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Tuesday, 24 March 2026

*होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय क्रू मेंबर्स भी फंसे हैं’: पीएम मोदी का राज्यसभा में बड़ा बयान – हमला और रुकावट अस्वीकार्य, कूटनीति से रास्ता निकाल रहे है

होर्मुज स्ट्रेट में भारतीय क्रू मेंबर्स भी फंसे हैं’: पीएम मोदी का राज्यसभा में बड़ा बयान – हमला और रुकावट अस्वीकार्य, कूटनीति से रास्ता निकाल रहे है
-Friday World March 24,2026 
                  फोटोग्राफ संसद Tv

नई दिल्ली, 24 मार्च 2026 – प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मंगलवार को राज्यसभा में मध्य पूर्व (वेस्ट एशिया) के चल रहे संकट पर विस्तृत संबोधन दिया। पीएम मोदी ने साफ कहा कि स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में दुनिया के कई कमर्शियल जहाज फंसे हुए हैं और उनमें बड़ी संख्या में भारतीय क्रू मेंबर्स भी शामिल हैं। उन्होंने हमलों और अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट को “अस्वीकार्य” बताते हुए जोर दिया कि भारत नागरिकों, सिविल इंफ्रास्ट्रक्चर और ऊर्जा-परिवहन संबंधी सुविधाओं पर किसी भी हमले का विरोध करता है। 

पीएम मोदी ने कहा, “कमर्शियल जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट जैसे महत्वपूर्ण अंतरराष्ट्रीय जलमार्ग में रुकावट बर्दाश्त नहीं की जा सकती। युद्ध शुरू होने के बाद होर्मुज स्ट्रेट में जहाजों का आवागमन बेहद चुनौतीपूर्ण हो गया है।” 

पीएम का संपूर्ण संदेश: चिंता, विरोध और कूटनीति प्रधानमंत्री ने राज्यसभा को बताया कि भारत सरकार विपरीत परिस्थितियों के बावजूद **संवाद और कूटनीति** के जरिए समाधान निकालने का निरंतर प्रयास कर रही है। उन्होंने कहा: 

- “हमारा प्रयास है कि जहां से भी संभव हो, तेल और गैस की सप्लाई भारत पहुंचे।” 

- “बीते कुछ दिनों में दुनिया के कई देशों से कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत पहुंचे हैं। यह प्रयास आगे भी जारी रहेगा।”

 पीएम मोदी ने यह भी याद दिलाया कि मध्य पूर्व भारत के लिए सिर्फ ऊर्जा का स्रोत नहीं है, बल्कि लगभग **एक करोड़ भारतीय** वहां काम करते हैं और कमर्शियल जहाजों पर भी भारतीय क्रू मेंबर्स की संख्या काफी अधिक है। इसलिए भारत की चिंता स्वाभाविक रूप से ज्यादा है। 

लोकसभा में दिए गए संबोधन की याद इससे एक दिन पहले सोमवार को लोकसभा में भी पीएम मोदी ने मध्य पूर्व की स्थिति को “चिंताजनक” बताया था। उन्होंने कहा था कि भारत के सामने “अप्रत्याशित चुनौतियां” हैं। युद्ध के चलते वैश्विक अर्थव्यवस्था और लोगों की आजीविका पर गंभीर असर पड़ रहा है। 

प्रधानमंत्री ने दोनों सदनों में जोर देकर कहा कि:

 - भारत ने शुरू से ही संघर्ष के खिलाफ अपनी चिंता जताई है। 

- नागरिकों, ऊर्जा और परिवहन इंफ्रास्ट्रक्चर पर हमलों का विरोध किया है। 

- कूटनीति के माध्यम से सभी पक्षों से संपर्क बनाए रखा है। 

- युद्ध के बाद से अब तक 3.75 लाख से ज्यादा भारतीयों को सुरक्षित स्वदेश लाया जा चुका है, जिनमें ईरान से करीब 1000 भारतीय शामिल हैं। 

 होर्मुज स्ट्रेट का महत्व: भारत के लिए जीवनरेखा स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया का सबसे महत्वपूर्ण जलमार्ग है, जिससे वैश्विक तेल व्यापार का लगभग **20 प्रतिशत** गुजरता है। भारत के लिए यह और भी अहम है क्योंकि: 

- हमारा बड़ा हिस्सा कच्चा तेल और गैस इसी रूट से आता है। 

- फर्टिलाइजर और अन्य जरूरी सामान भी इसी मार्ग पर निर्भर हैं। 

- युद्ध शुरू होने के बाद जहाजों का आवागमन मुश्किल हो गया है, लेकिन भारत ने कूटनीतिक प्रयासों से कुछ एलपीजी और एलएनजी टैंकरों को सुरक्षित निकाल लिया है। 

पीएम मोदी ने संसद को आश्वासन दिया कि सरकार रोजाना स्थिति की समीक्षा कर रही है और वैकल्पिक स्रोतों (अमेरिका, अर्जेंटीना, रूस आदि) से सप्लाई बढ़ाने के प्रयास तेज कर दिए गए हैं।

भारत की रणनीति: सुरक्षा, कूटनीति और तैयारी प्रधानमंत्री ने स्पष्ट किया कि भारत की प्राथमिकता तीन चीजें हैं: 

1. भारतीय नागरिकों की सुरक्षा— खाड़ी देशों में रहने वाले भारतीयों और जहाजों पर काम करने वाले क्रू मेंबर्स की। 

2. ऊर्जा सुरक्षा — तेल-गैस की निर्बाध आपूर्ति बनाए रखना। 

3. डिप्लोमेसी — सभी पक्षों (ईरान, इजरायल, अमेरिका और अन्य गल्फ देशों) से बातचीत कर तनाव कम करना और होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलना। 

उन्होंने कहा कि कठिन वैश्विक स्थिति लंबे समय तक रह सकती है, इसलिए हमें **एकजुट और सतर्क** रहना होगा। अफवाहों और मुनाफाखोरी से बचना चाहिए। 

भारत की सशक्त और संतुलित भूमिका पीएम मोदी के राज्यसभा संबोधन ने एक बार फिर साबित किया कि भारत मध्य पूर्व संकट में निष्क्रिय दर्शक नहीं, बल्कि सक्रिय और जिम्मेदार खिलाड़ी है। हमले और रुकावट को “अस्वीकार्य” बताते हुए भारत ने अपनी चिंता जताई, लेकिन साथ ही कूटनीति और संवाद पर भरोसा जताया।

 होर्मुज स्ट्रेट में फंसे भारतीय क्रू मेंबर्स की सुरक्षा और ऊर्जा आपूर्ति की निरंतरता भारत सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। प्रधानमंत्री का संदेश साफ है — चुनौतियां बड़ी हैं, लेकिन भारत तैयार है और कूटनीति से रास्ता निकालने में विश्वास रखता है। 

आने वाले दिनों में सरकार के प्रयासों से ज्यादा जहाज सुरक्षित भारत पहुंचेंगे और नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित रहेगी। संसद में प्रधानमंत्री के दोनों सदनों में दिए गए संबोधन से पूरे देश को एकजुट संदेश मिला है — शांति, सुरक्षा और कूटनीति ही समाधान है। 

Sajjadali Nayani ✍ 
Friday World March 24,2026