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Tuesday, 24 March 2026

जंग लंबी खिंची तो अमेरिका और इजरायल के लिए इसे खत्म करना क्यों मुश्किल हो जाएगा? ईरान की मिसाइलें अब 4000 किमी दूर तक पहुंच रही हैं

जंग लंबी खिंची तो अमेरिका और इजरायल के लिए इसे खत्म करना क्यों मुश्किल हो जाएगा? ईरान की मिसाइलें अब 4000 किमी दूर तक पहुंच रही हैं
-Friday World March 24,2026 
         डिएगो गार्सिया हमला सब बदल गया

वाशिंगटन/तेहरान, 24 मार्च 2026 – पिछले कई हफ्तों से अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और इजरायली नेतृत्व बार-बार दावा कर रहे थे कि ईरान की सैन्य मशीनरी लगभग खत्म हो चुकी है। ट्रंप ने कहा था कि लगातार हवाई हमलों ने ईरान की कमांड संरचना को पंगु बना दिया है और अब तेहरान के पास जवाबी हमले की कोई खास क्षमता नहीं बची है। रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने भी यही स्वर दोहराया – “ईरान अब खतरे से बाहर है, संघर्ष जल्द खत्म हो जाएगा।”

 लेकिन ज़मीनी हकीकत बिल्कुल उलट है। संघर्ष कम होने की बजाय और तेज होता जा रहा है। ईरान न सिर्फ टिके हुए हैं, बल्कि अब अमेरिका-ब्रिटेन के सबसे रणनीतिक सैन्य अड्डे तक अपनी पहुंच साबित कर चुके हैं। शनिवार को हुई घटना ने पूरे परिदृश्य को बदल दिया है – ईरान ने हिंद महासागर में स्थित डिएगो गार्सिया की ओर दो बैलिस्टिक मिसाइलें दागीं। 

डिएगो गार्सिया अमेरिका-ब्रिटेन का संयुक्त सैन्य बेस है, जो ईरान से लगभग 3800-4000 किलोमीटर दूर है। पहले माना जाता था कि ईरान की मिसाइलों की मारक क्षमता 2000 किमी तक ही सीमित है। लेकिन इस हमले ने साबित कर दिया कि तेहरान की क्षमता अब इससे कहीं ज्यादा है। एक मिसाइल बीच में फेल हो गई, दूसरी को अमेरिकी युद्धपोत से रोक लिया गया, लेकिन संदेश साफ था – ईरान अब बहुत दूर तक पहुंच सकता है। 

क्यों मुश्किल हो जाएगा जंग खत्म करना? 

1. ईरान की मिसाइल क्षमता का नया प्रदर्शन डिएगो गार्सिया हमला ईरान के लिए एक बड़ा मनोवैज्ञानिक और रणनीतिक झटका नहीं, बल्कि अमेरिका-इजरायल के लिए चेतावनी है। विशेषज्ञों का कहना है कि अगर ईरान 4000 किमी दूर तक मिसाइलें दाग सकता है, तो यूरोप के कई हिस्से भी अब उसके रेंज में आ गए हैं। इससे पहले ईरान खुद को “रक्षात्मक” नीति का दावा करता था, लेकिन अब उसकी मिसाइलें इंटरमीडिएट रेंज से आगे निकल चुकी हैं। इससे अमेरिका को अपनी दूरस्थ बेस की सुरक्षा पर फिर से सोचना पड़ेगा। 

2. लंबी जंग = बढ़ती लागत और थकान अगर संघर्ष लंबा खिंचा, तो अमेरिका और इजरायल दोनों के लिए कई मोर्चे खुल जाएंगे। ईरान के पास प्रॉक्सी नेटवर्क (हिजबुल्लाह, हूती, हश्द अल-शाबी आदि) अभी भी सक्रिय है। लंबी जंग में ये गुट अमेरिकी ठिकानों और इजरायली हितों पर लगातार दबाव बनाए रख सकते हैं। ईरान की अर्थव्यवस्था प्रतिबंधों के बावजूद टिकी हुई है और उसकी मिसाइल फैक्टरियां अभी भी काम कर रही हैं। 

3. अमेरिका के लिए घरेलू और वैश्विक दबाव ट्रंप प्रशासन पहले ही “जल्द खत्म” का वादा कर चुका है। अगर जंग महीनों तक चली तो अमेरिकी टैक्सपेयर्स पर बोझ बढ़ेगा, तेल की कीमतें आसमान छू सकती हैं और मध्य पूर्व में अमेरिकी सैनिकों की मौत का खतरा बढ़ जाएगा। इजरायल पहले से ही आंतरिक राजनीतिक दबाव में है। लंबी जंग में दोनों देशों के अंदर “युद्ध थकान” (war fatigue) पैदा हो सकती है। 

4. ईरान का “असममित युद्ध” रणनीति ईरान पारंपरिक युद्ध में कमजोर है, लेकिन असममित युद्ध (asymmetric warfare) में माहिर है। बंदरगाहों पर हमले, हार्मुज स्ट्रेट को बंद करने की धमकी, साइबर अटैक और लंबी दूरी की मिसाइलें – ये सब लंबी जंग में ईरान को फायदा दे सकते हैं। डिएगो गार्सिया जैसी घटनाएं दिखाती हैं कि ईरान “लाल लाइन” पार करने से नहीं हिचकिचा रहा है। 

5. वैश्विक गठबंधनों का खेल लंबी जंग में रूस और चीन ईरान को खुलकर समर्थन दे सकते हैं – हथियार, खुफिया जानकारी और डिप्लोमैटिक कवर। इससे संघर्ष क्षेत्रीय से वैश्विक स्तर पर पहुंच सकता है। यूरोपीय देश पहले से ही चिंतित हैं क्योंकि अब ईरानी मिसाइलें उनके भी करीब पहुंच चुकी हैं। 

 वास्तविकता बनाम दावा अमेरिका-इजरायल का दावा था कि ईरान की कमांड चेन टूट चुकी है और उसके परमाणु व मिसाइल कार्यक्रम को भारी नुकसान पहुंचा है। लेकिन डिएगो गार्सिया की ओर दागी गई मिसाइलें इस दावे को कमजोर करती हैं। ईरान ने साबित किया कि उसके पास अभी भी छिपी हुई क्षमताएं हैं और वह लंबी दूरी तक हमला कर सकता है। 

विश्लेषकों का मानना है कि अगर जंग और लंबी खिंची, तो ईरान धीरे-धीरे अपनी क्षमता बढ़ाता जाएगा। उसकी मिसाइल फैक्टरियां बिखरी हुई हैं और आसानी से नष्ट नहीं हो सकतीं। साथ ही, घरेलू स्तर पर ईरानी नेतृत्व “राष्ट्रीय प्रतिरोध” का नारा देकर जनता को एकजुट रख सकता है। 

 आगे क्या? ट्रंप प्रशासन अब “डिएगो गार्सिया” घटना के बाद नई रणनीति पर विचार कर रहा है। कुछ सलाहकार सीधी बातचीत की वकालत कर रहे हैं, जबकि इजरायल ज्यादा आक्रामक कार्रवाई चाहता है। लेकिन हर नया हमला ईरान को और मजबूत जवाब देने का मौका दे रहा है। 

जंग जितनी लंबी खिंचेगी, अमेरिका और इजरायल के लिए उसे “विजय” के साथ खत्म करना उतना ही मुश्किल होता जाएगा। ईरान ने दिखा दिया है कि वह आसानी से हार मानने वाला नहीं है। डिएगो गार्सिया हमला सिर्फ एक चेतावनी है 

– अगर संघर्ष बढ़ा तो ईरान की पहुंच यूरोप तक भी जा सकती है। अब सवाल यह है कि क्या अमेरिका-इजरायल जल्दी से “एग्जिट प्लान” तैयार कर पाएंगे या फिर लंबी, थकाऊ और महंगी जंग में फंस जाएंगे।

 ईरान की बढ़ती मिसाइल क्षमता ने पूरे मध्य पूर्व और उससे आगे की सुरक्षा समीकरण बदल दिए हैं। अब शांति की राह सिर्फ सैन्य दबाव से नहीं, बल्कि कूटनीति और समझौते से ही निकल सकती है।

 Sajjadali Nayani ✍
 Friday World March 24,2026