण कोरिया को पूरी तरह नजरअंदाज करेंगे और उसे दुश्मन देश का दर्जा देंगे।”
- “अगर सियोल कोई भी ऐसा कदम उठाएगा जो हमारी सुरक्षा को नुकसान पहुंचाए, तो उसे बिना किसी दया के क्रूर सजा दी जाएगी।”
यह बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर कोरिया पहले ही दक्षिण कोरिया को “मुख्य शत्रु” घोषित कर चुका है।
आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था + अजेय परमाणु शक्ति = किम का नया फॉर्मूला किम जोंग उन ने अपने नागरिकों से अपील की कि वे **आत्मनिर्भर अर्थव्यवस्था** बनाने पर पूरा ध्यान दें। उन्होंने कहा कि परमाणु हथियारों की वजह से देश अब सुरक्षित है, इसलिए अब संसाधनों का एक बड़ा हिस्सा आर्थिक विकास, नए पांच वर्षीय योजना और लोगों के जीवन स्तर सुधारने पर लगाया जाएगा।
क्यों मानता है उत्तर कोरिया कि परमाणु हथियार जरूरी हैं? उत्तर कोरिया लंबे समय से दो ऐतिहासिक उदाहरण देता रहा है – लीबिया के गद्दाफी और इराक के सद्दाम हुसैन। किम का तर्क है कि अगर इन दोनों के पास परमाणु हथियार होते, तो उनका अंत इस तरह नहीं होता।
2018 में सिंगापुर में ट्रंप-किम की ऐतिहासिक मुलाकात हुई थी। 2019 में वियतनाम के हनोई में दूसरी बैठक हुई, लेकिन शर्तों पर सहमति न बनने से बातचीत टूट गई। उसके बाद उत्तर कोरिया ने साफ कह दिया – “अमेरिका पर भरोसा नहीं किया जा सकता। सुरक्षा के लिए अपनी ताकत खुद बढ़ानी होगी।”
अब किम का रुख और सख्त हो गया है। उन्होंने कहा कि बातचीत तभी संभव है जब अमेरिका उत्तर कोरिया को आधिकारिक तौर पर परमाणु शक्ति के रूप में मान्यता दे और अपनी “शत्रुतापूर्ण नीति” छोड़े।
ईरान संकट ने किम को और आत्मविश्वास दिया हाल ही में अमेरिका और इजरायल द्वारा ईरान पर किए गए सैन्य हमलों ने उत्तर कोरिया के लिए एक मजबूत सबक बन गया है। किम ने इसे “अमेरिकी आक्रामकता का जीता-जागता प्रमाण” बताया। विश्लेषकों का मानना है कि ईरान की घटना ने किम को यह विश्वास दिला दिया है कि परमाणु हथियार न होने पर कोई भी देश अमेरिका के सामने असहाय है।
वैश्विक प्रभाव और चुनौती किम जोंग उन का यह भाषण उत्तर कोरिया की लंबे समय से चली आ रही रणनीति को और मजबूत करता है – परमाणु निरोध को अपरिवर्तनीय और स्थायी बनाना। उन्होंने साफ कर दिया है कि अब कोई भी समझौता परमाणु हथियार छोड़ने पर नहीं हो सकता।
दुनिया के लिए यह एक नई बड़ी चुनौती है। उत्तर कोरिया की परमाणु क्षमता लगातार बढ़ रही है और किम इसे “स्थायी और अपरिवर्तनीय” बता चुके हैं। अंतरराष्ट्रीय समुदाय अब इस बढ़ती परमाणु महत्वाकांक्षा पर क्या रुख अपनाता है, यह देखना दिलचस्प होगा।
ईरान पर हुए हमलों ने किम जोंग उन को फिर से यह याद दिला दिया कि “ताकत से ही सुरक्षा मिलती है”। उत्तर कोरिया अब खुद को एक अजेय परमाणु शक्ति मान चुका है और इस रास्ते पर आगे बढ़ने को पूरी तरह तैयार है।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 24,2026