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Saturday, 14 March 2026

युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहत: होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 22 जहाजों को सुरक्षित निकालने की तैयारी, ईरान से मिली खास परवानगी

युद्ध के बीच भारत के लिए बड़ी राहत: होर्मुज स्ट्रेट में फंसे 22 जहाजों को सुरक्षित निकालने की तैयारी, ईरान से मिली खास परवानगी
-Friday World March 14,2026 
संघर्ष की छाया में होर्मुज जलसंधि का संकट पश्चिम एशिया में अमेरिका-इज़राइल और ईरान के बीच फरवरी 2026 के अंत से चल रहे युद्ध ने वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति पर गहरा असर डाला है। होर्मुज स्ट्रेट – जहाँ से दुनिया का 20% क्रूड ऑयल और अधिकांश LNG का परिवहन होता है – ईरानी नौसेना और IRGC द्वारा प्रभावी रूप से बंद कर दिया गया है। इस जलसंधि से गुजरने वाले जहाजों पर ड्रोन, मिसाइल और अन्य हमलों का खतरा बढ़ गया है, जिसके कारण सैकड़ों व्यापारिक जहाज फंस गए हैं। भारत के लिए यह स्थिति विशेष रूप से चिंताजनक है, क्योंकि भारत का 40% क्रूड ऑयल आयात और अधिकांश LPG/LNG इसी रास्ते से आता है।

 भारत के 22 जहाजों को सुरक्षित बाहर निकालने की तैयारी मुंबई में डायरेक्टर जनरल ऑफ शिपिंग (DGS) द्वारा तैयार सिचुएशन रिपोर्ट के अनुसार, युद्ध क्षेत्र में ऊर्जा सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण 22 जहाजों की पहचान की गई है और उन्हें सुरक्षित निकालने के लिए नौसेना के एस्कॉर्ट के साथ प्लानिंग चल रही है। इन 22 जहाजों में से 13 भारतीय ध्वज वाले हैं – जिनमें 3 LNG कैरियर, 11 LPG कैरियर और 8 क्रूड टैंकर शामिल हैं। इन जहाजों पर सैकड़ों भारतीय सीफेयरर्स (नाविक) सवार हैं, जिनकी सुरक्षा सर्वोपरि है। सरकार ईरान के साथ सीधी बातचीत कर इन जहाजों को परवानगी दिलाने के प्रयास में जुटी है। 

→ ईरान के साथ भारत की दोस्ती और सुरक्षित गुजरने की बात भारत और ईरान के बीच ऐतिहासिक दोस्ती है, जिसे युद्ध के बीच भी बनाए रखा गया है। विदेश मंत्री एस. जयशंकर और ईरानी विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन वार्ता के बाद ईरान ने भारतीय ध्वज वाले जहाजों को सुरक्षित गुजरने की अनुमति दी है। भारत में ईरान के राजदूत मोहम्मद फथाली ने कहा, “भारत हमारा मित्र है और हमने साझा हितों को ध्यान में रखकर यह कदम उठाया है।” हाल ही में दो भारतीय LPG टैंकर (जैसे शिवालिक और नंदा देवी) होर्मुज से सुरक्षित गुजरे हैं और भारत की ओर बढ़ रहे हैं। इसके अलावा एक सऊदी क्रूड लोडेड टैंकर ‘शेनलॉन्ग’ भी मुंबई पहुँच गया है, जो युद्ध के बीच पहला बड़ा सफल गुजरना है। 

→ गोदी मीडिया का ईरान विरोधी प्रचार और हकीकत आज भी कुछ मीडिया हाउस ईरान के खिलाफ जहर उगल रहे हैं और उसे आक्रामक बताते हैं, लेकिन हकीकत अलग है। ईरान ने भारत को ‘मित्र’ मानते हुए भारतीय जहाजों को अपवाद के रूप में गुजरने दिया है, जबकि अन्य देशों (खासकर अमेरिका से जुड़े) के जहाजों पर सख्ती बरती जा रही है। यह दिखाता है कि भारत की तटस्थ नीति और ईरान के साथ अच्छे संबंध काम कर रहे हैं। भारत ने ईरानी नौका कोची में मानवीय सहायता के लिए डॉक करने की अनुमति दी थी, जिसके जवाब में ईरान ने यह राहत दी है। 

→ भारतीय नाविकों की सुरक्षा और ऊर्जा सुरक्षा इन 22 जहाजों में से अधिकांश ऊर्जा से जुड़े हैं और इनमें 700 से ज्यादा भारतीय नाविक सवार हैं। युद्ध क्षेत्र में फंसे इन नाविकों के लिए सरकार लगातार मॉनिटरिंग कर रही है। एक तरफ जहाजों को निकालने के लिए नौसेना एस्कॉर्ट की बात चल रही है, तो दूसरी तरफ रूस और अन्य स्रोतों से आयात बढ़ाकर ऊर्जा सुरक्षा बनाए रखने के प्रयास जारी हैं। अगर होर्मुज स्ट्रेट लंबे समय तक बंद रहा तो ऑयल के दाम $200 प्रति बैरल तक पहुँच सकते हैं, जिसका असर भारत जैसे आयात-निर्भर देश पर बहुत भारी पड़ेगा। 

→ आगे के चुनौतियाँ और भारत की रणनीति भारत सरकार अब ईरान के साथ बातचीत जारी रख रही है ताकि बाकी जहाज भी सुरक्षित बाहर आ सकें। इस प्रक्रिया में 7 से 10 दिन लग सकते हैं, क्योंकि जहाजों को सुरक्षित रूट पर भेजना, नेवी एस्कॉर्ट और ईरानी परवानगी की प्रक्रिया जटिल है। यह घटना भारतीय व्यापारिक नौकादल के लिए बड़ा सबक है – दुनिया में भारत सबसे बड़े सीफेयरर सप्लायर में से एक है और ऐसे संघर्ष में उनकी सुरक्षा सर्वोच्च है। 

 दोस्ती की जीत – मीडिया में ईरान विरोधी जहरीला प्रचार इस संकट में भारत की तटस्थ नीति और ईरान के साथ मजबूत संबंधों ने राहत दी है। जबकि अन्य देशों के जहाज फंसे हैं, भारतीय जहाजों को सुरक्षित गुजरने का मौका मिला है। यह दिखाता है कि द्विपक्षीय दोस्ती और कूटनीति कितनी महत्वपूर्ण है। भारतीय नाविकों की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की स्थिरता के लिए सरकार के प्रयास लगातार जारी रहेंगे। 


Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 14,2026