-Friday World March 30,2026
उत्तर कोरिया के नेता किम जोंग उन ने एक बार फिर वैश्विक तनाव के बीच देश की रक्षा क्षमता को नई मजबूती प्रदान की है। सरकारी मीडिया कोरियन सेंट्रल न्यूज एजेंसी (KCNA) के अनुसार, रविवार को उत्तर कोरिया ने उच्च-क्षमता वाले ठोस-ईंधन (सॉलिड-फ्यूल) रॉकेट इंजन का सफल ग्राउंड जेट परीक्षण किया। इस उन्नत इंजन की मदद से उत्तर कोरिया अब ऐसी मिसाइलें विकसित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है, जो अमेरिकी मुख्य भूमि को सीधे निशाना बना सकें।
किम जोंग उन ने खुद इस महत्वपूर्ण परीक्षण का निरीक्षण किया। रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए अपग्रेडेड इंजन में कंपोजिट कार्बन फाइबर सामग्री का उपयोग किया गया है, जो इसे हल्का लेकिन बेहद मजबूत बनाता है। इंजन की अधिकतम थ्रस्ट क्षमता 2,500 किलोन्यूटन (kN) मापी गई है, जो पिछले सितंबर में हुए परीक्षण (लगभग 1,971 kN) से काफी अधिक है।
रक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इंजन की शक्ति बढ़ाने का मुख्य उद्देश्य एक ही मिसाइल पर मल्टीपल वॉरहेड्स (कई स्वतंत्र रूप से लक्ष्य करने वाले हथियार) तैनात करना है। इससे अमेरिकी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को आसानी से चकमा दिया जा सकता है, क्योंकि कई वॉरहेड एक साथ अलग-अलग दिशाओं में बढ़ सकते हैं।
आतंकवादी अमेरिका-इजरायल गठजोड़ के खतरे का जवाब हाल के दिनों में किम जोंग उन ने उत्तर कोरिया की संसद में दिए भाषण में अमेरिका को वैश्विक राज्य आतंकवाद और आक्रामकता का जिम्मेदार ठहराया था। उन्होंने मध्य पूर्व की स्थिति का जिक्र करते हुए इजरायल और अमेरिका के सैन्य अभियानों को अंतरराष्ट्रीय शांति के लिए खतरा बताया।
इसी पृष्ठभूमि में यह परीक्षण हुआ है। विशेषज्ञ इसे अमेरिका-इजरायल के बढ़ते सैन्य आक्रामक रवैये के खिलाफ उत्तर कोरिया का रणनीतिक जवाब मान रहे हैं। किम जोंग उन ने परीक्षण के दौरान कहा कि यह विकास देश की रणनीतिक सैन्य शक्ति को सबसे ऊंचे स्तर पर ले जाने में महत्वपूर्ण योगदान देगा।
यह परीक्षण उत्तर कोरिया के नए पांच वर्षीय रक्षा विकास योजना का हिस्सा है, जिसका लक्ष्य रणनीतिक हमला साधनों को लगातार मजबूत करना है—खासकर परमाणु-सक्षम बैलिस्टिक मिसाइलों को।
तकनीकी उन्नति: ठोस-ईंधन इंजन की खासियतें ठोस-ईंधन वाली मिसाइलों की सबसे बड़ी ताकत यह है कि इन्हें लंबे समय तक स्टोर किया जा सकता है और जरूरत पड़ते ही तुरंत लॉन्च किया जा सकता है। तरल ईंधन वाली पुरानी मिसाइलों के मुकाबले इनकी तैयारी का समय बहुत कम होता है।
कंपोजिट कार्बन फाइबर का इस्तेमाल इंजन को हल्का बनाने के साथ-साथ उसकी ताकत बढ़ाता है। इससे मिसाइल की रेंज बढ़ती है, पेलोड क्षमता सुधरती है और मोबाइल लॉन्चर (ट्रक या रेल से लॉन्च) का उपयोग आसान हो जाता है।
रक्षा विश्लेषक डॉ. हॉन्ग मिन (कोरिया इंस्टीट्यूट फॉर नेशनल यूनिफिकेशन) का कहना है कि यह विकास उत्तर कोरिया के दुनिया भर के लक्ष्यों को मारने वाली मिसाइलें हासिल करने के संकल्प को दर्शाता है।
उत्तर कोरिया की बढ़ती सैन्य क्षमता उत्तर कोरिया पहले ही Hwasong-17 और Hwasong-18 जैसी इंटरकॉन्टिनेंटल बैलिस्टिक मिसाइलें (ICBM) विकसित कर चुका है, जो अमेरिका तक पहुंच सकती हैं। नया हाई-थ्रस्ट सॉलिड-फ्यूल इंजन इन मिसाइलों को और अधिक विश्वसनीय, तेज और घातक बनाने में मदद करेगा।
MIRV (मल्टीपल इंडिपेंडेंटली टारगेटेबल री-एंट्री व्हीकल) तकनीक के साथ एक मिसाइल पर कई वॉरहेड लगाने की क्षमता अमेरिकी एंटी-बैलिस्टिक सिस्टम जैसे GMD या THAAD को ओवरलोड कर सकती है।
यह परीक्षण ऐसे समय में हुआ है जब अमेरिका-इजरायल गठबंधन मध्य पूर्व में अपने सैन्य अभियान तेज कर रहा है। उत्तर कोरिया इसे अपनी सुरक्षा के लिए सीधा खतरा मान रहा है और इसलिए अपनी परमाणु और मिसाइल क्षमता को अपरिवर्तनीय बनाने पर जोर दे रहा है।
वैश्विक संदर्भ और भारत के लिए मायने यह घटनाक्रम न सिर्फ अमेरिका और दक्षिण कोरिया के लिए चिंता का विषय है, बल्कि पूरे एशिया-प्रशांत क्षेत्र को प्रभावित कर सकता है। उत्तर कोरिया-ईरान-रूस जैसे देशों के बीच बढ़ते सैन्य सहयोग से क्षेत्रीय सुरक्षा संतुलन प्रभावित हो रहा है।
भारत, जो हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और QUAD के माध्यम से शांति बनाए रखने की कोशिश कर रहा है, को उत्तर कोरिया के इस कार्यक्रम पर करीबी नजर रखनी होगी। बढ़ते वैश्विक तनाव में परमाणु प्रसार और मिसाइल तकनीक का हस्तांतरण नई चुनौतियां खड़ी कर सकता है।
आगे की राह किम जोंग उन की रणनीति स्पष्ट है—अपने देश को किसी भी बाहरी खतरे से बचाने के लिए परमाणु हथियारों और उन्नत मिसाइलों को मजबूत कवच के रूप में विकसित करना। अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया अपना कार्यक्रम लगातार आगे बढ़ा रहा है।
यह परीक्षण उत्तर कोरिया की दृढ़ता का संकेत है कि वह अमेरिका-इजरायल जैसे आक्रामक ताकतों के सामने झुकने वाला नहीं है। दुनिया अब फिर से इस घटनाक्रम पर नजर रखे हुए है। हालांकि, यह सिर्फ इंजन का ग्राउंड टेस्ट है—पूर्ण मिसाइल उड़ान परीक्षण अभी बाकी है—फिर भी यह विकास अमेरिका समेत कई देशों की धड़कनें बढ़ाने के लिए काफी है।
उत्तर कोरिया का यह कदम वैश्विक स्तर पर यह संदेश देता है कि जब आतंकवादी ताकतें दूसरों की संप्रभुता पर हमला करती हैं, तो स्वतंत्र राष्ट्र अपनी रक्षा के लिए हर जरूरी कदम उठाने को तैयार रहते हैं।
Sajjadali Nayani ✍
Friday World March 30,2026